रेडियो पर बैन के बावजूद आशा भोसले ने 'दम मारो दम' से जीता बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड
सारांश
Key Takeaways
- आशा भोसले की आवाज ने भारतीय संगीत को अमर बनाया।
- 'दम मारो दम' गाना विवादास्पद होने के बावजूद प्रसिद्ध हुआ।
- आरडी बर्मन ने इस गाने को संगीतबद्ध किया।
- गाने के बोल और विजुअल्स ने इसे अलग पहचान दी।
- फिल्मफेयर अवॉर्ड से आशा भोसले का करियर संजीवनी मिला।
मुंबई, १२ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ‘सुरों की देवी’ कहे जाने वाली आशा भोसले ने अपनी अद्वितीय आवाज से हिंदी सिनेमा को अमिट गाने प्रदान किए हैं। उनके गाए हुए गाने कभी भी पुरानी नहीं होते, बल्कि समय के साथ और भी निखरते जाते हैं। लाखों दिलों में बसी उनकी आवाज अब हमेशा हमें आशा भोसले की याद दिलाएगी। आज का दिन फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक काले अध्याय के रूप में है। सुरों की देवी... अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने अनगिनत यादें, सुरीली आवाज में गाए गाने और ढेरों किस्से छोड़ दिए हैं...
आशा भोसले ने अपने करियर में कई यादगार गाने गाए, लेकिन १९७१ में रिलीज हुआ ‘दम मारो दम’ सबसे विवादास्पद और चर्चित गाना रहा। इस गाने को रेडियो पर बैन किया गया और दूरदर्शन ने इसे हटाने का निर्णय लिया, फिर भी आशा भोसले को इस गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल) का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में देव आनंद, जीनत अमान और मुमताज ने अभिनय किया था। इस आइकॉनिक गाने को आरडी बर्मन ने संगीत दिया था और आनंद बख्शी ने बोल लिखे थे। गाने में जीनत अमान को हिप्पी स्टाइल में चिलम फूंकते हुए दिखाया गया था। गाने की कैची धुन, बोल और बोल्ड विजुअल्स ने इसे तुरंत लोकप्रिय बना दिया, लेकिन यह विवाद में भी घसीट गया।
फिल्म की रिलीज के समय, देश में हिप्पी कल्चर और ड्रग्स की लत तेजी से बढ़ रही थी। फिल्म की कहानी हिप्पी जीवनशैली और नशे की बुरी आदत पर कटाक्ष करती है। देव आनंद का किरदार अपनी बहन (जीनत अमान) को ढूंढने काठमांडू पहुंचता है, जहां उनकी बहन पूरी तरह नशे की दुनिया में खोई हुई होती है। फिल्म इस समस्या को उजागर करती है, लेकिन ‘दम मारो दम’ गाने की वजह से इसे नशे को ग्लैमराइज करने वाला बताया गया।
कई संगठनों और अभिभावकों ने इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ करार दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि ऑल इंडिया रेडियो ने गाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। जब फिल्म दूरदर्शन पर प्रसारित हुई, तो ‘दम मारो दम’ गाने को पूरी तरह काट दिया गया।
विवादों के बावजूद, आशा भोसले की अद्वितीय आवाज और गाने की लोकप्रियता ने जादू किया। आशा भोसले को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट प्लेबैक सिंगर (फीमेल) मिला। यह उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि थी। गाने की धुन आज भी इतनी पॉपुलर है कि युवा पीढ़ी इसे सुनती और गुनगुनाती है। देव आनंद ने इस गाने को फिल्म में एंटी-ड्रग मैसेज के रूप में इस्तेमाल किया था, लेकिन गाने की आकर्षक धुन और जीनत अमान के बोल्ड विजुअल्स ने इसे एक अलग पहचान दे दी। आशा भोसले ने अपनी जादुई आवाज से इस गाने को अमर बना दिया।