हनुमानगढ़ी विवाद: अखिलेश यादव और बृजभूषण ने CM योगी के दावे को नकारा, UP की सियासत गरमाई
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 17 जुलाई को अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। दोनों नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
मुख्य घटनाक्रम
गोंडा के नंदिनी नगर स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में पहुँचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज़ नहीं पढ़ी गई। उन्होंने कहा कि वे बचपन से हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के लिए जाते रहे हैं और वहाँ इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। बृजभूषण ने यह भी उल्लेख किया कि हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम व्यक्ति का योगदान था, जिसका उल्लेख वहाँ लगे शिलालेख में दर्ज है।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में मुख्यमंत्री के दावे को 'मिथ्या प्रचार' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले से ध्यान भटकाने के लिए हनुमानगढ़ी का मुद्दा उठा रही है। यादव ने कहा कि जो लोग हनुमानगढ़ी को लेकर गलत प्रचार कर रहे हैं, उन्हें अपने कथित 'महापाप' का प्रायश्चित करना चाहिए और हनुमानगढ़ी से क्षमा माँगनी चाहिए।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा पर हमला बोलते हुए यह भी कहा कि जहाँ-जहाँ भाजपा और उसके सहयोगी हैं, वहाँ भ्रष्टाचार, गबन और लूट के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अभी केवल पहली परत खुली है और आगे और भी खुलासे होंगे।
CM योगी का मूल बयान क्या था
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दौरे के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि इन दलों ने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज़ पढ़वाने का काम किया था। मुख्यमंत्री ने सवाल किया था कि क्या जामा मस्जिद में कभी हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा सकता है, फिर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज़ किसने पढ़वाई।
सियासी संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी सरगर्मियाँ तेज हो रही हैं और धार्मिक स्थलों से जुड़े बयान राजनीतिक बहस का केंद्र बनते जा रहे हैं। उल्लेखनीय यह है कि इस बार BJP के भीतर से ही — बृजभूषण शरण सिंह के रूप में — मुख्यमंत्री के दावे पर असहमति सामने आई है, जो पार्टी के अंदरूनी तनाव को भी उजागर करती है।
आगे क्या
आलोचकों का कहना है कि इस विवाद के राजनीतिक रंग लेने से अयोध्या में धार्मिक सद्भाव पर असर पड़ सकता है। विभिन्न दलों के बयानों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में विधानसभा सत्र तक भी पहुँच सकता है।