जगदलपुर में डीआरआई ने 16.528 किलो पैंगोलिन शल्क की तस्करी का भंडाफोड़, तीन गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- डीआरआई ने जगदलपुर में पैंगोलिन शल्क की तस्करी का भंडाफोड़ किया।
- 16.528 किलोग्राम शल्क जब्त किए गए।
- तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
- यह कार्रवाई वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत की गई।
- डीआरआई द्वारा लगातार वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
रायपुर, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। अधिकारियों के अनुसार, मुंबई जोनल यूनिट के अंतर्गत कार्यरत डीआरआई की नागपुर यूनिट ने जगदलपुर में भारतीय पैंगोलिन के शल्क (स्केल्स) की अवैध तस्करी में शामिल एक सिंडिकेट को पकड़ने में सफलता प्राप्त की।
रविवार को किए गए इस ऑपरेशन में तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से कुल 16.528 किलोग्राम भारतीय पैंगोलिन के शल्क बरामद हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर की गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, भारतीय पैंगोलिन को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है, जिससे इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है। इस कानून के अंतर्गत पैंगोलिन और इससे संबंधित किसी भी उत्पाद का व्यापार पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसी संदर्भ में बरामद 16.528 किलोग्राम शल्क को जब्त कर लिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गिरफ्तार आरोपियों और जब्त किए गए शल्क को आगे की कार्रवाई के लिए जगदलपुर रेंज के वन विभाग के रेंज अधिकारी को सौंप दिया गया है। अब इनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैंगोलिन का शिकार मुख्य रूप से इसके मांस और शल्क के लिए किया जाता है। कुछ पारंपरिक चिकित्सा बाजारों और लग्जरी फैशन में इसके शल्क को गलत तरीके से औषधीय गुणों वाला माना जाता है। इसी कारण से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग बनी रहती है, जो संगठित तस्करी और शिकार को बढ़ावा देती है। यही वजह है कि पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला स्तनधारी जीव बन चुका है।
डीआरआई ने अपने बयान में उल्लेख किया है कि 2025 से अब तक उन्होंने कई बड़े वन्यजीव तस्करी नेटवर्क को नष्ट किया है। इनमें मध्य प्रदेश के उज्जैन में तेंदुए की खाल की तस्करी करने वाला गिरोह, सिवनी में बाघ के शावक की हत्या और उसके अंगों की तस्करी की कोशिश करने वाला नेटवर्क, भोपाल में तेंदुए की खाल की तस्करी और आंध्र प्रदेश के पिलेरु में पैंगोलिन शल्क की तस्करी करने वाला सिंडिकेट शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार की लगातार कार्रवाई डीआरआई की सतर्कता, वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और पर्यावरण अपराधों के खिलाफ उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है। राज्य वन विभागों और अन्य एजेंसियों के सहयोग से, डीआरआई देश-विदेश के तस्करी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।