28 जून 2026
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महाकाल का भव्य भस्म आरती शृंगार: भांग, चंद्रमा, त्रिशूल और 'ओम' से सजे बाबा — उज्जैन में उमड़े श्रद्धालु

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महाकाल का भव्य भस्म आरती शृंगार: भांग, चंद्रमा, त्रिशूल और 'ओम' से सजे बाबा — उज्जैन में उमड़े श्रद्धालु

सारांश

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल चतुर्दशी पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग से शृंगार, मस्तक पर चंद्रमा, त्रिशूल और 'ओम' से अलंकृत बाबा महाकाल के दर्शन को देर रात से कतार में खड़े हज़ारों श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

मुख्य बातें

28 जून को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पर भव्य भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया; मस्तक पर चंद्रमा , त्रिशूल और 'ओम' से अलंकृत किया गया।
पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से — तथा हरि ओम जल अर्पित किया गया।
अब भस्म कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार होती है, पहले शमशान की राख का उपयोग होता था।
आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से कतार में खड़े थे; व्यवस्था हेतु भारी पुलिस बल तैनात रहा।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 जून को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। देर रात से ही हज़ारों श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपने आराध्य के दर्शन की प्रतीक्षा करते रहे, और जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूँज उठा।

कपाट खुलने का दिव्य क्रम

रविवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया, इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। बाबा को हरि ओम का जल भी अर्पित किया गया। मंदिर परिसर घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरी तरह गुंजायमान हो उठा।

दिव्य शृंगार — भांग, चंद्रमा और त्रिशूल

भस्म आरती से पूर्व बाबा महाकाल का भांग से विशेष शृंगार किया गया। उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित किया गया, साथ ही त्रिशूल और 'ओम' के पवित्र चिह्नों से उन्हें अलंकृत किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

भस्म आरती की परंपरा और विशेषता

मंदिर सूत्रों के अनुसार, प्राचीन काल में बाबा महाकाल को शमशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा आस्था और अनुशासन का अनूठा संगम है।

देश-विदेश से आते हैं दर्शनार्थी

बाबा महाकाल की भस्म आरती की ख्याति देश की सीमाओं से परे है। जनसामान्य से लेकर著名 हस्तियाँ तक इस अलौकिक दर्शन के लिए उज्जैन पहुँचती हैं। 28 जून को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात्रि से ही मंदिर परिसर में एकत्र हो गए थे। व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर के आसपास बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।

महाआरती का समापन

मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई। आरती की समाप्ति के साथ ही श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया। यह आयोजन हर बार की भाँति इस बार भी आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्वितीय संगम बना। आने वाले सावन माह में इस तरह के आयोजनों में श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे मंदिर प्रशासन ने चुपचाप लागू किया। सावन के आगमन के साथ श्रद्धालुओं की भीड़ कई गुना बढ़ेगी — ऐसे में भीड़ प्रबंधन और डिजिटल दर्शन स्लॉट प्रणाली की पर्याप्तता पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाला विशेष अनुष्ठान है, जिसमें बाबा महाकाल का भस्म से शृंगार कर महाआरती की जाती है। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित शैव अनुष्ठानों में से एक मानी जाती है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
मंदिर सूत्रों के अनुसार, अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग होता है। पहले शमशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु यह परंपरा बदल दी गई है।
भस्म आरती में दर्शन के लिए क्या पहनना अनिवार्य है?
भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। यह नियम मंदिर की पारंपरिक मर्यादा को बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
28 जून की भस्म आरती किस अवसर पर हुई?
यह आरती ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर 28 जून को संपन्न हुई। इस विशेष तिथि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर में एकत्र हो गए थे।
बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
28 जून की भस्म आरती में बाबा महाकाल का भांग से शृंगार किया गया। उनके मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित किया गया और त्रिशूल तथा 'ओम' के चिह्नों से उन्हें अलंकृत किया गया। इससे पूर्व पंचामृत और हरि ओम जल से अभिषेक भी किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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