दिल्ली विश्वविद्यालय: बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य, देरी पर होगी कार्रवाई
सारांश
Key Takeaways
- बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है।
- समयपालन में लचीलापन नहीं दिया जाएगा।
- देर से आने पर अतिरिक्त कार्य समय का पालन करना होगा।
- यदि 9:30 बजे के बाद उपस्थिति दर्ज की जाती है, तो छुट्टी की कटौती की जाएगी।
- सभी संबंधित अधिकारियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली विश्वविद्यालय ने सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्देश विश्वविद्यालय की पूर्व अधिसूचनाओं के अनुसार जारी किए गए हैं। अब, संस्थान ने सभी कर्मचारियों के लिए उपस्थिति और समयपालन के संबंध में एक स्पष्ट और विस्तृत प्रशासनिक आदेश जारी किया है।
इस आदेश के अंतर्गत, सभी कर्मचारियों को आधार-आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का उपयोग करके उपस्थिति दर्ज करनी होगी। कार्यालय का समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजकर 30 मिनट तक निर्धारित किया गया है, जिसमें 30 मिनट का भोजन अवकाश भी शामिल है। भोजन अवकाश को दोपहर 1 बजे से 1 बजकर 30 मिनट के बीच रखने की सलाह दी गई है, ताकि कार्य की निरंतरता बनी रहे। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य संस्थान में अनुशासन को बढ़ाना और कार्यकुशलता को सुधारना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी कर्मचारियों को निर्धारित नियमों का पालन करना आवश्यक होगा।
हाल ही में यह देखा गया कि कई विभागों और कार्यालयों द्वारा सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक उपस्थिति दर्ज करने में लचीलापन की मांग की जा रही थी। ऐसे अनुरोधों में यह उल्लेख किया गया कि कई बार कर्मचारी यातायात जाम, सार्वजनिक परिवहन में व्यवधान या अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पाते हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, विश्वविद्यालय ने यह निर्णय लिया है कि यदि कोई कर्मचारी सुबह 9 बजकर 10 मिनट के बाद लेकिन 9 बजकर 30 मिनट तक उपस्थिति दर्ज करता है, तो उसे उसी दिन शाम को अतिरिक्त समय तक कार्य करना होगा, ताकि वह अपने निर्धारित 8 घंटे 30 मिनट का कार्य समय पूरा कर सके।
अगर कोई कर्मचारी सुबह 9 बजकर 30 मिनट के बाद उपस्थिति दर्ज करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और आधे दिन या पूरे दिन की छुट्टी की कटौती की जाएगी, जो कर्मचारी के अवकाश खाते से की जाएगी। इस नियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है ताकि समयपालन सुनिश्चित किया जा सके। विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कार्यालय समय का पालन सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है, और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
अंत में, सभी संकाय अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों, पुस्तकालयाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन नियमों का पालन सुनिश्चित करें और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाएं।