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स्टालिन की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाएं, SIR प्रक्रिया रोकी जाए

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स्टालिन की मांग: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाएं, SIR प्रक्रिया रोकी जाए

सारांश

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की माँग की है। उनका आरोप है कि दो आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्ति जताई, फिर भी उनकी जानकारी के बिना निर्णय लिए गए — जो चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन ने 23 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाने की माँग की।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार आयोग के निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई।
स्टालिन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को तत्काल रोकने की माँग की।
आरोप है कि मतदाता सूची सॉफ्टवेयर में प्रतिबंधों के कारण ERO अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग नहीं कर सके।
स्टालिन ने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले हुई कथित अनियमितताओं का विशेष उल्लेख किया।
विपक्षी दल पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने का औपचारिक नोटिस दे चुके हैं।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 23 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। स्टालिन ने आरोप लगाया कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने 10 महीनों में 14 बार ऐसे निर्णयों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई, जो उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे। यह बयान सोशल मीडिया पर जारी किया गया और इसने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

स्टालिन के अनुसार, चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने मतदाताओं को जोड़ने और हटाने के निर्णयों तथा मतदाता सूची प्रबंधन सॉफ्टवेयर के संचालन को लेकर बार-बार आपत्तियाँ उठाईं। इन आपत्तियों के बावजूद, कथित तौर पर निर्णय लिए जाते रहे — जो तीन सदस्यीय आयोग की सर्वसम्मति या बहुमत की संवैधानिक प्रक्रिया के विपरीत है।

स्टालिन ने सवाल उठाया कि यदि दो आयुक्त निर्णयों से अनजान थे, तो वे निर्णय किस अधिकार से और किसकी स्वीकृति से लिए गए? उन्होंने यह भी पूछा कि अदालत द्वारा निर्देशित मतदाताओं को सूची में शामिल करने के खिलाफ दाखिल अपील को किसने अधिकृत किया, और अन्य आयुक्तों को इसकी सूचना कथित तौर पर क्यों नहीं दी गई।

SIR प्रक्रिया पर आपत्ति

स्टालिन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) को तत्काल रोकने की भी माँग की। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूचियों से हटाए गए। इसके अलावा, मतदाता सूची सॉफ्टवेयर में कथित तकनीकी प्रतिबंधों के चलते मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ERO) अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने में असमर्थ रहे, जिसमें योग्य मतदाताओं को जोड़ना भी शामिल था।

गौरतलब है कि DMK और अन्य विपक्षी दलों ने पहले भी मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का विरोध किया था। स्टालिन ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले किए गए इन संशोधनों के कारण गंभीर अनियमितताएं हुईं, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में।

संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल

स्टालिन ने कहा कि इन खुलासों से न केवल SIR अभ्यास के बाद हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, बल्कि एक ऐसी संस्था में आम जनता का विश्वास भी डगमगाता है जिससे स्वतंत्र और पारदर्शी रूप से कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, इन सवालों के जवाब में संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।

विपक्ष की एकजुट माँग

DMK अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्षी दल पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग करते हुए औपचारिक नोटिस दे चुके हैं। इस माँग को दोहराते हुए उन्होंने अधिकारियों से तीन ठोस कदम उठाने का आग्रह किया — मुख्य आयुक्त को तुरंत पद से हटाना, SIR प्रक्रिया को स्थगित करना, और आयोग के भीतर लिए गए विवादित निर्णयों की स्वतंत्र जांच कराना।

आगे क्या होगा

यह मामला अब चुनाव आयोग की आंतरिक जवाबदेही और मतदाता सूची प्रबंधन की पारदर्शिता, दोनों को एक साथ केंद्र में ला देता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है — उनका जवाब इस विवाद की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ERO के सॉफ्टवेयर-स्तरीय अधिकारों के हनन का सवाल — जो मतदाता पंजीकरण की जड़ों को प्रभावित करता है — वह कहीं अधिक गहरी जवाबदेही की माँग करता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमके स्टालिन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग क्यों की?
स्टालिन ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — की जानकारी या सहमति के बिना निर्णय लिए। इन दोनों आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई, जो संवैधानिक प्रक्रिया के विपरीत है।
SIR (विशेष गहन संशोधन) क्या है और इसे रोकने की माँग क्यों की जा रही है?
SIR यानी विशेष गहन संशोधन वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को अद्यतन किया जाता है। स्टालिन का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए और ERO अधिकारी सॉफ्टवेयर प्रतिबंधों के कारण योग्य मतदाताओं को जोड़ने में असमर्थ रहे।
क्या चुनाव आयोग के भीतर इस तरह की असहमति पहले भी सामने आई है?
वर्तमान मामले में 10 महीनों में 14 दर्ज आपत्तियाँ असाधारण रूप से अधिक हैं। तीन सदस्यीय आयोग को सर्वसम्मति या बहुमत से निर्णय लेने का संवैधानिक दायित्व है, और इस स्तर की आंतरिक असहमति सार्वजनिक रूप से दुर्लभ है।
इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ सकता है?
स्टालिन ने कहा है कि इन खुलासों से SIR के बाद हुए विधानसभा चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। यदि SIR प्रक्रिया जारी रहती है, तो आगामी चुनावों में मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता पर विवाद और गहरा हो सकता है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक चुनाव आयोग की ओर से स्टालिन के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आयोग का जवाब इस पूरे विवाद की आगे की दिशा निर्धारित करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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