31 अगस्त 2026
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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: फूलों, सूखे मेवों और भांग से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

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महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: फूलों, सूखे मेवों और भांग से हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार

सारांश

भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का फूलों, सूखे मेवों और भांग से दिव्य शृंगार किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा के अनुसार भस्म आरती संपन्न हुई और 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा।

मुख्य बातें

31 अगस्त 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया (सुबह 8:51 तक) पर श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का फूलों, सूखे मेवों और भांग से विशेष शृंगार किया गया।
भगवान वीरभद्र की आज्ञा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर के कपाट खोले गए।
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, फलों का रस) से अभिषेक और महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म आरती अर्पित की गई।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 31 अगस्त 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। फूलों, सूखे मेवों और भांग से सजे बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने का क्रम

सोमवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से भर गया।

पंचामृत अभिषेक और शृंगार

मंदिर के कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया और तत्पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े तथा शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल का फूलों, सूखे मेवों और भांग से विशेष शृंगार किया गया।

महानिर्वाणी अखाड़े की परंपरा

परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के पश्चात बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की उपस्थिति और नियम

भस्म आरती के दौरान पुरुष श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक धोती-सोला तथा महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस दिव्य दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीती रात से ही उज्जैन की पावन नगरी में पहुँचकर कतारबद्ध हो गए थे। यह भस्म आरती देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का सर्वोच्च केंद्र मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का आधार भी है — लाखों श्रद्धालुओं की आस्था यहाँ के स्थानीय व्यापार और पर्यटन को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ती है। महाकाल लोक कॉरिडोर के विस्तार के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस परंपरा की व्यापक पहुँच को रेखांकित करती है। यह आयोजन यह भी दर्शाता है कि भारत की धार्मिक विरासत आज भी जन-जीवन के केंद्र में है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर का सबसे पवित्र और प्राचीन अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस आरती के बाद बाबा निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती में शामिल होने के लिए क्या नियम हैं?
भस्म आरती में पुरुष श्रद्धालुओं को पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है। इस आरती के लिए पूर्व पंजीकरण आवश्यक होता है और श्रद्धालु रात से ही कतारबद्ध होते हैं।
महाकाल की भस्म आरती किसके द्वारा की जाती है?
परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। मंदिर के पुजारी महाआरती संपन्न कराते हैं।
31 अगस्त को महाकाल का शृंगार कैसे किया गया?
31 अगस्त 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया पर बाबा महाकाल का फूलों, सूखे मेवों और भांग से विशेष शृंगार किया गया। इससे पहले पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस) से अभिषेक किया गया और कपूर आरती के बाद बाबा ने मुकुट धारण किया।
उज्जैन महाकाल मंदिर के कपाट कैसे खोले जाते हैं?
प्रतिदिन तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच बाबा महाकाल के कपाट खोले जाते हैं। इसके बाद जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती का क्रम संपन्न होता है।
राष्ट्र प्रेस
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