स्टालिन की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाएं, SIR प्रक्रिया रोकी जाए
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 23 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। स्टालिन ने आरोप लगाया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने 10 महीनों में 14 बार ऐसे निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई, जो उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे। यह बयान सोशल मीडिया पर जारी किया गया और इसने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
स्टालिन के अनुसार, चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने मतदाताओं को जोड़ने और हटाने के निर्णयों तथा मतदाता सूची प्रबंधन सॉफ्टवेयर के संचालन को लेकर बार-बार आपत्तियाँ उठाईं। इन आपत्तियों के बावजूद, कथित तौर पर निर्णय लिए जाते रहे — जो तीन सदस्यीय आयोग की सर्वसम्मति या बहुमत की संवैधानिक प्रक्रिया के विपरीत है।
स्टालिन ने सवाल उठाया कि यदि दो आयुक्त निर्णयों से अनजान थे, तो वे निर्णय किस अधिकार से और किसकी स्वीकृति से लिए गए? उन्होंने यह भी पूछा कि अदालत द्वारा निर्देशित मतदाताओं को सूची में शामिल करने के खिलाफ दाखिल अपील को किसने अधिकृत किया, और अन्य आयुक्तों को इसकी सूचना कथित तौर पर क्यों नहीं दी गई।
SIR प्रक्रिया पर आपत्ति
स्टालिन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को तत्काल रोकने की भी माँग की। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूचियों से हटाए गए। इसके अलावा, मतदाता सूची सॉफ्टवेयर में कथित तकनीकी प्रतिबंधों के चलते मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने में असमर्थ रहे, जिसमें योग्य मतदाताओं को जोड़ना भी शामिल था।
गौरतलब है कि DMK और अन्य विपक्षी दलों ने पहले भी मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का विरोध किया था। स्टालिन ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले किए गए इन संशोधनों के कारण गंभीर अनियमितताएं हुईं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में।
संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल
स्टालिन ने कहा कि इन खुलासों से न केवल SIR अभ्यास के बाद हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, बल्कि एक ऐसी संस्था में आम जनता का विश्वास भी डगमगाता है जिससे स्वतंत्र और पारदर्शी रूप से कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, इन सवालों के जवाब में संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।
विपक्ष की एकजुट माँग
DMK अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग करते हुए औपचारिक नोटिस दे चुके हैं। इस माँग को दोहराते हुए उन्होंने अधिकारियों से तीन ठोस कदम उठाने का आग्रह किया — मुख्य आयुक्त को तुरंत पद से हटाना, SIR प्रक्रिया को स्थगित करना, और आयोग के भीतर लिए गए विवादित निर्णयों की स्वतंत्र जांच कराना।
आगे क्या होगा
यह मामला अब चुनाव आयोग की आंतरिक जवाबदेही और मतदाता सूची प्रबंधन की पारदर्शिता, दोनों को एक साथ केंद्र में ला देता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है — उनका जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।