क्यूबा में बिजली संकट पर अमेरिका का सख्त रुख, ट्रंप ने की कार्रवाई की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- क्यूबा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकी है।
- अमेरिकी प्रशासन क्यूबा की स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है।
- बड़े राजनीतिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
- क्यूबा की सरकार के उपाय संकट को दूर करने में अपर्याप्त हैं।
- अमेरिका का मानना है कि यह संकट तकनीकी से ज्यादा गंभीर है।
वॉशिंगटन, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्यूबा में हाल ही में हुए देशव्यापी बिजली संकट के बाद वहां की सरकार पर कड़ी आलोचना की है। दोनों नेताओं ने क्यूबा की आर्थिक व्यवस्था को “पूर्णतः विफल” बताते हुए महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तनों की आवश्यकता पर जोर दिया।
ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका क्यूबा की स्थिति पर ध्यान दे रहा है और जल्द ही इस पर कोई कदम उठाने की योजना बना सकता है। उन्होंने कहा, “क्यूबा इस समय बेहद गंभीर स्थितियों का सामना कर रहा है। हम जल्द ही कुछ कार्रवाई करने वाले हैं।”
वहीं, रूबियो ने क्यूबा की वर्तमान स्थिति को गहरे संरचनात्मक संकट का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि क्यूबा की अर्थव्यवस्था कार्यशील नहीं है और वहां की राजनीतिक व्यवस्था इसे सुधारने में असमर्थ है। उनके अनुसार, “उन्हें बड़े बदलाव की आवश्यकता है।”
रूबियो ने यह भी कहा कि क्यूबा की सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए उपाय इस संकट को दूर करने के लिए अपर्याप्त हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूबा की अर्थव्यवस्था दशकों तक बाहरी सहायता, विशेषकर सोवियत संघ और फिर वेनेजुएला पर निर्भर रही है, लेकिन अब यह समर्थन लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
उन्होंने क्यूबा के नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान शासक इस संकट का समाधान नहीं जानते, इसलिए नए नेतृत्व की आवश्यकता है।
अमेरिकी नीति पर चर्चा करते हुए, रूबियो ने स्पष्ट किया कि क्यूबा पर लगाए गए व्यापार प्रतिबंध (एम्बार्गो) तब तक नहीं हटाए जाएंगे जब तक वहां राजनीतिक परिवर्तन नहीं होते।
वास्तव में, क्यूबा में हाल ही में बिजली ग्रिड के ठप होने से देश के बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया, जिससे वहां की ऊर्जा और आर्थिक संकट की गंभीरता स्पष्ट हो गई है।
अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस स्थिति को क्यूबा की शासन व्यवस्था की विफलता से जोड़ा। अधिकारी ने कहा कि बार-बार होने वाले ब्लैकआउट इस बात का संकेत है कि सरकार अपने नागरिकों को बुनियादी सेवाएं प्रदान करने में असमर्थ है।
अमेरिका का मानना है कि यह संकट केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि क्यूबा के व्यापक आर्थिक और राजनीतिक संकट का हिस्सा है।