5 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर के यूक्रेन दौरे पर शिवसेना ने कहा 'शांति की दिशा में कदम', कांग्रेस बोली — विदेश नीति सरेंडर हो गई

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर के यूक्रेन दौरे पर शिवसेना ने कहा 'शांति की दिशा में कदम', कांग्रेस बोली — विदेश नीति सरेंडर हो गई

सारांश

जयशंकर का यूक्रेन दौरा भारत की संतुलन-साधक कूटनीति का नया अध्याय है — एक तरफ शिवसेना इसे शांति-प्रयास बता रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस सवाल उठा रही है कि क्या भारत की आवाज़ वैश्विक मंच पर अब भी उतनी ही वज़नदार है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 4 सितंबर को यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और विदेश मंत्री सिबीहा से मुलाकात की।
चर्चा में भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंध मज़बूत करने और रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के विकल्प शामिल रहे।
शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने दौरे को 'बेहद महत्वपूर्ण' और भारत की शांति-नीति के अनुरूप बताया।
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि भाजपा शासन में भारत की विदेश नीति 'सरेंडर हो गई' और दुनिया भारत को गंभीरता से नहीं लेती।
हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद और वंदे मातरम विवाद पर भी शिवसेना ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबीहा से मुलाकात की, जिसमें भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के संभावित विकल्पों पर विस्तृत चर्चा हुई। 4 सितंबर को हुई इस यात्रा पर देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

शिवसेना का समर्थन: 'भारत अमन-शांति का पक्षधर'

शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने जयशंकर के दौरे को सराहते हुए कहा कि विदेश मंत्री ने दोनों यूक्रेनी नेताओं से भारत-यूक्रेन संबंधों को सभी क्षेत्रों में मज़बूत करने, व्यापार बढ़ाने और युद्ध विराम के विकल्पों पर विचार-विमर्श किया। हेगड़े ने कहा, 'विदेश मंत्री का यह दौरा बहुत महत्वपूर्ण है और भारत की हमेशा यह कोशिश रही है कि विश्व में अमन और शांति रहे। उनकी यह यात्रा इसी दिशा में जाती है।'

हेगड़े ने स्पष्ट किया कि जयशंकर ने दोनों नेताओं के साथ बैठक में रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के 'कई विकल्प' सुझाए, जो भारत की परंपरागत शांतिवादी विदेश नीति के अनुरूप है।

कांग्रेस का तंज: 'दुनिया भारत को गंभीरता से नहीं लेती'

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'युद्ध में शांति के किसी भी प्रयास का पूरे हिंदुस्तान का समर्थन प्राप्त है, लेकिन आज की तारीख में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। भाजपा के शासनकाल में हमारी विदेश नीति के साथ समझौता हुआ, सरेंडर हो गई।'

राजपूत ने आगे कहा कि आज दुनिया में कोई भी देश भारत के विदेश मंत्री या प्रधानमंत्री को गंभीरता से नहीं लेता और इस दौरे का कितना असर होगा, यह वक्त बताएगा। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाने की कोशिश की गई थी।

अन्य घरेलू मुद्दों पर भी बयानबाज़ी

इसी संदर्भ में शिवसेना प्रवक्ता हेगड़े ने कई अन्य घरेलू मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के उस कथित आदेश का उल्लेख किया जिसमें स्कूली छात्रों को वंदे मातरम पूरा गाने का निर्देश दिया गया है और नियम न मानने वाले स्कूलों की वित्तीय सहायता रोकने की बात कही गई है।

इसके अलावा, हेगड़े ने हल्द्वानी के कथित 'शुद्धिकरण' विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस मामले में जाँच की माँग की थी। हेगड़े ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वहाँ रामलीला कार्यक्रम के बाद स्थानीय युवा सफाई कर रहे थे।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस सफाई अभियान को दलितों का अपमान बताया था, जिसके बाद स्थानीय दलित युवाओं ने कथित तौर पर राहुल गांधी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई।

यात्रा का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है और दोनों पक्षों के साथ संवाद जारी रखा है। जयशंकर की यह यात्रा इसी बहुपक्षीय कूटनीति की कड़ी मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस दौरे के बाद भारत-यूक्रेन संबंधों में ठोस प्रगति होती है या यह कूटनीतिक संकेत तक ही सीमित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न किसी की निंदा। शिवसेना का समर्थन और कांग्रेस की आलोचना, दोनों ही घरेलू राजनीति की उपज हैं, लेकिन राजपूत का यह सवाल कि 'दुनिया भारत को गंभीरता से नहीं लेती' — इसे खारिज करना आसान नहीं है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में तटस्थता बनाए रखी, मोदी-पुतिन और मोदी-ज़ेलेंस्की मुलाकातें हुईं, फिर भी युद्ध जारी है। असली कसौटी यह है कि इस यात्रा के बाद कोई ठोस शांति-ढाँचा सामने आता है या यह भी एक और कूटनीतिक प्रतीक बनकर रह जाती है।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर के यूक्रेन दौरे में क्या हुआ?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 सितंबर को यूक्रेन में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और विदेश मंत्री सिबीहा से मुलाकात की। बैठक में भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने और रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के विकल्पों पर चर्चा हुई।
शिवसेना ने जयशंकर के यूक्रेन दौरे पर क्या कहा?
शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने इस दौरे को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया और कहा कि भारत हमेशा विश्व में अमन और शांति चाहता है। उन्होंने कहा कि जयशंकर की यह यात्रा भारत की शांतिवादी विदेश नीति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
कांग्रेस ने इस दौरे की आलोचना क्यों की?
कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि शांति प्रयासों का समर्थन है, लेकिन भाजपा शासन में भारत की विदेश नीति 'सरेंडर हो गई' है। उनका तर्क है कि आज दुनिया में कोई भी देश भारत के विदेश मंत्री या प्रधानमंत्री को गंभीरता से नहीं लेता।
भारत रूस-यूक्रेन युद्ध में क्या भूमिका निभा रहा है?
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर मतदान से परहेज किया है और दोनों पक्षों के साथ कूटनीतिक संवाद जारी रखा है। जयशंकर की यूक्रेन यात्रा इसी बहुपक्षीय संतुलन-नीति की कड़ी है।
हल्द्वानी 'शुद्धिकरण' विवाद क्या है जिसका इस संदर्भ में उल्लेख हुआ?
हल्द्वानी में रामलीला कार्यक्रम के बाद हुई सफाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दलितों का अपमान बताया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले में जाँच की माँग करते हुए जे.पी. नड्डा को पत्र लिखा, जबकि भाजपा ने इसे सामान्य सफाई अभियान बताया। कथित तौर पर स्थानीय दलित युवाओं ने राहुल गांधी के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. कल
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले