वडोदरा के छात्रों की अद्भुत खोज: समुद्र के बैक्टीरिया जो अंधेरे में चमकते हैं
सारांश
Key Takeaways
- समुद्र के बैक्टीरिया की अद्भुत खोज
- बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया के गुण
- अनुसंधान में छात्रों का योगदान
- भविष्य में संभावित उपयोग
- गुजरात सरकार का नवाचार को समर्थन
वडोदरा, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू) के अंतर्गत आने वाले एम.के. अमीन कॉलेज, पादरा के दो छात्रों ने विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बीएससी माइक्रोबायोलॉजी के छात्र अर्णव ढमढेरे और हरिओम पाठक ने समुद्र के पानी से एक ऐसा बैक्टीरिया खोज निकाला है, जो अंधेरे में रोशनी उत्पन्न करता है।
इन बैक्टीरिया को बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया कहा जाता है और उनकी यह खोज विज्ञान के क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है। अर्णव और हरिओम ने अपनी अनुसंधान से न केवल अपने कॉलेज, बल्कि पूरे वडोदरा को गर्वित किया है, साथ ही यह युवा छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
अमीन कॉलेज के छात्र अर्णव ढमढेरे ने कहा कि हर्बल साइंस के ओपन हाउस में स्कूल के छात्रों को बुलाया जाता है। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया को आइसोलेट करना हमारा मुख्य उद्देश्य था। पढ़ाई के दौरान हमें यह जानकारी मिली कि बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया के कारण रात के समय समुद्र चमकता है। इस बैक्टीरिया की खोज करने का यही कारण था। अर्णव ने बताया कि हरिओम समुद्र का पानी लाए और हमें बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया मिले हैं, जो काफी उपयोगी हैं।
हरिओम पाठक ने बताया कि वे पिछले एक वर्ष से इस पर काम कर रहे हैं। बैक्टीरिया की पहचान के लिए उन्हें एक वर्ष का समय लगा। यह बैक्टीरिया खारे पानी में जीवित रहता है और पहचान करने में उन्हें छह महीने लगे। छोटी-छोटी समस्याओं के कारण उनकी पहचान में अधिक समय लगा।
प्रोफेसर ने कहा कि हमने छात्रों को पूर्ण समर्थन दिया है। अनुसंधान के लिए उन्हें जो भी आवश्यक सामग्री चाहिए थी, वह हमने उपलब्ध करवाई। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया से लिक्विड बनाने में सहायता मिलेगी, और हम इसे परीक्षण या निदान के लिए भी उपयोग करने की योजना बना रहे हैं।
यह अनुसंधान प्रोफेसर देवर्षि गज्जर और डॉ. प्रिया मिश्रा के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें छात्रों ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी क्षेत्र से समुद्री जल के नमूने एकत्र किए और उसमें इस विशेष बैक्टीरिया का आइसोलेशन कर अध्ययन किया। करीब 11 महीनों की मेहनत, प्रयोगशाला में सटीक प्रयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इस अनुसंधान ने महत्वपूर्ण सफलता दिलाई।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, गुजरात सरकार लगातार अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दे रही है, जिससे अर्णव और हरिओम जैसे युवा वैज्ञानिकों को सफलता के नए आयाम स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। बायोल्युमिनिसेंट बैक्टीरिया का उपयोग भविष्य में प्रदूषण की निगरानी, मेडिकल रिसर्च और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में किया जा सकता है। फिलहाल, इनका पैथोलॉजिकल एनालिसिस जारी है, जिसके बाद इनके व्यापक उपयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।