नोएडा में बीमा ठगी गिरोह का भंडाफोड़: दो साइबर जालसाज गिरफ्तार, ₹10 लाख की धोखाधड़ी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
गौतमबुद्ध नगर की साइबर क्राइम पुलिस ने 20 जुलाई 2026 को संकलित अभिसूचना और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी करने वाले एक साइबर गिरोह के दो सदस्यों को नोएडा से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अमिरुद्दीन (34 वर्ष), पुत्र सिराजुद्दीन, और मुशीर अंजुम (32 वर्ष), पुत्र नुरुल हसन के रूप में हुई है — दोनों दिल्ली के शाहीन बाग क्षेत्र के निवासी हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने म्यूल बैंक खातों के ज़रिए अब तक लगभग ₹10 लाख की ठगी की है।
ठगी का तरीका
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपी खुद को प्रतिष्ठित बीमा कंपनियों के अधिकृत एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे पीड़ितों को अधिक रिटर्न, बोनस, मैच्योरिटी राशि और विशेष निवेश योजनाओं का प्रलोभन देकर अपने खातों में धनराशि ट्रांसफर करा लेते थे। रकम मिलते ही आरोपी इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड तोड़कर फेंक देते थे, ताकि पुलिस उनतक आसानी से न पहुँच सके।
बरामदगी और साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, चार स्मार्टफोन और चार की-पैड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है, जिससे यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया तथा इसमें अन्य कौन-कौन शामिल हैं।
अंतरराज्यीय ठगी का जाल
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बैंक खातों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर विभिन्न राज्यों से कुल सात शिकायतें दर्ज हैं — तमिलनाडु से दो, महाराष्ट्र से एक और ओडिशा से चार। यह स्पष्ट करता है कि यह गिरोह केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में बीमा और निवेश के नाम पर साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्ध नगर में विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
नागरिकों के लिए सावधानी
साइबर क्राइम पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि बीमा पॉलिसी से जुड़ी किसी भी कॉल, मैसेज या निवेश प्रस्ताव पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। यदि कोई अधिक लाभ, बोनस या मैच्योरिटी राशि का लालच देकर भुगतान के लिए कहे, तो पहले उसकी पूरी जांच करें। आगामी फॉरेंसिक विश्लेषण के नतीजों के आधार पर इस मामले में और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।