जयशंकर साइप्रस में जिम्निच बैठक में शामिल, फ्रांस-स्पेन-पोलैंड समेत 5 यूरोपीय विदेश मंत्रियों से मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 28 मई 2026 को साइप्रस के लिमासोल में आयोजित यूरोपीय संघ (EU) के विदेश मंत्रियों की प्रतिष्ठित अनौपचारिक बैठक जिम्निच में भाग लेने पहुँचे। इस दौरान उन्होंने फ्रांस, स्पेन, पोलैंड, रोमानिया और नीदरलैंड के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत-यूरोपीय संघ संबंध व्यापार, तकनीक और रक्षा जैसे कई मोर्चों पर नई गहराई हासिल कर रहे हैं।
किन नेताओं से हुई मुलाकात
जयशंकर ने स्पेनिश विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस के साथ विशेष द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें व्यापार, तकनीक, रक्षा और पीपल-टू-पीपल संबंधों को और मजबूत करने के अगले कदमों पर चर्चा हुई। इसके अलावा उन्होंने फ्रांसीसी विदेश मंत्री नोएल बैरोट, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, रोमानिया की विदेश मंत्री ओआना त्सोयू और नीदरलैंड के विदेश मंत्री टॉम बेरेन्डसन से भी अलग-अलग मुलाकातें कीं।
बातचीत में क्या रहा केंद्र में
जयशंकर ने बताया कि इन वार्ताओं में उभरती बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में साझा हितों और व्यावहारिक सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि EU और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ भारत के संबंध व्यापार, तकनीक, रक्षा और पीपल-टू-पीपल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगातार गहरे हो रहे हैं। मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
जिम्निच बैठक क्या होती है
जिम्निच EU सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की एक अनौपचारिक और उच्च-स्तरीय बैठक है, जो हर छह महीने में EU परिषद की अध्यक्षता संभाल रहे देश द्वारा आयोजित की जाती है। इसका नाम जर्मनी के महल 'श्लॉस जिम्निच' पर रखा गया है, जहाँ 1974 में पहली बार यह अनौपचारिक बैठक हुई थी। इस मंच पर कोई बाध्यकारी निर्णय नहीं लिए जाते, लेकिन यह कूटनीतिक दिशा तय करने का अहम अवसर माना जाता है।
भारत-EU संबंधों के लिए महत्व
गौरतलब है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत जारी है, और रक्षा तथा तकनीक क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएँ भी तेज़ी से बढ़ रही हैं। इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की एक साथ पाँच यूरोपीय विदेश मंत्रियों से मुलाकात को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले महीनों में भारत-EU शिखर वार्ता की भी संभावना जताई जा रही है, जिसके मद्देनज़र यह बैठक ज़मीन तैयार करने का काम कर सकती है।