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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भक्तों की उमड़ी भीड़ ने लगाई कतार

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उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती: भक्तों की उमड़ी भीड़ ने लगाई कतार

सारांश

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं की लंबी कतार ने सबका ध्यान खींचा। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही लाइन में लगना शुरू कर दिया। जानिए इस दिव्य पल के बारे में!

मुख्य बातें

महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है।
भक्तों की संख्या इस अवसर पर विशेष रूप से अधिक होती है।
आरती के दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह से शिवमय हो जाता है।
भस्म आरती के लिए विशेष पवित्र भस्म का उपयोग किया जाता है।
महाकाल का शृंगार भक्तों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।

उज्जैन, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन, उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के समय श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखने को मिली। मंदिर का पूरा परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा।

महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए भक्तजन देर रात से ही लाइन में लगना शुरू हो गए थे। अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों की संख्या बढ़ती गई। परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को जगाने के लिए सुबह 4 बजे मंदिर के द्वार खोले गए।

इसके बाद, भगवान का अलौकिक शृंगार किया गया। इसके उपरांत विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें भस्म अर्पित कर महादेव का विशेष पूजन किया गया। इस पावन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से इस अद्भुत क्षण का अनुभव किया। पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज रहा था और वातावरण पूरी तरह से शिवमय हो गया। लगभग दो घंटे तक चली इस आरती के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और प्रभु का शृंगार साथ-साथ चलता रहा।

महाकाल की यह आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा करवाई जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद महाकाल का जलाभिषेक किया जाता है। पंचामृत से उनका पूजन और पवित्र भस्म से विशेष स्नान करवाया गया।

इसके बाद बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया, जिसकी छटा अद्भुत थी। भगवान के मुखारविंद को अत्यंत मनमोहक रूप में सजाया गया; उनके मस्तक पर त्रिपुंड और 'ॐ' अंकित कर नवीन मुकुट धारण कराया गया। शृंगार में ताजे बिल्वपत्र और रंग-बिरंगे पुष्पों की मालाओं का प्रयोग कर इस अलौकिक दृश्य को और भी भव्य बनाया गया, जिसे देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

उल्लेखनीय है कि भस्म आरती के लिए प्रयुक्त पवित्र भस्म कपिला गाय के गोबर से बने कंडों के साथ-साथ शमी, पीपल, पलाश, वट, अमलतास और बेर की लकड़ियों को प्रज्वलित कर विशेष विधि से तैयार की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर होती है।
महाकालेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?
महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है।
भस्म आरती में क्या विशेष होता है?
भस्म आरती में महादेव का पूजन भस्म और पंचामृत से किया जाता है।
महाकाल का जलाभिषेक कैसे किया जाता है?
महाकाल का जलाभिषेक भस्म आरती के बाद किया जाता है।
महाकालेश्वर मंदिर का शृंगार कैसे किया जाता है?
महाकालेश्वर मंदिर का शृंगार ताजे फूलों और बिल्वपत्रों से किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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