महाकालेश्वर उज्जैन भस्म आरती: ज्येष्ठ माह में बाबा का दिव्य श्रृंगार, देश-विदेश के श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में 2 जून 2026 को ज्येष्ठ अधिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि पर तड़के भस्म आरती के दौरान देश-विदेश से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के अलौकिक दिव्य दर्शन किए। 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के गगनभेदी जयकारों से पूरी उज्जैन नगरी गूंज उठी।
मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही लगीं कतारें
आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह असाधारण था। मंगलवार की रात से ही भक्तों की लंबी-लंबी कतारें मंदिर परिसर के बाहर लगनी शुरू हो गई थीं। परंपरागत विधि के अनुसार, वीरभद्र से आज्ञा लेकर तड़के मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद पूरा परिसर भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया।
पंचामृत अभिषेक और दिव्य श्रृंगार
भस्म आरती की विधि के अनुसार सर्वप्रथम भगवान महाकाल को जल अर्पित कर स्नान कराया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से निर्मित पंचामृत से बाबा का विशेष अभिषेक किया गया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण पूर्णतः शिवमय हो गया।
अभिषेक के उपरांत भांग, चंदन, सूखे मेवों और ताज़े पुष्पों से बाबा महाकाल का अत्यंत भव्य एवं अलौकिक श्रृंगार किया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को पवित्र भस्म अर्पित की गई। शंख, डमरू और घंटियों की दिव्य ध्वनि से पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भस्म आरती का आध्यात्मिक महत्व
महाकाल की भस्म आरती नश्वरता का गहन प्रतीक मानी जाती है। यह भक्तों को यह संदेश देती है कि सांसारिक सब कुछ अंततः राख हो जाता है और इसलिए अहंकार का त्याग ही सच्ची भक्ति है। मान्यता है कि प्राचीन काल में चिता की भस्म का उपयोग होता था, किंतु वर्तमान परंपरा के अनुसार भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडों (उपलों) तथा शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलताश और बेर जैसे पवित्र वृक्षों की लकड़ियों को जलाकर तैयार की जाती है।
महिला श्रद्धालुओं की भागीदारी
भस्म आरती में महिला भक्तों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। परंपरा के अनुसार, आरती के समय महिलाएँ घूंघट में रहकर बाबा के दर्शन करती हैं। इस रीति का पालन करते हुए बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने इस दिव्य अनुभव में भाग लिया।
आगे का दृष्टिकोण
ज्येष्ठ अधिक माह के चलते महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिर प्रशासन द्वारा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।