अमेरिका ने क्यूबा की सरकारी तेल कंपनी CUPET पर लगाया बैन, रुबियो ने एक्स पर की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने गुरुवार, 11 जून को क्यूबा की सरकारी ऊर्जा कंपनी यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो (CUPET) पर आधिकारिक प्रतिबंध की घोषणा की। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14404 के तहत उठाया गया है, जो क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
प्रतिबंध में क्या शामिल है
इस प्रतिबंध के लागू होते ही CUPET के स्वामित्व वाली सभी अमेरिकी संपत्तियाँ तत्काल प्रभाव से फ्रीज़ हो जाएंगी। इसके साथ ही अमेरिकी नागरिकों और संस्थाओं को इस कंपनी के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार करने पर रोक लगा दी गई है। यह उपाय क्यूबा के ऊर्जा क्षेत्र को सीधे निशाना बनाता है, जिसे क्यूबाई अधिकारियों की आय का एक प्रमुख स्रोत माना जाता है।
रुबियो के आरोप: ऊर्जा का दुरुपयोग
रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैं राष्ट्रपति ट्रंप के ईओ 14404 के तहत क्यूबा की सरकारी एनर्जी कंपनी, यूनियन क्यूबा-पेट्रोलियो (CUPET) पर रोक लगा रहा हूँ। क्यूबा के कम्युनिस्ट शासक वर्ग ने ऊर्जा को सामाजिक नियंत्रण और भ्रष्ट तरीके से लाभ कमाने के एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से क्यूबा सरकार ने उपलब्ध ईंधन की चोरी कर उसे जमा किया — जिसका उपयोग कथित तौर पर कास्त्रो के निजी जेट के लिए, सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों को दबाने के लिए, खाली पर्यटक होटलों को रोशन रखने के लिए और राजनीतिक प्रदर्शनों के लिए लोगों को बसों में भरवाने के लिए किया गया। यह सब तब हुआ जब आम क्यूबाई नागरिक बिजली कटौती झेलते रहे और ईंधन के लिए हफ्तों कतार में खड़े रहे।
ट्रंप प्रशासन का व्यापक लक्ष्य
रुबियो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्यूबा के लोगों के लिए 'अधिक आर्थिक और राजनीतिक स्वतंत्रता' का भविष्य चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'तब तक, हम कम्युनिस्ट सरकार के ऊर्जा व्यापार का फायदा उठाकर अपने भ्रष्ट एजेंडे को आगे बढ़ाने और क्यूबा के लोगों पर हिंसक तरीके से दबाव डालने की काबिलियत को टारगेट करते रहेंगे।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है — इससे पहले भी क्यूबा के राष्ट्रपति सहित कई अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
क्यूबा पर असर और आगे की राह
CUPET क्यूबा के ईंधन आयात, वितरण और पेट्रोकेमिकल उत्पादन की केंद्रीय संस्था है। इस पर प्रतिबंध लगने से द्वीप राष्ट्र की पहले से संकटग्रस्त ऊर्जा आपूर्ति पर और दबाव पड़ने की आशंका है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब क्यूबा पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट और बिजली संकट का सामना कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की यह नीति क्यूबा सरकार को वार्ता की मेज़ पर लाने के लिए आर्थिक दबाव की रणनीति का विस्तार है।