8 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दीपावली पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को लगाया पारंपरिक उबटन, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दीपावली पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को लगाया पारंपरिक उबटन, भस्म आरती में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

दीपावली पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को पारंपरिक उबटन और अभ्यंग स्नान के साथ दीप महोत्सव का शुभारंभ हुआ। भस्म आरती में देशभर से उमड़े श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय कर दिया।

मुख्य बातें

8 नवंबर 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
बाबा महाकाल को पारंपरिक उबटन (विविध सुगंध और द्रव्यों से निर्मित) लगाया गया और अभ्यंग स्नान कराया गया।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ कपाट खोले गए; पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरानुसार भस्म अर्पित की गई।
नए अन्न और नई सब्जी से भोग लगाया गया, इसे अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है।
मंदिर परिसर में फूलझड़ियाँ, पटाखे और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से उत्सव का माहौल रहा।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 8 नवंबर 2026 को दीपावली महोत्सव का शुभारंभ बाबा महाकाल के पारंपरिक उबटन और अभ्यंग स्नान के साथ हुआ। भस्म आरती के इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।

परंपरा के अनुसार हुई विशेष पूजा-अर्चना

मंदिर के पुजारी ने बताया कि दीप महोत्सव के अवसर पर बाबा महाकाल के स्वरूप को उबटन लगाकर निखारा जाता है। यह उबटन विविध सुगंध और द्रव्यों के मिश्रण से तैयार की जाती है और भगवान को श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाती है। पुजारी ने यह भी जानकारी दी कि 8 नवंबर से बाबा का गर्म जल से स्नान भी प्रारंभ हो गया है, जो शीत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।

परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

मुख्य घटनाक्रम: कपाट खुलने से आरती तक

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। इसके बाद जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से बाबा का अभिषेक संपन्न हुआ।

दिव्य शृंगार और भस्म आरती संपन्न होते ही मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों, शंखध्वनि, झांझ-मंजीरे और डमरू की ध्वनि ने पूरे परिसर को भक्तिमय कर दिया।

अन्नकूट महोत्सव की परंपरा

पुजारी के अनुसार, दीपावली के इस पर्व पर बाबा को नए अन्न और नई सब्जी से भोग लगाया जाता है, इसलिए इसे अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिर परिसर में फूलझड़ियाँ छोड़ी गईं और पटाखे फोड़े गए। भक्तों में दीप महोत्सव का विशेष उल्लास देखा गया।

श्रद्धालुओं में उत्साह, देशभर में जाता है संदेश

बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी में बाबा के दर्शन के लिए पहुँचे। पुजारी ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर से दीपावली पर्व का संदेश पूरे देश में फैलता है। बाबा महाकाल की भस्म आरती में सम्मिलित होकर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि समूचे भारत की आस्था का केंद्र है। आगामी दिनों में मंदिर में उत्सव का यह सिलसिला जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की जीवित सांस्कृतिक परंपरा का प्रमाण है — जहाँ सदियों पुरानी रीतियाँ आज भी उतनी ही श्रद्धा और विधि-विधान से निभाई जाती हैं। उज्जैन का यह ज्योतिर्लिंग केंद्र इस बात को रेखांकित करता है कि धार्मिक पर्यटन और आस्था का संगम किस तरह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक एकजुटता दोनों को पोषित करता है। हालाँकि, बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने के साथ भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं की पर्याप्तता जैसे व्यावहारिक पहलू भी ध्यान माँगते हैं, जिन पर मंदिर प्रशासन को निरंतर ध्यान देना होगा।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली पर अभ्यंग स्नान क्या होता है?
अभ्यंग स्नान एक पारंपरिक अनुष्ठान है जिसमें बाबा महाकाल को विशेष सुगंधित उबटन लगाकर और गर्म जल से स्नान कराया जाता है। यह परंपरा दीपावली के पावन अवसर पर की जाती है और इसे दिव्य शृंगार का अंग माना जाता है।
महाकाल भस्म आरती में भस्म कहाँ से आती है और इसका महत्व क्या है?
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए यह आरती अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
उज्जैन में दीपावली पर अन्नकूट महोत्सव क्यों मनाया जाता है?
महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली पर नए अन्न और नई सब्जी से बाबा को भोग लगाया जाता है, इसलिए इसे अन्नकूट महोत्सव कहते हैं। यह नई फसल के प्रति कृतज्ञता और भगवान को प्रथम भोग अर्पित करने की पुरानी परंपरा है।
महाकालेश्वर मंदिर के कपाट दीपावली पर कैसे खोले जाते हैं?
भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया जाता है, फिर भस्म आरती संपन्न होती है।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली का उत्सव क्यों खास माना जाता है?
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ से दीपावली पर्व का संदेश पूरे देश में जाता है। पारंपरिक उबटन, भस्म आरती, अभ्यंग स्नान और अन्नकूट जैसी सदियों पुरानी परंपराओं का यहाँ सजीव निर्वहन होता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले