उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती: श्रद्धालुओं ने देखा बाबा का दिव्य रूप
सारांश
Key Takeaways
- महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन
- भक्तों को बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप देखने का अवसर
- जलाभिषेक और विशेष शृंगार की प्रक्रियाएँ
- महिलाओं के लिए दर्शन के नियम
- धार्मिक महत्व और भक्तों का अनुभव
उज्जैन, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को भक्तों का विशाल जनसमुदाय एकत्रित हुआ। भोर में आयोजित पारंपरिक भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विधिपूर्वक जलाभिषेक एवं विशेष शृंगार किया गया।
वैशाख कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि पर आयोजित इस भस्म आरती में बाबा का दिव्य और मोहक स्वरूप देखकर भक्त भावुक हो गए। मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के उद्घोष से गूंज उठा।
परंपरा के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में सबसे पहले बाबा महाकालेश्वर मंदिर के द्वार खोले गए। भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है, जिसमें महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। आरती के बाद बाबा का जलाभिषेक किया गया, पंचामृत से पूजा हुई, और पवित्र भस्म से उनका विशेष स्नान भी कराया गया।
इसके पश्चात बाबा का शृंगार किया गया। इसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) को बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर त्रिपुंड और चंद्रमा सुसज्जित किया गया, नवीन मुकुट पहनाकर उन्हें फूलों की माला पहनाई गई। साथ ही ताजा बिल्वपत्र चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया।
भस्म आरती का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल के पेड़ों की लकड़ियों की राख का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान महाकाल निराकार रूप में होते हैं, इसीलिए महिलाओं को इस आरती को सीधे देखने की अनुमति नहीं होती, वे घूंघट या ओढ़नी डालकर दर्शन करती हैं।
मंदिर में इस नियम का पालन सख्ती से किया जाता है। माना जाता है कि महाकालेश्वर के दर्शन से भक्तों को शांति, सुख और आशीर्वाद मिलता है, दुख और बीमारी दूर होती है और अकाल मृत्यु का डर समाप्त हो जाता है।