चैत्र नवमी पर महाकाल के दरबार में भक्तों का सैलाब, भस्म आरती में दिखा अद्भुत दिव्य स्वरूप
सारांश
Key Takeaways
- उज्जैन में चैत्र नवमी पर महाकाल के दरबार में भक्तों की भीड़।
- भस्म आरती का आयोजन और महाकाल का अद्भुत श्रृंगार।
- भक्ति भाव में डूबे भक्तों की जयकारे।
- आरती में चढ़ाई गई भस्म का विशेष महत्व।
- महिलाएं और पुरुष विशेष परिधानों में शामिल होते हैं।
उज्जैन, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर शुक्रवार को उज्जैन में महाकाल के दरबार में सुबह से ही भक्तों की विशाल भीड़ उमड़ पड़ी। बाबा महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के समय श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के नारों से गूंज उठा।
श्रद्धालु देर रात से अपने ईष्ट के दर्शन के लिए कतार में लगे थे। शुक्रवार को भी सुबह बाबा के कपाट खोले गए और भस्म आरती के बाद विशेष श्रृंगार किया गया।
सर्वप्रथम भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा बाबा का जलाभिषेक किया गया और उसके बाद पंचामृत से स्नान करवाया गया। इस पंचामृत में शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस का मिश्रण शामिल था। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
राम नवमी की विशेषता के कारण बाबा का श्रृंगार खास था। बाबा के श्रृंगार में उनके माथे पर चांदी का सुंदर त्रिपुंड लगाया गया और उस पर राम लिखा गया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। फूलों की मालाएं, बेलपत्र, चंदन और अन्य पूजा सामग्री से बाबा को सजाया गया। इसके बाद महाकाल की कपूर आरती की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया।
भक्तों ने इस पवित्र आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य रूप का आनंद लिया। हर ओर 'हर हर महादेव' और 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज रहे थे। मंदिर का पूरा परिसर भक्ति भाव से भर गया था।
यह आरती वैराग्य और मृत्यु के सत्य का प्रतीक है। बाबा पर चढ़ने वाली भस्म कपिला गाय के कंडों की राख, पलाश, बड़, पीपल और बेर की लकड़ियों को जलाकर विशेष रूप से तैयार की जाती है। आरती के दौरान शिवलिंग पर लगभग ढाई किलो भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे बाबा महाकाल को जगाने की परंपरा पूरी की जाती है।
भस्म आरती के दौरान महिलाएं घूंघट करती हैं और पुरुषों को धोती पहननी होती है।