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उज्जैन में 'जय श्री महाकाल' का जयघोष, बाबा का अद्वितीय शृंगार

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उज्जैन में 'जय श्री महाकाल' का जयघोष, बाबा का अद्वितीय शृंगार

सारांश

उज्जैन में सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनते हुए भगवान महाकाल का विशेष शृंगार देखा।

मुख्य बातें

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व भस्म आरती का विशेष आयोजन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान महाकाल का अद्वितीय शृंगार धार्मिक आस्था का उत्सव

उज्जैन, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी के अवसर पर एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य शृंगार किया गया। इस विशेष दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतार में खड़े थे।

सुबह-सुबह ही कई श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल हुए। उन्होंने भगवान के दर्शन किए और पवित्र पूजा विधियों का पालन किया।

इस दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा। भस्म आरती, जो सुबह 4 बजे से आरंभ होती है, में बाबा का विशेष शृंगार किया गया।

परंपरा के अनुसार, भोर में सबसे पहले बाबा महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले गए। मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में सुबह की भस्म आरती महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा की जाती है। इस आरती में महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। भस्म आरती के बाद बाबा का जलाभिषेक, पंचामृत से पूजा और पवित्र भस्म से विशेष स्नान भी कराया गया।

बाबा का अभिषेक होने के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें महाकाल को भस्म आरती चढ़ाई गई। इसके बाद बाबा का विशेष शृंगार किया गया, जिसमें महाकाल का मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड व चंद्रमा सुसज्जित किया गया और नवीन मुकुट पहनाकर बाबा को फूलों की माला पहनाई गई। ताजा बिल्वपत्र (बेलपत्र) भी चढ़ाए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे शृंगार को और भी आकर्षक बनाया गया। यह नजारा देखकर हर किसी का मन प्रसन्न हो गया।

शृंगार के बाद कपूर की आरती की गई और फिर उन्हें भोग लगाया गया। इस रूप को महाकाल का साकार स्वरूप माना जाता है। महाकाल की भस्म आरती को विश्वभर में विशेष महत्व दिया जाता है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महाकाल की महिमा को दर्शाता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती कब होती है?
महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती प्रत्येक दिन सुबह 4 बजे होती है।
भस्म आरती में किस प्रकार का शृंगार किया जाता है?
भस्म आरती में भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसमें उन्हें फूलों की माला और त्रिपुंड सजाया जाता है।
क्या भस्म आरती देखने के लिए कोई विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है?
भस्म आरती देखने के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, श्रद्धालु बिना किसी रोक-टोक के आरती में शामिल हो सकते हैं।
उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर कहां स्थित है?
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है।
भस्म आरती के दौरान कितने श्रद्धालु आते हैं?
भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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