जयशंकर की साइप्रस में बड़ी कूटनीति: यूक्रेन, सऊदी अरब और EU नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 28 मई 2025 को निकोसिया, साइप्रस में आयोजित यूरोपीय संघ (EU) के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक के दौरान कई वैश्विक नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इन बैठकों में यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और भारत-EU सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित चर्चाएं हुईं। जयशंकर को यह निमंत्रण EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास और साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस ने संयुक्त रूप से दिया था।
यूक्रेन विदेश मंत्री से सार्थक संवाद
जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की, जिसमें रूस-यूक्रेन युद्ध की मौजूदा स्थिति और यूक्रेन की बढ़ती सैन्य पहलों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद सिबिहा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'साइप्रस में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मेरी एक सार्थक मुलाकात हुई। हमने रूस-यूक्रेन युद्ध और युद्ध के मैदान की स्थिति पर चर्चा की — खासकर यूक्रेन की बढ़ती पहल के बारे में।'
सिबिहा ने आगे कहा, 'हमारा संदेश साफ है — हम इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और एक स्थायी तथा व्यापक शांति चाहते हैं। जैसे-जैसे यूरोप अपनी जिम्मेदारी बढ़ा रहा है, हम भारत की मजबूत आवाज और योगदान का स्वागत करते हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने आपसी हित के मुद्दों पर नियमित संवाद जारी रखने का निर्णय लिया।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री से पश्चिम एशिया पर चर्चा
जयशंकर ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से भी मुलाकात की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अच्छी बैठक हुई। पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट की बदलती स्थिति पर उनके विचार और समझ के लिए मैं आभारी हूं।' गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब गाजा संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
EU विदेश नीति प्रमुख के साथ भारत-EU सहयोग पर संवाद
जयशंकर ने EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के साथ भी बातचीत की। इस दौरान भारत-EU रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हुई। यह उल्लेखनीय है कि भारत को EU के विदेश मंत्रियों की इस अनौपचारिक बैठक में आमंत्रित किया जाना अपने आप में एक कूटनीतिक संकेत है — यह दर्शाता है कि यूरोप वैश्विक संकटों के समाधान में भारत की भूमिका को बढ़ती प्राथमिकता दे रहा है।
साइप्रस दौरे का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत यूक्रेन-रूस शांति प्रक्रिया में सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन और रूस दोनों के साथ बातचीत की पृष्ठभूमि में जयशंकर की यह यात्रा भारत की 'स्वतंत्र विदेश नीति' के व्यावहारिक क्रियान्वयन का उदाहरण मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, साइप्रस में इस तरह की बहुपक्षीय कूटनीति भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक वार्ताकार के रूप में स्थापित करती है।
आने वाले हफ्तों में यूक्रेन-भारत और भारत-EU स्तर पर नियमित उच्चस्तरीय संपर्क जारी रहने की संभावना है।