तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी का दावा: किसानों से किए सभी वादे पूरे कर रही कांग्रेस सरकार
सारांश
Key Takeaways
तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने रविवार, 3 मई 2026 को खम्मम जिले में आयोजित प्रजा दरबार में कहा कि राज्य सरकार चुनाव घोषणा पत्र में किए गए प्रत्येक वादे को एक-एक कर पूरा कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से किसानों से जुड़े आश्वासनों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 'किसान हितैषी' सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें ज़मीन पर उतार रही है।
किसानों के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
मंत्री रेड्डी ने बताया कि धान और मक्का की फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है और भुगतान एक सप्ताह के भीतर सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कर दिया जाता है। इसके अलावा, सरकार ने 25 लाख किसानों के ₹2 लाख रुपए तक के फसल ऋण माफ किए हैं।
रायथु भरोसा योजना के तहत वित्तीय सहायता बढ़ाकर ₹12,000 प्रति एकड़ कर दी गई है। इसके साथ ही, उत्तम धान पर ₹500 प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है।
कृषि उपकरण सब्सिडी वितरण कार्यक्रम
मंत्री ने घोषणा की कि प्रजा पालन अभियान के तहत किसान उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 5, 6 और 7 मई को वारंगल में किसानों को सब्सिडी पर कृषि उपकरण वितरित किए जाएंगे। उन्होंने किसान भाइयों से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
किसान आयोग और प्रशासनिक सुधार
श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद किसान आयोग की स्थापना की गई। उन्होंने कहा कि प्रजा पालन कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को समस्या समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है — इसके बजाय अधिकारी सीधे लोगों तक पहुँचकर याचिकाएँ प्राप्त कर रहे हैं और मौके पर ही समाधान दे रहे हैं।
बीआरएस पर निशाना
पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (BRS) सरकार पर हमला बोलते हुए मंत्री रेड्डी ने कहा कि बीआरएस सरकार ने खम्मम में समर्थन मूल्य की माँग करने वाले किसानों को हथकड़ी पहनाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वे किसानों को झूठे प्यार का झाँसा देकर फँसाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 10 वर्षों के शासन में किसानों को सब्सिडी पर कृषि उपकरण उपलब्ध नहीं कराए। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ दूर नहीं हैं और किसान नीति एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।