उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती: भक्तों का अद्भुत संगम
सारांश
Key Takeaways
- महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती एक अद्भुत धार्मिक अनुष्ठान है।
- श्रद्धालु दूर-दूर से इस आरती में भाग लेने आते हैं।
- आरती में पंचामृत का उपयोग होता है।
- भक्तों को विशेष वस्त्र पहनने की आवश्यकता होती है।
- यह अनुष्ठान आस्था और भक्ति का प्रतीक है।
उज्जैन, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन भव्यता संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। बारह ज्योतिर्लिंगों में दक्षिणमुखी महाकालेश्वर का एक अद्वितीय स्थान है और यहां होने वाली 'भस्म आरती' विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
आरती में भाग लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और मंदिर का माहौल अद्भुत होता है। बुधवार को ऐसा ही एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। इस दिन भक्त बाबा के दर पर दर्शन के लिए देर रात से लंबी कतारों में खड़े थे।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा का भव्य श्रृंगार देखने के लिए उत्सुक दिखे। पूरा मंदिर भक्तों की लंबी कतारों से भरा हुआ था। सुबह भोर में बाबा के पट खुले और फिर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया, जिसमें उन्हें पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इस अवसर पर महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन दिए गए।
इसके बाद पूरा मंदिर परिसर 'जय महाकाल' के जयकारों से गुंजायमान हो गया। भक्तों ने 'हर हर महादेव' और 'ऊं नमः शिवाय' के जयकारे लगाए।
भगवान महाकाल का सुंदर श्रृंगार किया गया। फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। इसके बाद महाकाल की कपूर आरती की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया। हर दिन बाबा का शृंगार अलग-अलग तरीके से किया जाता है। भस्म आरती देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं।
महाकाल की भस्म आरती न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आस्था का जीवंत प्रमाण भी है। आरती में शामिल होने के लिए पुरुषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।