क्वेटा की हुडा जेल में BYC का धरना, 'फेसलेस ट्रायल' को बताया असंवैधानिक
सारांश
मुख्य बातें
मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती समिति (BYC) के नेताओं ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा स्थित हुडा जेल के भीतर धरना दिया — यह विरोध उस 'फेसलेस ट्रायल' के खिलाफ था जिसे संगठन 'असंवैधानिक, अवैध और पारदर्शी न्याय के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध' मानता है। 16 जून 2025 को यह धरना लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा, जो पाकिस्तान में न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्य घटनाक्रम
BYC ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक बयान साझा कर बताया कि हुडा जेल प्रशासन ने जेल के भीतर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। संगठन के अनुसार, 'जेल के अंदर किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही — हमारे नेताओं के परिजन और वकील घंटों प्रतीक्षा करते हैं, इसके बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो पा रही।' BYC ने आशंका जताई कि इस अलगाव का उपयोग हिरासत में बंद नेताओं पर दबाव बनाने या उत्पीड़न के लिए किया जा सकता है।
BYC की माँगें
संगठन ने तीन मुख्य माँगें रखी हैं: राजनीतिक कैदियों के कानूनी एवं मानवाधिकारों का सम्मान, जेल के भीतर चल रही कथित 'अवैध कार्रवाइयों' पर तत्काल रोक, और नेताओं के खिलाफ जारी 'फेसलेस ट्रायल' को समाप्त करना। BYC का कहना है कि उसके नेता पिछले 14 महीनों से बिना किसी सिद्ध अपराध के हिरासत में हैं, और इस दौरान शारीरिक रिमांड तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के ज़रिए नेतृत्व को कमज़ोर करने की कोशिश की गई है।
न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल
BYC ने बताया कि पहले खुले कोर्ट में सुनवाई हुई, फिर जेल ट्रायल शुरू हुआ और अब 'फेसलेस प्रोसीडिंग्स' चल रही हैं। संगठन का आरोप है कि ये लगातार बदलती न्यायिक प्रक्रियाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि ये फैसले कानून पर नहीं, बल्कि शक्ति के प्रयोग पर आधारित हैं।
महरंग बलूच और अन्य नेताओं की हिरासत
BYC की प्रमुख आयोजक महरंग बलूच सहित कई नेता मार्च 2025 से हुडा जेल में बंद हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने वैश्विक स्तर पर उनकी हिरासत को लेकर चिंता जताई है और इसे 'फर्जी तथा राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों' पर आधारित बताया है।
बलूच नेशनल मूवमेंट की प्रतिक्रिया
बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) ने भी महरंग बलूच और उनके साथियों के खिलाफ चल रही न्यायिक कार्यवाही को 'दिखावे की न्यायिक प्रक्रिया' करार दिया है। BNM का आरोप है कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था वास्तव में सेना के अधीन एक 'कठपुतली तंत्र' की तरह काम कर रही है। BNM के अनुसार, हुडा जेल के भीतर एक 'फेसलेस कोर्ट' स्थापित कर दी गई है और इन्हीं के ज़रिए मामलों की सुनवाई की जा रही है, जो न्याय का उपहास है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। BYC ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा। पाकिस्तानी जेल प्रशासन और सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।