जयशंकर के यूक्रेन दौरे पर शिवसेना ने कहा 'शांति की दिशा में कदम', कांग्रेस बोली — विदेश नीति सरेंडर हो गई
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबीहा से मुलाकात की, जिसमें भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के संभावित विकल्पों पर विस्तृत चर्चा हुई। 4 सितंबर को हुई इस यात्रा पर देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।
शिवसेना का समर्थन: 'भारत अमन-शांति का पक्षधर'
शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने जयशंकर के दौरे को सराहते हुए कहा कि विदेश मंत्री ने दोनों यूक्रेनी नेताओं से भारत-यूक्रेन संबंधों को सभी क्षेत्रों में मज़बूत करने, व्यापार बढ़ाने और युद्ध विराम के विकल्पों पर विचार-विमर्श किया। हेगड़े ने कहा, 'विदेश मंत्री का यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण है और भारत की हमेशा यह कोशिश रही है कि विश्व में अमन और शांति रहे। उनकी यह यात्रा इसी दिशा में जाती है।'
हेगड़े ने स्पष्ट किया कि जयशंकर ने दोनों नेताओं के साथ बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के 'कई विकल्प' सुझाए, जो भारत की परंपरागत शांतिवादी विदेश नीति के अनुरूप है।
कांग्रेस का तंज: 'दुनिया भारत को गंभीरता से नहीं लेती'
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'युद्ध में शांति के किसी भी प्रयास का पूरे हिंदुस्तान का समर्थन प्राप्त है, लेकिन आज की तारीख में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। भाजपा के शासनकाल में हमारी विदेश नीति के साथ समझौता हुआ, सरेंडर हो गई।'
राजपूत ने आगे कहा कि आज दुनिया में कोई भी देश भारत के विदेश मंत्री या प्रधानमंत्री को गंभीरता से नहीं लेता और इस दौरे का कितना असर होगा, यह वक्त बताएगा। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने की कोशिश की गई थी।
अन्य घरेलू मुद्दों पर भी बयानबाज़ी
इसी संदर्भ में शिवसेना प्रवक्ता हेगड़े ने कई अन्य घरेलू मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के उस कथित आदेश का उल्लेख किया जिसमें स्कूली छात्रों को वंदे मातरम पूरा गाने का निर्देश दिया गया है और नियम न मानने वाले स्कूलों की वित्तीय सहायता रोकने की बात कही गई है।
इसके अलावा, हेगड़े ने हल्द्वानी के कथित 'शुद्धिकरण' विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस मामले में जाँच की माँग की थी। हेगड़े ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वहाँ रामलीला कार्यक्रम के बाद स्थानीय युवा सफाई कर रहे थे।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस सफाई अभियान को दलितों का अपमान बताया था, जिसके बाद स्थानीय दलित युवाओं ने कथित तौर पर राहुल गांधी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई।
यात्रा का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है और दोनों पक्षों के साथ संवाद जारी रखा है। जयशंकर की यह यात्रा इसी बहुपक्षीय कूटनीति की कड़ी मानी जा रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस दौरे के बाद भारत-यूक्रेन संबंधों में ठोस प्रगति होती है या यह कूटनीतिक संकेत तक ही सीमित रहता है।