19 जुलाई 2026
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हनुमान गढ़ी नमाज विवाद: जितेंद्रानंद सरस्वती बोले — बृजभूषण शरण सिंह को शर्म आनी चाहिए

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हनुमान गढ़ी नमाज विवाद: जितेंद्रानंद सरस्वती बोले — बृजभूषण शरण सिंह को शर्म आनी चाहिए

सारांश

हनुमान गढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज के विवाद में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के दावों को झूठ बताया। 2003 की घटना, अदालती माफी और ट्रस्ट डीड की धारा 10 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा — 'उन्हें शर्म आनी चाहिए।'

मुख्य बातें

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 19 जुलाई को पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और अविमुक्तेश्वरानंद के दावों को 'बड़ा झूठ' करार दिया।
20 नवंबर 2003 को 52 बीघे हनुमान गढ़ी परिसर में महंत ज्ञान दास के आवास में रोज़ा इफ्तार और नमाज अदा की गई थी।
फैजाबाद जिला न्यायालय के आदेश पर महंत ज्ञान दास ने लिखित माफी माँगी; 2005 में पुनः प्रयास पर मुकदमा दाखिल हुआ।
हनुमान गढ़ी नागाओं ने 14 दिनों तक धरना-अनशन किया; तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ ने समर्थन में पहुँचे।
स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि मंदिर का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य ने किया था, नवाब शुजा-उद-दौला ने नहीं।

अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने के विवाद में अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 19 जुलाई को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और अविमुक्तेश्वरानंद के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इतना बड़ा झूठ शायद ही किसी ने बोला हो।

2003 का वह 'काला दिन' — क्या हुआ था हनुमान गढ़ी में

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के अनुसार, 20 नवंबर 2003 को, जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, 52 बीघे के हनुमान गढ़ी परिसर में तत्कालीन महंत ज्ञान दास के आवासीय परिसर में रोज़ा इफ्तार पार्टी और नमाज अदा की गई थी। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में मुसलमानों को वहाँ बुलाया गया था और षड्यंत्र इतना व्यापक था कि यदि यह सफल हो जाता, तो भविष्य में पाँचों वक्त की नमाज के समय हनुमान जी के दर्शन बंद किए जा सकते थे।

स्वामी जितेंद्रानंद के अनुसार, नमाजी हनुमान जी की सीढ़ियों तक पहुँच गए थे। हालाँकि, हनुमान गढ़ी के ट्रस्ट डीड की धारा 10 में स्पष्ट लिखा है कि वहाँ किसी भी गैर-धर्म या संप्रदाय का प्रचार नहीं किया जा सकता।

अदालती कार्रवाई और महंत की लिखित माफी

इस घटना के विरोध में महंत धर्म दास, गौरी शंकर दास, रामबरन दास सहित पाँच संतों ने तत्कालीन फैजाबाद जिला न्यायालय में धारा 10 के उल्लंघन की अर्जी दाखिल की। स्वामी जितेंद्रानंद के अनुसार, तत्कालीन न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ल ने आदेश दिया कि महंत ज्ञान दास न्यायालय में लिखित माफी माँगें और पाँचों वादी संतों की गद्दी पर जाकर व्यक्तिगत रूप से भी माफी माँगें। इसके बाद ज्ञान दास ने लिखित माफी माँगी।

स्वामी जितेंद्रानंद ने बताया कि वर्ष 2005 में पुनः नमाज पढ़वाने का प्रयास किया गया, जिस पर मुकदमा दाखिल हुआ। इस दौरान हनुमान गढ़ी के नागाओं ने 14 दिनों तक अनशन और धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उस धरने को समर्थन देने के लिए तत्कालीन गोरखपुर सांसद और वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हनुमान गढ़ी पधारे थे।

मंदिर के इतिहास पर विवाद — नवाब बनाम महाराजा विक्रमादित्य

स्वामी जितेंद्रानंद ने मंदिर की उत्पत्ति को लेकर किए जा रहे दावों पर भी आपत्ति जताई। उनके अनुसार, यह कहना कि नवाब शुजा-उद-दौला ने हनुमान गढ़ी का निर्माण कराया, एक बड़ा पाप है। उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण सहित अन्य पुराणों में जिस मंदिर का उल्लेख है, वह किसी नवाब द्वारा नहीं, बल्कि महाराजा विक्रमादित्य द्वारा निर्मित है — उसी समय जब उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने कहा कि इसके ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद हैं और उन्हें झुठलाकर ज़ोर से बोलने से कुछ हासिल नहीं होता।

बृजभूषण शरण सिंह पर सीधा हमला

अखिल भारतीय संत समिति की ओर से स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि फैजाबाद (अब अयोध्या) जिला न्यायालय के अभिलेख और विभिन्न चैनलों के वीडियो यह प्रमाणित करते हैं कि 2003 में वहाँ नमाज अदा की गई थी। उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, 'संत का चोला ओढ़कर इस तरह का झूठ बोलना उचित नहीं है। उन्हें थोड़ी शर्म करनी चाहिए। हनुमान जी और भगवान राम सबका न्याय करेंगे।'

आगे क्या

यह विवाद अयोध्या में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस छेड़ चुका है। अखिल भारतीय संत समिति ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर अपना पक्ष सामने रखती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बृजभूषण शरण सिंह का पक्ष इस रिपोर्टिंग में अनुपस्थित है — संतुलित तस्वीर के लिए उनका जवाब ज़रूरी है। यह भी उल्लेखनीय है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अयोध्या राम मंदिर के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। ट्रस्ट डीड की धारा 10 और अदालती आदेश यदि सत्यापित होते हैं, तो यह मुद्दा महज बयानबाज़ी नहीं, बल्कि कानूनी और धार्मिक प्रशासन का गंभीर प्रश्न बन जाता है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान गढ़ी नमाज विवाद क्या है?
अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज पढ़े जाने के दावों को लेकर यह विवाद उठा है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 20 नवंबर 2003 की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि उस दिन परिसर में नमाज अदा की गई थी, जिसके बाद न्यायालय ने महंत से लिखित माफी माँगवाई थी।
2003 में हनुमान गढ़ी में क्या हुआ था?
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के अनुसार, 20 नवंबर 2003 को तत्कालीन महंत ज्ञान दास के आवासीय परिसर में रोज़ा इफ्तार पार्टी और नमाज हुई थी। इसके विरोध में पाँच संतों ने फैजाबाद जिला न्यायालय में अर्जी दाखिल की और न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ल के आदेश पर महंत ज्ञान दास ने लिखित माफी माँगी।
बृजभूषण शरण सिंह पर क्या आरोप लगाए गए?
अखिल भारतीय संत समिति ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने हनुमान गढ़ी में नमाज की घटना को लेकर झूठे दावे किए। स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि अदालती अभिलेख और वीडियो साक्ष्य सच्चाई को प्रमाणित करते हैं और बृजभूषण को शर्म आनी चाहिए।
हनुमान गढ़ी ट्रस्ट डीड की धारा 10 क्या कहती है?
हनुमान गढ़ी के ट्रस्ट डीड की धारा 10 के अनुसार, परिसर में किसी भी गैर-धर्म या संप्रदाय का प्रचार नहीं किया जा सकता। इसी धारा के उल्लंघन के आधार पर 2003 में पाँच संतों ने फैजाबाद जिला न्यायालय में अर्जी दाखिल की थी।
हनुमान गढ़ी मंदिर का निर्माण किसने कराया था?
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के अनुसार, हनुमान गढ़ी का निर्माण महाराजा विक्रमादित्य ने उसी समय कराया था जब उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर बनवाया था। उन्होंने कहा कि स्कंद पुराण सहित अन्य पुराणों में इसके प्रमाण हैं और नवाब शुजा-उद-दौला द्वारा निर्माण का दावा गलत है।
राष्ट्र प्रेस
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