विदेश मंत्री जयशंकर की कैरिबियाई यात्रा: ज्यूरिख एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत, जमैका-सूरीनाम-त्रिनिदाद दौरे पर रवाना
सारांश
Key Takeaways
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी 2 से 10 मई तक की कैरिबियाई देशों की आधिकारिक यात्रा के क्रम में ज्यूरिख हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इंडिया-स्विट्जरलैंड के प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका हार्दिक स्वागत किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर इस दौरे में जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा करेंगे।
यात्रा का उद्देश्य और एजेंडा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा के दौरान जयशंकर तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत होगी, जिनमें दोनों पक्षों की साझा रुचि है। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री इन देशों में व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे।
भारत और कैरिबियाई देशों का ऐतिहासिक रिश्ता
जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो का भारत के साथ एक विशेष ऐतिहासिक संबंध है, जिसकी जड़ें गिरमिटिया मजदूरों की विरासत में हैं। ये वे भारतीय श्रमिक थे, जो 19वीं सदी के मध्य और अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान अनुबंध के आधार पर काम करने के लिए इन देशों में गए थे और बाद में वहीं बस गए। गौरतलब है कि 'गिरमिट' शब्द अंग्रेज़ी के 'एग्रीमेंट' (Agreement) का अपभ्रंश है, जो उनके श्रम अनुबंध को दर्शाता था।
दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर जोर
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और इन तीनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ करेगी तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग एवं विकास को नई गति देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक रूप से मजबूत करने में जुटा है। तीनों देश कैरिबियन समुदाय (CARICOM) के सदस्य हैं।
कैरिकॉम के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता
पिछले महीने जयशंकर ने भारत में सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग के उद्घाटन का स्वागत किया था और कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस में सेंट किट्स और नेविस की सक्रिय भागीदारी की भी सराहना की थी। इसके साथ ही, जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस को इस वर्ष जनवरी में CARICOM की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी थी। यह दौरा भारत और कैरिबियाई देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।