पाकिस्तान में पीईसीए बना पत्रकारों का सबसे बड़ा दुश्मन, 15 महीनों में 233 घटनाएँ दर्ज

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पाकिस्तान में पीईसीए बना पत्रकारों का सबसे बड़ा दुश्मन, 15 महीनों में 233 घटनाएँ दर्ज

सारांश

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026 से पहले PPF की रिपोर्ट ने पाकिस्तान में पत्रकारिता की भयावह तस्वीर पेश की है — 15 महीनों में 233 घटनाएँ, PECA का बेलगाम दुरुपयोग, महिला पत्रकारों पर एआई-जनित हमले और आर्थिक दबाव। यह सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित दमन की कहानी है।

Key Takeaways

PPF रिपोर्ट में जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ 233 घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें 67 हमले , 67 आपराधिक शिकायतें , 11 गिरफ्तारियाँ , 11 हिरासत और 3 अपहरण शामिल हैं। 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 में PECA का इस्तेमाल किया गया — यह पत्रकारों के खिलाफ सबसे पसंदीदा कानूनी हथियार बन चुका है। मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली को PECA के तहत 17 साल जेल की सजा सुनाई गई। महिला पत्रकार बेनजीर शाह समेत कई महिला पत्रकारों को एआई-जनरेटेड मनगढ़ंत सामग्री से निशाना बनाया गया। नवंबर 2025 में स्थापित संघीय मीडिया सुरक्षा आयोग को अभी वास्तविक स्वायत्तता और संसाधन मिलना बाकी है।

पाकिस्तान प्रेस फाउंडेशन (PPF) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पत्रकारों को जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच कानूनी दबाव, शारीरिक हिंसा, डिजिटल उत्पीड़न और वित्तीय दबाव के रूप में कम से कम 233 घटनाओं का सामना करना पड़ा। 'विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2026' से ठीक पहले जारी इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान में मीडिया की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है।

मुख्य घटनाक्रम

PPF की रिपोर्ट में दर्ज 233 घटनाओं में 67 हमले, 67 आपराधिक शिकायतें, 11 गिरफ्तारियाँ, 11 हिरासत और 3 अपहरण शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट (PECA) अब पत्रकारों के खिलाफ सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला कानूनी हथियार बन चुका है। दर्ज 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 में PECA का प्रयोग किया गया।

पाकिस्तानी दैनिक 'डॉन' के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि PECA में 2025 की शुरुआत में संशोधन किया गया था। PPF के अनुसार, यह संशोधन किसी भी स्टेकहोल्डर से परामर्श किए बिना संसद में जबरदस्ती पारित कराया गया।

PECA का दुरुपयोग और न्यायिक परिणाम

मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली — जिन्होंने PECA से जुड़े मामलों में पत्रकारों की पैरवी की थी — को इसी कानून के तहत 17 साल जेल की सजा सुनाई गई। यह मामला इस बात का प्रतीक बन गया है कि कानूनी बचाव करने वाले भी इस कानून की जद में आ सकते हैं।

नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) की तरफ से आने वाले नोटिस और समन अब एक आम बात बन गए हैं। PPF के अनुसार, पैटर्न बेहद निराशाजनक और अनुमानित है — कोई पत्रकार कुछ ऐसा प्रकाशित करता है जो किसी को रास नहीं आता, और उसके तुरंत बाद उसके खिलाफ शिकायत दर्ज हो जाती है।

महिला पत्रकारों पर एआई-जनित हमले

रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पाकिस्तान में महिला पत्रकारों को एआई-जनरेटेड कंटेंट के जरिए निशाना बनाया जा रहा है। PPF ने 2025-26 में ऐसे कई मामले दर्ज किए जिनमें महिला पत्रकारों से जुड़ी मनगढ़ंत सामग्री ऑनलाइन फैलाई गई।

पत्रकार बेनजीर शाह ने नवंबर 2025 में बताया कि उनका एक एआई-जनरेटेड वीडियो एक ऐसे अकाउंट से शेयर किया गया था जिसे संघीय सूचना मंत्री भी फॉलो करते हैं। PPF ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमले महिला पत्रकारों के पेशेवर काम को चुनौती देने के लिए नहीं, बल्कि बेहद निजी और लैंगिक तरीकों से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

आर्थिक दबाव और नियामक कार्रवाई

रिपोर्ट के अनुसार, 'डॉन' को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों को रोकना उस पर आर्थिक दबाव डालने की एक कोशिश थी। उर्दू दैनिक 'सहाफत' को भी कथित तौर पर इसी तरह के बर्ताव का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (PEMRA) ने उन मीडिया संस्थानों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए जिन्होंने तय 'रेड लाइंस' को चुनौती दी।

8 मार्च को इस्लामाबाद में 'महिला मार्च' को कवर कर रहे पत्रकारों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लगभग आठ घंटे तक हिरासत में रखा। गिरफ्तारी के दौरान पत्रकारों से उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जमा करने को कहा गया, जो मौजूदा कानूनों द्वारा दी गई निजता की सुरक्षा का उल्लंघन था।

आगे की राह

नवंबर 2025 में 'पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों की सुरक्षा के लिए संघीय आयोग' की स्थापना को PPF ने एक स्वागत योग्य कदम बताया, लेकिन चेतावनी दी कि इसे वास्तव में कार्यशील बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन और वास्तविक स्वायत्तता अनिवार्य है। रिपोर्ट इन विफलताओं को 'दंडमुक्ति' के एक व्यापक पैटर्न के संदर्भ में देखती है, और यह सवाल खड़ा करती है कि क्या पाकिस्तान में प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बनाए गए संस्थान वाकई स्वतंत्र रूप से काम कर पाएँगे।

Point of View

उन्हें भी उसी कानून से दंडित किया गया — यह न्यायिक बचाव के रास्ते बंद करने की सुनियोजित रणनीति की ओर इशारा करता है। महिला पत्रकारों पर एआई-जनित हमले और सरकारी विज्ञापनों की वापसी मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जहाँ आत्म-सेंसरशिप ही सबसे बड़ा खतरा बन जाती है।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में PECA कानून क्या है और इसे पत्रकारों के खिलाफ कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है?
PECA यानी 'पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट' एक साइबर अपराध कानून है जिसमें 2025 की शुरुआत में बिना किसी स्टेकहोल्डर परामर्श के संशोधन किए गए। PPF रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 में इसी कानून का उपयोग पत्रकारों को निशाना बनाने के लिए किया गया।
PPF की रिपोर्ट में कितनी घटनाएँ दर्ज की गई हैं?
PPF की रिपोर्ट में जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पत्रकारों के खिलाफ कम से कम 233 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें 67 हमले, 67 आपराधिक शिकायतें, 11 गिरफ्तारियाँ, 11 हिरासत और 3 अपहरण शामिल हैं।
महिला पत्रकारों को एआई-जनरेटेड कंटेंट से कैसे निशाना बनाया जा रहा है?
PPF ने 2025-26 में ऐसे कई मामले दर्ज किए जिनमें महिला पत्रकारों की मनगढ़ंत एआई-निर्मित सामग्री ऑनलाइन फैलाई गई। पत्रकार बेनजीर शाह के मामले में नवंबर 2025 में एक एआई-जनरेटेड वीडियो उस अकाउंट से शेयर किया गया जिसे संघीय सूचना मंत्री भी फॉलो करते हैं।
ईमान जैनब मजारी-हाजिर को PECA के तहत क्यों सजा दी गई?
मानवाधिकार वकील ईमान जैनब मजारी-हाजिर और उनके पति हादी अली ने PECA से जुड़े मामलों में पत्रकारों की पैरवी की थी, जिसके बाद उन्हें इसी कानून के तहत 17 साल जेल की सजा सुनाई गई। यह मामला पाकिस्तान में कानूनी बचाव के रास्ते बंद होने की गंभीर मिसाल माना जा रहा है।
पाकिस्तान में मीडिया पर आर्थिक दबाव कैसे डाला जा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, 'डॉन' को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापन रोके गए और उर्दू दैनिक 'सहाफत' को भी कथित तौर पर इसी तरह के बर्ताव का सामना करना पड़ा। PEMRA ने उन मीडिया संस्थानों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए जिन्होंने तय सीमाओं को चुनौती दी।
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