8 अगस्त 2026
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क्वेटा जेल में BYC नेताओं का धरना नौवें दिन जारी, महरंग बलोच का 'फेसलेस ट्रायल' पर कड़ा विरोध

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क्वेटा जेल में BYC नेताओं का धरना नौवें दिन जारी, महरंग बलोच का 'फेसलेस ट्रायल' पर कड़ा विरोध

सारांश

क्वेटा की हुडा जेल में BYC नेताओं का धरना नौ दिन पार कर गया है। महरंग बलोच का 'फेसलेस ट्रायल' से इनकार और खुली अदालत की माँग बलूचिस्तान में न्यायिक पारदर्शिता की बहस को नई धार दे रही है — ऐसे समय में जब आतंकवाद निरोधी कानून में संशोधन ने हिरासत के अधिकारों पर सवाल और गहरे कर दिए हैं।

मुख्य बातें

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेताओं का क्वेटा की हुडा जेल में धरना 22 जून 2025 को नौवें दिन भी जारी रहा।
महरंग बलोच समेत बेबर्ग बलोच , शाह जी बलोच , बीबो बलोच और गुलजादी बलोच धरने में शामिल हैं।
BYC का आरोप है कि नेताओं की सहमति के बिना 'फेसलेस ट्रायल' जारी रखी गई और राज्य-नियुक्त वकील थोपे गए।
महरंग बलोच की दो प्रमुख माँगें — खुली अदालत में सुनवाई और न्यायाधीश मुहम्मद अली मुबीन का तबादला।
परिवारों को बंद नेताओं से मिलने की अनुमति नहीं; बलूचिस्तान विधानसभा द्वारा आतंकवाद निरोधी कानून में संशोधन पर भी चिंता जताई गई।

बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा स्थित हुडा जेल में बंद बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) के नेताओं का जेल के भीतर शांतिपूर्ण धरना 22 जून 2025 को लगातार नौवें दिन भी जारी रहा। BYC के अनुसार, उनके नेता कथित 'फेसलेस ट्रायल' और न्यायिक प्रक्रिया में अनियमितताओं के विरोध में भीषण गर्मी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच अपने संवैधानिक अधिकारों की माँग कर रहे हैं।

धरने की शुरुआत और मुख्य घटनाक्रम

BYC के अनुसार, डॉ. महरंग बलोच, बेबर्ग बलोच, शाह जी बलोच, बीबो बलोच और गुलजादी बलोच सहित कई नेताओं ने जेल के भीतर ही यह धरना शुरू किया था। 13 जून को अदालत में पेशी के दौरान महरंग बलोच को पता चला कि उनके मामलों को 'फेसलेस ट्रायल' प्रणाली में स्थानांतरित किया जा रहा है, जिसके तत्काल विरोध में उन्होंने बैरकों में लौटने से इनकार कर दिया।

संगठन का आरोप है कि बंद नेताओं ने इन अदालती कार्यवाहियों और राज्य द्वारा नियुक्त वकीलों को स्वीकार करने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। इसके बावजूद, उनकी सहमति के बिना सुनवाई जारी रखी गई और सरकारी वकीलों को उन पर थोप दिया गया।

महरंग बलोच की माँगें

जेल से जारी एक बयान में महरंग बलोच ने कहा, 'फेसलेस ट्रायल पारदर्शी न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे आरोपियों का अपनी कानूनी रक्षा करने का बुनियादी अधिकार प्रभावित होता है।' उन्होंने दो प्रमुख माँगें रखी हैं — पहली, मामलों की सुनवाई खुली अदालत में की जाए, और दूसरी, आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश मुहम्मद अली मुबीन का तबादला किया जाए।

महरंग ने यह भी कहा कि यह धरना उन्हें बलूच आंदोलन के लंबे संघर्ष की याद दिलाता है, जिसमें लोगों ने जबरन गायब किए जाने, हत्याओं और राज्य हिंसा के बावजूद अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई।

परिवारों पर असर और पारदर्शिता पर सवाल

BYC ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि परिवारों को अपने प्रियजनों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है और न्यायिक प्रक्रिया सार्वजनिक निगरानी से दूर संचालित की जा रही है। संगठन के अनुसार, इससे निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान में नागरिक अधिकारों को लेकर पहले से ही व्यापक बहस जारी है।

आतंकवाद निरोधी कानून में संशोधन पर चिंता

महरंग बलोच ने बलूचिस्तान विधानसभा द्वारा हाल ही में आतंकवाद निरोधी कानून में किए गए संशोधनों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, इन बदलावों के बाद केवल संदेह के आधार पर भी किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, जिससे नागरिक अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर आशंकाएँ और गहरी हो गई हैं।

आगे की स्थिति

BYC के नेताओं का धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहने का संकेत है, जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं। गौरतलब है कि पाकिस्तान में 'फेसलेस ट्रायल' प्रणाली को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी चिंताएँ जताई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तानी अधिकारी इन माँगों पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल सवाल न्यायिक पारदर्शिता और बुनियादी प्रक्रियागत अधिकारों का है — जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की कसौटी है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) का क्वेटा जेल में धरना क्यों हो रहा है?
BYC नेताओं ने कथित 'फेसलेस ट्रायल' और न्यायिक प्रक्रिया में अनियमितताओं के विरोध में हुडा जेल के भीतर धरना शुरू किया। उनका कहना है कि उनकी सहमति के बिना सुनवाई जारी रखी गई और राज्य-नियुक्त वकील उन पर थोपे गए।
'फेसलेस ट्रायल' क्या है और इस पर आपत्ति क्यों है?
'फेसलेस ट्रायल' एक ऐसी न्यायिक प्रणाली है जिसमें न्यायाधीश या गवाहों की पहचान छुपाई जाती है और सुनवाई सार्वजनिक निगरानी से दूर होती है। BYC का कहना है कि यह पारदर्शी न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है और आरोपियों के अपनी कानूनी रक्षा के बुनियादी अधिकार को प्रभावित करता है।
महरंग बलोच की प्रमुख माँगें क्या हैं?
महरंग बलोच ने दो माँगें रखी हैं — पहली, उनके मामलों की सुनवाई खुली अदालत में हो, और दूसरी, आतंकवाद निरोधी अदालत के न्यायाधीश मुहम्मद अली मुबीन का तबादला किया जाए। उन्होंने 13 जून को अदालत में पेशी के दौरान 'फेसलेस ट्रायल' की जानकारी मिलते ही विरोध शुरू किया था।
बलूचिस्तान में आतंकवाद निरोधी कानून में क्या बदलाव हुए हैं?
बलूचिस्तान विधानसभा ने हाल ही में आतंकवाद निरोधी कानून में संशोधन किए हैं, जिनके तहत कथित तौर पर केवल संदेह के आधार पर भी किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है। महरंग बलोच और BYC ने इन बदलावों को नागरिक अधिकारों के लिए खतरनाक बताया है।
धरने में कौन-कौन से BYC नेता शामिल हैं?
BYC के अनुसार, डॉ. महरंग बलोच, बेबर्ग बलोच, शाह जी बलोच, बीबो बलोच और गुलजादी बलोच सहित कई नेता इस धरने में शामिल हैं। ये सभी क्वेटा की हुडा जेल में बंद हैं और 22 जून 2025 तक नौ दिनों से धरना दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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