विदेश मंत्री जयशंकर की कैरिबियाई यात्रा: ज्यूरिख एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत, जमैका-सूरीनाम-त्रिनिदाद दौरे पर रवाना

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विदेश मंत्री जयशंकर की कैरिबियाई यात्रा: ज्यूरिख एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत, जमैका-सूरीनाम-त्रिनिदाद दौरे पर रवाना

सारांश

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की यात्रा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह गिरमिटिया विरासत से जुड़े देशों के साथ भारत के संबंधों को नई ऊँचाई देने की कोशिश है। CARICOM के साथ बढ़ती सक्रियता वैश्विक दक्षिण में भारत की रणनीतिक पहुँच का हिस्सा है।

Key Takeaways

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2 से 10 मई 2025 तक जमैका , सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर हैं। ज्यूरिख हवाई अड्डे पर इंडिया-स्विट्जरलैंड प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका स्वागत किया। यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना, दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और भारतीय समुदाय से संवाद करना है। तीनों देश CARICOM के सदस्य हैं और यहाँ गिरमिटिया भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी है। पिछले महीने जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग उद्घाटन का स्वागत किया था और CARICOM अध्यक्षता पर बधाई दी थी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी 2 से 10 मई तक की कैरिबियाई देशों की आधिकारिक यात्रा के क्रम में ज्यूरिख हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां इंडिया-स्विट्जरलैंड के प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका हार्दिक स्वागत किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर इस दौरे में जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा करेंगे।

यात्रा का उद्देश्य और एजेंडा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा के दौरान जयशंकर तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत होगी, जिनमें दोनों पक्षों की साझा रुचि है। मंत्रालय के अनुसार, विदेश मंत्री इन देशों में व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी संवाद करेंगे।

भारत और कैरिबियाई देशों का ऐतिहासिक रिश्ता

जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो का भारत के साथ एक विशेष ऐतिहासिक संबंध है, जिसकी जड़ें गिरमिटिया मजदूरों की विरासत में हैं। ये वे भारतीय श्रमिक थे, जो 19वीं सदी के मध्य और अंत में ब्रिटिश शासन के दौरान अनुबंध के आधार पर काम करने के लिए इन देशों में गए थे और बाद में वहीं बस गए। गौरतलब है कि 'गिरमिट' शब्द अंग्रेज़ी के 'एग्रीमेंट' (Agreement) का अपभ्रंश है, जो उनके श्रम अनुबंध को दर्शाता था।

दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर जोर

विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत और इन तीनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ करेगी तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग एवं विकास को नई गति देगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक रूप से मजबूत करने में जुटा है। तीनों देश कैरिबियन समुदाय (CARICOM) के सदस्य हैं।

कैरिकॉम के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता

पिछले महीने जयशंकर ने भारत में सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग के उद्घाटन का स्वागत किया था और कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंध और प्रगाढ़ होंगे। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस में सेंट किट्स और नेविस की सक्रिय भागीदारी की भी सराहना की थी। इसके साथ ही, जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस को इस वर्ष जनवरी में CARICOM की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी थी। यह दौरा भारत और कैरिबियाई देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है।

Point of View

जो शुद्ध व्यापारिक कूटनीति से परे है। हालाँकि, सवाल यह है कि क्या ये उच्च-स्तरीय यात्राएँ ठोस आर्थिक और विकास साझेदारियों में परिणत हो रही हैं या केवल राजनयिक संवाद तक सीमित हैं। CARICOM के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर वोट-बैंक कूटनीति की दृष्टि से भी अहम है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

विदेश मंत्री जयशंकर की कैरिबियाई यात्रा का उद्देश्य क्या है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2 से 10 मई 2025 तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और भारतीय समुदाय से संवाद स्थापित करना है।
जयशंकर ज्यूरिख एयरपोर्ट पर क्यों रुके?
जयशंकर कैरिबियाई देशों की यात्रा के मार्ग में ज्यूरिख हवाई अड्डे पर रुके, जहाँ इंडिया-स्विट्जरलैंड के प्रतिनिधि अनूप ढींगरा ने उनका स्वागत किया। स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास ने इसकी जानकारी आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट पर साझा की।
गिरमिटिया समुदाय कौन हैं और उनका भारत से क्या संबंध है?
गिरमिटिया वे भारतीय मजदूर थे जो 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान अनुबंध के आधार पर जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद जैसे देशों में काम करने गए थे। 'गिरमिट' शब्द अंग्रेज़ी के 'एग्रीमेंट' का अपभ्रंश है और इन देशों में आज भी भारतीय मूल की बड़ी आबादी निवास करती है।
CARICOM क्या है और भारत का इससे क्या संबंध है?
CARICOM यानी कैरिबियन समुदाय, कैरिबियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है जिसके जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो सदस्य हैं। भारत इस संगठन के देशों के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग और इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसे मंचों पर सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
जयशंकर ने हाल ही में कैरिबियाई देशों के साथ और क्या कदम उठाए हैं?
पिछले महीने जयशंकर ने भारत में सेंट किट्स और नेविस के उच्चायोग के उद्घाटन का स्वागत किया था। इसके अलावा उन्होंने जनवरी में CARICOM की अध्यक्षता संभालने पर सेंट किट्स और नेविस को बधाई दी थी और इंटरनेशनल सोलर अलायंस में उसकी सक्रिय भागीदारी की सराहना की थी।
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