13 जुलाई 2026
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जयशंकर की साइप्रस राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात, पश्चिम एशिया और भूमध्यसागरीय हितों पर मंथन

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जयशंकर की साइप्रस राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात, पश्चिम एशिया और भूमध्यसागरीय हितों पर मंथन

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की निकोसिया में साइप्रस राष्ट्रपति से मुलाकात महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — यह हाल ही में घोषित रणनीतिक साझेदारी को ज़मीन पर उतारने की कोशिश थी। पश्चिम एशिया की उथल-पुथल के बीच भूमध्यसागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का यह संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 28 मई 2026 को निकोसिया में साइप्रस राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बदलते हालात और भूमध्य सागर में भारत के रणनीतिक हितों पर चर्चा की।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस 20-23 मई को भारत दौरे पर थे; हैदराबाद हाउस में PM मोदी से मिलने के बाद दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) के गठन, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग समेत कई समझौते हुए।
जयशंकर ने इस दौरे में नीदरलैंड, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन, एस्टोनिया और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से भी भेंट की।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 28 मई 2026 को निकोसिया में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से भेंट की और पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात तथा भूमध्य सागर में भारत के रणनीतिक हितों पर विस्तृत चर्चा की। यह मुलाकात जयशंकर के साइप्रस के आधिकारिक दौरे के दौरान हुई, जहाँ वे यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भी भाग ले रहे हैं।

मुलाकात के मुख्य बिंदु

बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज साइप्रस रिपब्लिक के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मिलकर खुशी हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुभकामनाएं दीं।' उन्होंने यह भी कहा कि हाल के राजकीय दौरे के सकारात्मक परिणाम आए हैं और साझेदारी अगले चरण में पहुँच गई है। जयशंकर ने राष्ट्रपति को मजबूत फॉलो-अप का भरोसा दिलाया।

रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस 20 से 23 मई तक भारत के आधिकारिक दौरे पर थे। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की थी कि दोनों देश अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत करने पर सहमत हो गए हैं। मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'हमारी साझेदारी सच में एक मजबूत और भविष्योन्मुखी साझेदारी है, जो साझा मूल्यों पर आधारित है।'

द्विपक्षीय समझौतों के नतीजे

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुई वार्ता से कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए। इनमें आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) के गठन पर समझौता, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग, तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में साझेदारी शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है।

व्यापक कूटनीतिक संदर्भ

जयशंकर के इस दौरे में नीदरलैंड, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन, एस्टोनिया और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें हुईं। यह यूरोपीय संघ की अनौपचारिक विदेश मंत्री बैठक के इतर भारत की सक्रिय बहुपक्षीय कूटनीति का हिस्सा है। मोदी ने निवेश संबंधों पर भी जोर देते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच बढ़ता आर्थिक जुड़ाव उत्साहजनक है और आने वाले समय में व्यापार एवं आर्थिक संबंध और प्रगाढ़ होंगे।

आगे की राह

रणनीतिक साझेदारी की घोषणा और आतंकवाद-रोधी JWG के गठन के साथ, भारत-साइप्रस संबंध एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमध्यसागरीय क्षेत्र में साइप्रस की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए यूरोप और पश्चिम एशिया दोनों से जुड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा आतंकवाद-रोधी JWG और शैक्षणिक सहयोग जैसे ढाँचों के क्रियान्वयन में होगी। साइप्रस की भूमध्यसागरीय स्थिति भारत को यूरोपीय संघ और पश्चिम एशिया दोनों तक पहुँच का एक वैकल्पिक मार्ग देती है — ऐसे समय में जब क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ रही है। हालाँकि, यह साझेदारी कितनी गहरी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापार और निवेश के वादे कागज़ से निकलकर वास्तविकता बनते हैं या नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और साइप्रस राष्ट्रपति की मुलाकात में क्या हुआ?
विदेश मंत्री जयशंकर ने 28 मई 2026 को निकोसिया में साइप्रस राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस से भेंट की और पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति तथा भूमध्य सागर में भारत के हितों पर चर्चा की। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु और PM मोदी की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी कब घोषित हुई?
यह घोषणा 20-23 मई 2026 के दौरान राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई। PM मोदी ने बैठक के बाद दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक उन्नत करने की घोषणा की।
भारत-साइप्रस वार्ता से कौन से प्रमुख समझौते हुए?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) के गठन, सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस और साइप्रस की डिप्लोमैटिक एकेडमी के बीच सहयोग, तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में साझेदारी पर समझौते हुए।
जयशंकर के साइप्रस दौरे का व्यापक उद्देश्य क्या था?
जयशंकर यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में भाग लेने के लिए साइप्रस गए थे। इस दौरे में उन्होंने नीदरलैंड, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन, एस्टोनिया और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों से भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं।
भारत के लिए साइप्रस की रणनीतिक अहमियत क्या है?
साइप्रस भूमध्य सागर में यूरोपीय संघ और पश्चिम एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण भौगोलिक कड़ी है। भारत के लिए यह साझेदारी यूरोपीय संपर्क और पश्चिम एशिया में बदलते हालात दोनों के संदर्भ में कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से उपयोगी है।
राष्ट्र प्रेस
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