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सूरत साइबर क्राइम: ₹26.20 लाख के ऑनलाइन निवेश घोटाले में 5 गिरफ्तार, एक खाते से ₹6.53 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन

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सूरत साइबर क्राइम: ₹26.20 लाख के ऑनलाइन निवेश घोटाले में 5 गिरफ्तार, एक खाते से ₹6.53 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन

सारांश

सूरत साइबर क्राइम सेल ने व्हाट्सएप और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के ज़रिए ₹26.20 लाख की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 5 सदस्यों को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से दबोचा। मामले में इस्तेमाल बैंक खाता देशभर में 149 साइबर शिकायतों और ₹6.53 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा पाया गया।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 5 आरोपियों को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के ज़रिए सूरत निवासी से ₹26.20 लाख की ठगी का आरोप है।
मामले में इस्तेमाल बैंक खाता देशभर में 149 साइबर अपराध शिकायतों और ₹6,53,43,924 के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा।
संदिग्ध लेनदेन की अवधि 1 मार्च 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच रही।
आरोपियों ने 'आरआरके पब्लिकबाजार प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से फर्जी खाता खोलकर इसे किराए पर देकर धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश जारी है।

सूरत शहर साइबर क्राइम सेल ने 18 जुलाई 2026 को एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया, जिन पर फर्जी शेयर बाज़ार ट्रेडिंग और निवेश योजना के ज़रिए एक सूरत निवासी से ₹26.20 लाख की ठगी करने का आरोप है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, इस मामले में इस्तेमाल किया गया बैंक खाता देशभर में 149 साइबर अपराध शिकायतों और ₹6.53 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा पाया गया है।

धोखाधड़ी का तरीका

अधिकारियों के अनुसार, ठगी की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया। वहाँ आरोपियों ने कथित तौर पर शेयर बाज़ार ट्रेडिंग के टिप्स साझा किए और दावा किया कि उनके एप्लिकेशन के ज़रिए ट्रेडिंग करने पर अच्छा मुनाफा मिलेगा।

पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा गया और उस पर खाता बनाने के लिए कहा गया। इसके बाद आरोपियों ने शिकायतकर्ता को शेयर बाज़ार में निवेश के नाम पर कई बैंक खातों में कुल ₹26.20 लाख ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया। जब पैसा वापस नहीं हुआ, तब पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

कानूनी कार्रवाई

शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम सेल ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत एफआईआर दर्ज की।

जाँच का पर्यवेक्षण सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) एसई डेनियल ने किया, जबकि पुलिस इंस्पेक्टर वीडी मंडोरा के नेतृत्व वाली टीम ने तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय लेनदेन की जाँच, डिजिटल साक्ष्य और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से आरोपियों का पता लगाया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल से पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार है:

रंजन उर्फ सुनील (33, सुंदरगढ़, ओडिशा), कृष्ण कुम्हार उर्फ किशन (54, झारसुगुड़ा, ओडिशा), सुभाषचंद्र (52, गजपति, ओडिशा), आलमगीर (41, पुरबा बर्धमान, पश्चिम बंगाल) और बसंतसिंह उर्फ सिंहसर उर्फ बिग बॉस (45, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल)।

गिरोह का नेटवर्क और संदिग्ध लेनदेन

जाँचकर्ताओं के अनुसार, रंजन और कृष्णा ने संयुक्त रूप से 'आरआरके पब्लिकबाजार प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से एक्सिस बैंक में चालू खाता खोला था। उन्होंने यह खाता कमीशन के बदले सुभाषचंद्र और आलमगीर को किराए पर दिया, जिन्होंने आगे इसकी बैंक खाता किट बसंतसिंह को सौंप दी। बसंतसिंह ने कथित तौर पर इसे गिरोह के फरार सदस्यों को साइबर धोखाधड़ी के लिए मुहैया कराया।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को IMPS और RTGS के ज़रिए नेट बैंकिंग द्वारा फरार साजिशकर्ताओं को हस्तांतरित किया। वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता की ₹50,000 की राशि इसी खाते के माध्यम से भेजी गई थी। जाँच में सामने आया कि 1 मार्च 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच इस खाते से ₹6,53,43,924 के संदिग्ध साइबर-धोखाधड़ी लेनदेन किए गए।

आगे की जाँच

पुलिस का कहना है कि गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश जारी है और अंतरराज्यीय समन्वय के ज़रिए नेटवर्क की पूरी कड़ी को उजागर करने की कोशिश की जा रही है। यह मामला उस बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है जहाँ साइबर गिरोह किराए के बैंक खातों के ज़रिए अपनी पहचान छुपाते हुए देशभर में ठगी को अंजाम देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 'मनी म्यूल' नेटवर्क के उस व्यापक तंत्र की एक कड़ी है जिसमें किराए के बैंक खाते साइबर अपराधियों की रीढ़ बन चुके हैं। एक ही खाते से 149 शिकायतें और ₹6.53 करोड़ के लेनदेन यह बताते हैं कि असली साजिशकर्ता अभी भी फरार हैं और पकड़े गए पाँच लोग मुख्यतः 'खाता किराएदार' हैं। जब तक बैंकों की केवाईसी प्रणाली और साइबर पुलिस के बीच रियल-टाइम डेटा साझेदारी नहीं होती, ऐसे गिरोह नए खाते और नए राज्य बदलकर ऑपरेट करते रहेंगे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत का ₹26.20 लाख का साइबर निवेश घोटाला क्या है?
यह एक अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी का मामला है जिसमें आरोपियों ने व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट के ज़रिए सूरत के एक निवासी को शेयर बाज़ार में मुनाफे का लालच देकर ₹26.20 लाख ट्रांसफर करा लिए। पैसा वापस न होने पर पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और वे कहाँ के हैं?
सूरत साइबर क्राइम सेल ने पाँच आरोपियों को गिरफ्तार किया — तीन ओडिशा (सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, गजपति) और दो पश्चिम बंगाल (पुरबा बर्धमान, मुर्शिदाबाद) से। इनमें रंजन उर्फ सुनील, कृष्ण कुम्हार, सुभाषचंद्र, आलमगीर और बसंतसिंह उर्फ बिग बॉस शामिल हैं।
इस मामले में इस्तेमाल बैंक खाते से कितने संदिग्ध लेनदेन हुए?
जाँचकर्ताओं के अनुसार, 1 मार्च 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच इस खाते से ₹6,53,43,924 के संदिग्ध साइबर-धोखाधड़ी लेनदेन हुए। यह खाता देशभर में 149 साइबर अपराध शिकायतों से भी जुड़ा पाया गया।
आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया?
आरोपियों ने 'आरआरके पब्लिकबाजार प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से एक्सिस बैंक में फर्जी चालू खाता खोला और उसे कमीशन के बदले किराए पर दिया। धोखाधड़ी से प्राप्त रकम IMPS और RTGS के ज़रिए नेट बैंकिंग द्वारा फरार साजिशकर्ताओं को हस्तांतरित की जाती थी।
ऑनलाइन निवेश घोटाले से बचने के लिए क्या करें?
किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर ट्रेडिंग टिप्स या 'गारंटीड मुनाफे' के दावों पर भरोसा न करें। SEBI-पंजीकृत प्लेटफॉर्म के अलावा किसी भी लिंक पर पैसा न डालें। ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्ट करें।
राष्ट्र प्रेस
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