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महाकाल की दिव्य भस्म आरती: वैशाख अष्टमी पर मंदिर में गूंजे जयकारे

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महाकाल की दिव्य भस्म आरती: वैशाख अष्टमी पर मंदिर में गूंजे जयकारे

सारांश

उज्जैन में वैशाख माह की अष्टमी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती का आयोजन हुआ। भक्तों की भीड़ के बीच 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से मंदिर गूंज उठा। जानिए इस खास दिन का महत्व और आरती की विशेषताएँ।

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख अष्टमी पर भव्य भस्म आरती का आयोजन।
भक्तों की भारी भीड़ और 'जय श्री महाकाल' के जयकारे।
आरती में उपयोग होने वाली सामग्री की विशेषताएँ।
महाकाल का विशेष श्रृंगार और भोग अर्पित किया जाना।

उज्जैन, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वैशाख माह की अष्टमी तिथि पर उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों की विशाल भीड़ नजर आई। शुक्रवार सुबह की भस्म आरती के दौरान मंदिर का दृश्य अत्यंत आकर्षक और भावुक करने वाला था।

देश-विदेश से आए श्रद्धालु बाबा के दर पर रात्रि से ही लाइन में लगकर अपने आराध्य के दर्शन के लिए अधीर थे। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज रहा था।

शुक्रवार सुबह की भस्म आरती विशेष महत्व रखती है। इसमें बाबा पर अर्पित की जाने वाली भस्म को कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार किया जाता है। आरती के समय शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म अर्पित की जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

नियमों के अनुसार सुबह की प्रक्रिया की शुरुआत बाबा के पट खोलने से होती है और ब्रह्म मुहूर्त में महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया जाता है, इसके बाद उन्हें पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण होता है। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन होता है, जिसमें बाबा को भस्म अर्पित की जाती है और आरती की जाती है। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं, जिसमें वे केवल भस्म से स्नान करते हैं।

इसके बाद महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इसमें बाबा के माथे पर मुकुट धारण कराया जाता है और चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया जाता है। साथ ही, उनके माथे पर त्रिशूल के आकार का सुशोभित किया जाता है, फिर फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया जाता है।

महाकाल के श्रृंगार के बाद कपूर की आरती की जाती है और फिर उन्हें भोग अर्पित किया जाता है। बाबा के इस रूप को साकार स्वरूप माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी उजागर करता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल की भस्म आरती का महत्व क्या है?
महाकाल की भस्म आरती का महत्व इस बात में है कि यह शिवलिंग को भस्म अर्पित करने की एक प्राचीन परंपरा को पुनः जीवित करती है, जो भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है।
भस्म आरती में क्या सामग्री उपयोग होती है?
भस्म आरती में कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।
महाकाल के श्रृंगार में क्या विशेष होता है?
महाकाल के श्रृंगार में चांदी का त्रिपुंड, मुकुट और पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे बाबा को विशेष रूप से सजाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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