पाकिस्तान: PECA मामले में वकीलों ईमान मजारी और हादी चट्ठा की अपील पर 100 दिन बाद भी सुनवाई नहीं, HRC चिंतित
पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी-पाकिस्तान) ने शनिवार, 2 मई 2026 को पाकिस्तान सरकार और संबंधित न्यायिक अधिकारियों से मानवाधिकार वकीलों ईमान ज़ैनब मजारी-हाज़िर और हादी अली चट्ठा के कानूनी अधिकारों की तत्काल रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। परिषद ने चेतावनी दी कि अपीलों की सुनवाई में लंबी देरी निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और कानून के शासन को गंभीर रूप से कमज़ोर कर सकती है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) के तहत सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े प्रकरण में दर्ज हुआ था। जनवरी 2026 में इस्लामाबाद की एक सत्र अदालत ने ईमान और उनके पति हादी को कुल 17 वर्ष की सजा सुनाई थी और दोनों पर 3.6 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। दोनों मानवाधिकार वकीलों की गिरफ्तारी और सजा की दुनिया भर में व्यापक आलोचना हुई है।
सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका
ईमान और हादी ने गुरुवार को पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपनी सजा के खिलाफ अपीलों की जल्द सुनवाई की मांग की। नई याचिका में दोनों वकीलों ने अनुरोध किया है कि अपीलों की सुनवाई 4 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की जाए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी माँग की है कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट (IHC) में लंबित आपराधिक अपील के अंतिम निस्तारण तक विवादित फैसले के तहत दी गई सजा पर रोक लगाई जाए।
IHC का पूर्व आदेश और सजा पर रोक नहीं
17 फरवरी 2026 को IHC ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील स्वीकार कर ली थी और सजा निलंबन याचिका पर नोटिस जारी किया था, लेकिन सजा पर रोक नहीं लगाई थी। सर्वोच्च न्यायालय में दायर आवेदन में ईमान और हादी ने 17 फरवरी के इसी IHC आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति माँगी है।
एचआरसी-पाकिस्तान की चिंता और माँगें
एचआरसी-पाकिस्तान ने कहा,