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इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधी की गिरफ्तारी

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इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर के नाम पर ठगी करने वाले साइबर अपराधी की गिरफ्तारी

सारांश

नोएडा में साइबर क्राइम पुलिस ने एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर के नाम पर लोगों से पैसे ठगता था। जानें कैसे हुआ इसका पर्दाफाश और क्या हैं इसके पीछे के तथ्य।

मुख्य बातें

साइबर ठगी के मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है।
अनजान कॉल पर भरोसा न करें।
आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि करें।
साइबर ठगी की शिकायत तुरंत करें।
पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई सराहनीय है।

नोएडा, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। थाना साइबर क्राइम ने इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर कराने के बहाने आम जनता से ठगी करने वाले एक कुशल साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान अमन कुमार पुत्र शेषवीर सिंह, निवासी जिला फिरोजाबाद, उम्र लगभग २७ वर्ष के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार, एनसीआरपी (राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर २३ फरवरी को प्राप्त शिकायतों की तकनीकी जांच के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों का पता चला। साइबर क्राइम टीम ने इन नंबरों की गहन तकनीकी जांच की और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर नोएडा से आरोपी को पकड़ लिया।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी लोगों को फोन करके खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी बताता था और उन्हें उनकी पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर होने का झांसा देता था। वह पॉलिसी की राशि जारी करने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या अन्य शुल्क बताकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाता था।

पुलिस के अनुसार, आरोपी के बैंक खातों के खिलाफ उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से दो शिकायतें दर्ज की गई हैं। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी के खातों में लगभग २.८८ लाख रुपए की ठगी की राशि जमा हुई थी। पुलिस ने आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, १०,००० रुपए नकद और तीन बैंक खातों के स्टेटमेंट जब्त किए हैं।

इस मामले में थाना साइबर क्राइम ने बीएनएस की कई धाराओं के साथ आईटी एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसके गिरोह में और कौन लोग शामिल हैं और ठगी की कुल राशि कितनी है।

साइबर क्राइम पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई अज्ञात व्यक्ति इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर कराने के नाम पर पैसे मांगता है तो सावधान रहें, क्योंकि यह ठगी का एक सामान्य तरीका है। किसी भी अनजान कॉल, व्हाट्सएप संदेश या लिंक पर भरोसा न करें। बीमा या बैंक से संबंधित किसी भी जानकारी की पुष्टि संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत ग्राहक सेवा नंबर से करें। यदि आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन लोगों को भी अपने व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में सजग रहना होगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबर ठगी की पहचान कैसे करें?
यदि कोई अज्ञात व्यक्ति आपको फोन करके पैसे मांगता है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि आप ठगी का शिकार हो सकते हैं।
क्या करें यदि साइबर ठगी का शिकार हो जाऊं?
आपको तुरंत 1930 हेल्पलाइन या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
क्या पुलिस ने आरोपी से कोई जानकारी प्राप्त की?
जी हां, पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके गिरोह में और कौन शामिल हैं।
क्या यह पहली बार है जब इस तरह का अपराध हुआ है?
नहीं, इस तरह के साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना आवश्यक है।
इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर कराने के लिए क्या करना चाहिए?
किसी भी अनजान कॉल या लिंक पर विश्वास न करें और जानकारी को केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।
राष्ट्र प्रेस
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