चीन में 110 पत्रकार हिरासत में, आरएसएफ रिपोर्ट में दुनिया का सबसे बड़ा 'मीडिया जेल' करार
सारांश
Key Takeaways
पेरिस स्थित संगठन रिपोर्टर्स विथाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की ताज़ा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा पत्रकार-जेल बन चुका है, जहाँ वर्तमान में 110 पत्रकार और 3 मीडिया कर्मी हिरासत में हैं। 3 मई 2026 को जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी सरकार निगरानी, धमकी और दबाव के ज़रिए स्वतंत्र पत्रकारिता को व्यवस्थित रूप से कुचल रही है।
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में चीन की स्थिति
वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2026 में चीन 180 देशों में 178वें स्थान पर है — यानी नीचे से तीसरे पायदान पर। उससे नीचे केवल नॉर्थ कोरिया (179वाँ) और इरिट्रिया (180वाँ) हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष चीन की रैंकिंग 176 थी, यानी एक साल में दो पायदान और नीचे खिसक गया।
उप-श्रेणियों में भी चीन की स्थिति चिंताजनक है — राजनीतिक और कानूनी मामलों में 179वाँ, सामाजिक मामलों में 177वाँ और आर्थिक मामलों में 173वाँ स्थान। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि पत्रकारिता पर दबाव केवल एकल स्तर पर नहीं, बल्कि हर आयाम पर मौजूद है।
झांग झान का मामला: दूसरी बार सज़ा
रिपोर्ट में पत्रकार झांग झान के मामले को विशेष रूप से उजागर किया गया है। 19 सितंबर 2025 को एक बंद कमरे में हुई सुनवाई के बाद उन्हें 'झगड़ा करने और परेशानी खड़ी करने' के आरोप में चार साल की सज़ा सुनाई गई। आरएसएफ के अनुसार यह उन पर 'झूठे आरोपों' में दूसरी बार दी गई सज़ा है।
झान को 28 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल उन्हें शंघाई के पुडोंग डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उनके वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे वे अपने मामले में सही तरीके से अपील भी नहीं कर पा रही हैं। आरएसएफ ने मार्च में चीनी अधिकारियों की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की थी कि उन्होंने झान को बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है।
सुनवाई के दौरान कम से कम सात देशों के राजनयिक और पाँच कार्यकर्ता अदालत में प्रवेश की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। कुछ को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया गया।
पहली गिरफ्तारी: कोविड रिपोर्टिंग का खामियाज़ा
झांग झान को पहली बार मई 2020 में तब गिरफ्तार किया गया था, जब उन्होंने वुहान से कोविड-19 महामारी के दौरान ज़मीनी रिपोर्टिंग की थी। उस दौरान उन्होंने 100 से अधिक वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किए थे। यह ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में महामारी की शुरुआती जानकारी को लेकर चीन की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे थे।
आरएसएफ की माँग और अंतरराष्ट्रीय अपील
आरएसएफ की एशिया-पैसिफिक एडवोकेसी मैनेजर एलेक्जेंड्रा बिएलाकोव्स्का ने कहा,