13 जुलाई 2026
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जयशंकर साइप्रस रवाना: EU विदेश मंत्रियों की 'जिमनिख' बैठक में भारत की भागीदारी

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जयशंकर साइप्रस रवाना: EU विदेश मंत्रियों की 'जिमनिख' बैठक में भारत की भागीदारी

सारांश

भारत को EU की अनौपचारिक 'जिमनिख' बैठक में विशेष आमंत्रण — यह सामान्य राजनयिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत-EU FTA और यूक्रेन संकट की पृष्ठभूमि में बढ़ती रणनीतिक निकटता का संकेत है। जयशंकर की लिमासोल यात्रा मोदी-वॉन डेर लेयेन गोटेबर्ग बैठक की सीधी अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

जयशंकर 27 मई को साइप्रस रवाना हुए; 27-28 मई को लिमासोल में EU की अनौपचारिक 'जिमनिख' बैठक में भाग लेंगे।
बैठक की सह-अध्यक्षता साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस और EU उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास करेंगी।
भारत के साथ सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद को भी विशेष आमंत्रित किया गया है।
एजेंडे में यूक्रेन युद्ध , क्षेत्रीय सुरक्षा और नई यूरोपीय सुरक्षा रणनीति पर चर्चा शामिल है।
17 मई को PM मोदी और उर्सुला वॉन डेर लेयेन की गोटेबर्ग बैठक में भारत-EU FTA पर सहमति के बाद यह यात्रा हो रही है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर बुधवार, 27 मई को यूरोपीय संघ (EU) के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक 'जिमनिख' बैठक में भाग लेने के लिए साइप्रस रवाना हुए। यह बैठक 27 और 28 मई को लिमासोल में आयोजित की जा रही है, जिसमें भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया गया है।

फ्रैंकफर्ट में राजनयिक मुलाकात

निकोसिया के लिए प्रस्थान से पूर्व जयशंकर का फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर जर्मनी में भारत के राजदूत अजित गुप्ते ने स्वागत किया। इस संक्षिप्त मुलाकात में राजदूत गुप्ते ने विदेश मंत्री को भारत-जर्मनी संबंधों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के लिए उनका मार्गदर्शन माँगा।

जर्मनी स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'माननीय विदेश मंत्री का फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर राजदूत अजीत गुप्ते ने स्वागत किया। साइप्रस में होने वाली EU विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए रवाना होने से पहले राजदूत ने भारत-जर्मनी संबंधों की जानकारी दी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए मार्गदर्शन माँगा।'

बैठक का स्वरूप और सह-अध्यक्षता

लिमासोल पोर्ट पर आयोजित इस अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेंटिनोस कोम्बोस और EU की विदेश एवं सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कैलास करेंगी। साइप्रस सरकार के अनुसार, जयशंकर के साथ सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

बुधवार शाम कोम्बोस की ओर से विदेशी मंत्रियों के सम्मान में एक रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा, जिसमें यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा भी शामिल होंगे।

एजेंडा: यूक्रेन युद्ध से लेकर यूरोपीय सुरक्षा रणनीति तक

28 मई को होने वाली मुख्य बैठक में यूक्रेन संघर्ष सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा एवं रक्षा से जुड़े रणनीतिक विषयों तथा नई यूरोपीय सुरक्षा रणनीति की तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब भारत और EU के बीच कूटनीतिक संवाद अपने उच्चतम स्तर पर है।

मोदी-वॉन डेर लेयेन मुलाकात का संदर्भ

यह यात्रा उस व्यापक कूटनीतिक पहल का हिस्सा है जो 17 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की गोटेबर्ग में हुई मुलाकात के बाद और तेज हुई है। उस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में द्विपक्षीय संबंधों की संभावनाओं पर सहमति जताई थी।

मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'गोटेबर्ग में राष्ट्रपति उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मिलकर खुशी हुई। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते के बाद भारत-यूरोप संबंधों में अपार संभावनाओं पर मैं पूरी तरह सहमत हूँ।' वॉन डेर लेयेन ने भी कहा था कि यह समझौता दोनों पक्षों के संबंधों में नए युग की शुरुआत करेगा और इसके लाभ जल्द से जल्द लोगों तथा कारोबार तक पहुँचाने के प्रयास जारी हैं।

आगे की दिशा

जयशंकर की इस यात्रा से भारत-EU रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। लिमासोल में होने वाली चर्चाएँ FTA वार्ता की रफ्तार और यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे में भारत की भूमिका — दोनों पर महत्वपूर्ण संकेत दे सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह EU की उस रणनीतिक पुनर्गणना को दर्शाता है जिसमें भारत को वैश्विक व्यवस्था में एक अनिवार्य साझेदार माना जा रहा है। यूक्रेन संकट पर भारत की 'तटस्थ किंतु संलग्न' नीति यूरोपीय राजधानियों में कभी सहज नहीं रही — फिर भी यह निमंत्रण बताता है कि व्यावहारिकता अब वैचारिक असहमति पर भारी पड़ रही है। FTA वार्ता की पृष्ठभूमि में जयशंकर की यह उपस्थिति व्यापार और सुरक्षा — दोनों मोर्चों पर भारत के बढ़ते कूटनीतिक भार का प्रमाण है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

EU की 'जिमनिख' बैठक क्या होती है और इसमें भारत को क्यों बुलाया गया?
'जिमनिख' EU विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक बैठक है जो आमतौर पर EU अध्यक्षता संभाल रहे देश में होती है। इस बार साइप्रस के लिमासोल में 27-28 मई को यह बैठक हो रही है, और भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया गया है — जो भारत-EU बढ़ती रणनीतिक निकटता का संकेत है।
लिमासोल बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी?
28 मई की बैठक में यूक्रेन युद्ध, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा, तथा नई यूरोपीय सुरक्षा रणनीति की तैयारियों पर विचार-विमर्श होगा। इसके अलावा भारत-EU रणनीतिक साझेदारी और FTA वार्ता की प्रगति भी अनौपचारिक एजेंडे का हिस्सा मानी जा रही है।
इस यात्रा का भारत-EU FTA से क्या संबंध है?
17 मई को गोटेबर्ग में PM मोदी और EU अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की बैठक में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर सकारात्मक संकेत दिए गए थे। जयशंकर की यह यात्रा उसी कूटनीतिक गति को आगे बढ़ाने की कड़ी है।
बैठक में और कौन-से देश शामिल हैं?
भारत के अलावा सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद को भी विशेष आमंत्रित किया गया है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा बुधवार शाम के रात्रिभोज में शामिल होंगे।
फ्रैंकफर्ट में जयशंकर की रुकावट का क्या महत्व है?
निकोसिया के लिए उड़ान से पहले फ्रैंकफर्ट में जर्मनी के भारतीय राजदूत अजित गुप्ते ने जयशंकर को भारत-जर्मनी संबंधों पर जानकारी दी। यह संक्षिप्त मुलाकात भारत की यूरोप नीति में जर्मनी की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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