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चैत्र शुक्ल त्रयोदशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती का आयोजन

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चैत्र शुक्ल त्रयोदशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती का आयोजन

सारांश

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का जोश देखने लायक था। भस्म आरती के दौरान भक्तों ने अद्भुत भक्ति भाव से हिस्सा लिया, जिससे मंदिर का वातावरण दिव्य बन गया।

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती का आयोजन हर वर्ष किया जाता है।
भक्तों की लंबी कतारें और उत्साह आरती को एक खास अनुभव बनाते हैं।
पंचामृत से स्नान और शृंगार में विशेष ध्यान दिया जाता है।
भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण इस अवसर पर देखने को मिलता है।
महाकाल का दिव्य रूप भक्तों के लिए आस्था का प्रतीक है।

उज्जैन, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर बाबा महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई।

भक्तों ने महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही लंबी कतारें लगाई थीं और वे अपने आराध्य के दर्शन और आशीर्वाद के लिए अत्यंत उत्सुक नजर आ रहे थे।

भस्म आरती शुरू होते ही पूरा मंदिर परिसर भक्ति से सराबोर हो गया। भक्तों ने श्रद्धा के साथ अलौकिक भस्म लेपन और विशेष पूजन में भाग लिया। नियमानुसार, ब्रह्म मुहूर्त में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के दरवाजे खोले गए। महानिर्वाणी अखाड़े ने पहले बाबा का जलाभिषेक किया और फिर उन्हें पंचामृत से स्नान कराया गया, जिसमें शुद्ध दूध, ताजा दही, देसी घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों का रस शामिल था।

इसके बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बाबा को भस्म चढ़ाई गई और आरती उतारी गई। इस अवसर पर महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन प्रदान करते हैं।

मंगलवार को श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का दिव्य शृंगार भक्तों का ध्यान आकर्षित करने का केंद्र बना। बाबा महाकाल के विग्रह को अत्यंत मनोहारी रूप में सजाया गया, जिसमें उनकी विशाल आंखें, मूंछें और सौम्य मुस्कान अद्भुत लग रही थीं। उनके माथे पर चांदी का त्रिपुंड और पुष्प अर्पित किए गए। बेलपत्र, चंदन और ताजे फूलों की मालाओं से बाबा का शृंगार किया गया।

शृंगार में विशेष रूप से गेंदे और गुलाब के रंग-बिरंगे फूलों का उपयोग किया गया, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक थे। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के बाद विधि-विधान से बाबा की कपूर आरती की गई और अंत में उन्हें विशेष भोग अर्पित किया गया।

भक्तों ने इस पवित्र आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दिव्य रूप का आनंद लिया। हर जगह 'हर हर महादेव' और 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज रहे थे। मंदिर का पूरा परिसर भक्ति भाव से ओतप्रोत हो गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भक्तों को एकत्रित करता है। इस अवसर पर भक्ति का अद्भुत अनुभव होता है, जो समाज में एकता और श्रद्धा को प्रकट करता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती कब आयोजित की जाती है?
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आयोजित की जाती है।
भस्म आरती में भक्तों की क्या भूमिका होती है?
भक्तगण भस्म आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल होते हैं।
भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती का महत्व भक्तों की आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करने में है, जो उन्हें आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।
महाकालेश्वर मंदिर का शृंगार किस प्रकार किया जाता है?
महाकालेश्वर मंदिर का शृंगार विशेष फूलों, चांदी के त्रिपुंड और अन्य अलंकरण सामग्री से किया जाता है।
मंदिर में आरती के दौरान कौन-से मंत्र गाए जाते हैं?
आरती के दौरान 'हर हर महादेव' और 'जय श्री महाकाल' जैसे मंत्र गाए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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