क्यूबा में ईंधन संकट: अमेरिका के प्रतिबंधों के बाद स्पेन, ब्राजील और मैक्सिको की चिंता
सारांश
मुख्य बातें
मैड्रिड, 19 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जनवरी के अंत में वॉशिंगटन द्वारा तेल की आपूर्ति में बाधा डालने के बाद, क्यूबा की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में समस्या उत्पन्न हो गई है। ईंधन की कमी के कारण वहां की मानवता की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। इस मुद्दे पर ब्राजील, मैक्सिको और स्पेन के अधिकारियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है और स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। स्पेन के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई है।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों देशों ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कदम से बचें जिससे लोग और अधिक कठिनाइयों का सामना करें या जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करे। इसके अलावा, उन्होंने क्यूबा के नागरिकों की समस्याओं को हल करने के लिए समन्वित मानवitarian सहायता बढ़ाने का भी संकल्प लिया।
अपने बयान में ब्राजील, स्पेन और मैक्सिको ने अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की आवश्यकता को दोहराया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में उल्लिखित क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों का पालन करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने मानवाधिकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। उनका कहना था कि इस तरह की बातचीत का मुख्य उद्देश्य मौजूदा समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना होना चाहिए, ताकि क्यूबा के लोग स्वतंत्रता के साथ अपने भविष्य का निर्धारण कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा, "हालांकि सीमित मात्रा में ईंधन की आपूर्ति की खबरें आई हैं, फिर भी रूस से भेजी गई एक हालिया खेप को पिछले हफ्ते अमेरिका की नाकेबंदी के बावजूद बंदरगाह पर उतारने की अनुमति दी गई थी। देश में मानवता की जरूरतें अब भी बनी हुई हैं। मार्च के अंत से ऊर्जा संकट की स्थिति और भी कठिन हो गई है।"
गौरतलब है कि क्यूबा की ऊर्जा आवश्यकताएँ पहले वेनेज़ुएला के माध्यम से पूरी की जाती थीं, जब तक कि जनवरी में अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता सौंप नहीं दी।