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नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने ₹21.27 लाख की ऑनलाइन ठगी में चार आरोपी दबोचे, IGL कर्मचारी बनकर करते थे फर्जीवाड़ा

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नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने ₹21.27 लाख की ऑनलाइन ठगी में चार आरोपी दबोचे, IGL कर्मचारी बनकर करते थे फर्जीवाड़ा

सारांश

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने ₹21.27 लाख की ठगी में चार आरोपियों को दबोचा। ये IGL कर्मचारी बनकर फर्जी लिंक भेजते थे और पीड़ितों के मोबाइल का अनधिकृत एक्सेस लेकर बैंक खाते खाली करते थे — कमीशन के बदले क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराकर।

मुख्य बातें

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने 2 जुलाई को ₹21.27 लाख की ऑनलाइन ठगी में चार आरोपी गिरफ्तार किए।
आरोपी IGL कर्मचारी बनकर फर्जी लिंक भेजते थे; लिंक क्लिक करते ही पीड़ित का मोबाइल एक्सेस ठगों के पास पहुँच जाता था।
आरोपी सीधे ठगी नहीं करते थे, बल्कि 10–20% कमीशन के बदले अपने क्रेडिट कार्ड साइबर अपराधियों को देते थे।
सचिन कुमार के कार्ड में ₹1,49,490 और शाहनवाज शेख के कार्ड में ₹4,78,000 ट्रांसफर हुए; कुल पुष्ट रकम लगभग ₹6.5 लाख ।
आरोपियों पर BNS की धाराओं और IT Act की धारा 66, 66C, 66D के तहत मुकदमा दर्ज।
पुलिस ने नागरिकों को अनजान लिंक, OTP और बैंक विवरण साझा न करने की सलाह दी।

नोएडा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 2 जुलाई को ₹21.27 लाख की साइबर ठगी के एक संगठित मामले का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। अभिसूचना संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।

आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सचिन कुमार, शाहनवाज शेख, शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सचिन कुमार गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र का निवासी है, जबकि शेष तीनों आरोपी — शाहनवाज शेख, शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंहगौतमबुद्धनगर के बिसरख क्षेत्र के रहने वाले हैं।

ठगी का तरीका: IGL कर्मचारी बनकर भेजते थे फर्जी लिंक

जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी खुद को IGL (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) कंपनी का कर्मचारी बताकर पीड़ितों को बिल भुगतान के नाम पर फर्जी लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई पीड़ित उस लिंक पर क्लिक करता, उसके मोबाइल का अनधिकृत एक्सेस ठगों के पास पहुँच जाता था। इसके बाद आरोपी मोबाइल और बैंकिंग जानकारी का दुरुपयोग कर खातों से बड़ी रकम निकाल लेते थे।

गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपी सीधे तौर पर पीड़ितों को कॉल नहीं करते थे। ये साइबर अपराधियों को 10 से 20 प्रतिशत कमीशन के बदले अपने क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते थे, और इन्हीं कार्डों के ज़रिए ठगी की रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर की जाती थी।

किसके खाते में कितनी रकम आई

पुलिस के अनुसार, सचिन कुमार के क्रेडिट कार्ड में ठगी की ₹1,49,490 की राशि प्राप्त हुई, जबकि शाहनवाज शेख के कार्ड में कुल ₹4,78,000 ट्रांसफर किए गए। शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंह ने भी अपने क्रेडिट कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए। अब तक इनके खातों में लगभग ₹6.5 लाख की ठगी की रकम आने की पुष्टि हुई है।

कानूनी कार्रवाई और जांच की स्थिति

आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66, 66C और 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

पुलिस की जनता से अपील

साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, बैंक, गैस कंपनी या किसी अन्य संस्था के नाम पर आने वाले कॉल और संदेशों की पुष्टि आधिकारिक नंबर से करें, तथा OTP, बैंक विवरण और पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी से भी साझा न करें। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि संगठित साइबर गिरोह किस तरह आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी पीड़ित इसमें फँसते रहते हैं — जो डिजिटल साक्षरता की कमी को रेखांकित करता है। चार गिरफ्तारियाँ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन असली सरगना — जिसने फर्जी लिंक भेजे और रकम निकाली — अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। जब तक नेटवर्क के शीर्ष तक कार्रवाई नहीं पहुँचती, ऐसे गिरोह नए 'मनी म्यूल' के साथ काम जारी रख सकते हैं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा साइबर ठगी मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने सचिन कुमार (गाजियाबाद, क्रॉसिंग रिपब्लिक), शाहनवाज शेख, शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंह (तीनों गौतमबुद्धनगर, बिसरख) को गिरफ्तार किया। इन चारों पर ₹21.27 लाख की साइबर ठगी में सहयोग का आरोप है।
आरोपियों ने ठगी कैसे की?
आरोपी खुद को IGL कंपनी का कर्मचारी बताकर पीड़ितों को बिल भुगतान के नाम पर फर्जी लिंक भेजते थे। लिंक क्लिक करते ही पीड़ित के मोबाइल का एक्सेस ठगों के पास पहुँच जाता था और बैंक खाते से रकम निकाल ली जाती थी।
क्रेडिट कार्ड कमीशन नेटवर्क क्या था?
गिरफ्तार आरोपी सीधे ठगी नहीं करते थे, बल्कि 10 से 20 प्रतिशत कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को अपने क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते थे। इन कार्डों के ज़रिए ठगी की रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर की जाती थी।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और IT Act की धारा 66, 66C तथा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
साइबर ठगी से खुद को कैसे बचाएँ?
पुलिस की सलाह है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। बैंक, गैस कंपनी या किसी अन्य संस्था के नाम पर आने वाले कॉल और संदेशों की पुष्टि आधिकारिक नंबर से करें, और OTP, बैंक विवरण व पासवर्ड कभी साझा न करें।
राष्ट्र प्रेस
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