दक्षिण कोरिया: प्रथम कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हान की-सुंग हटाए गए, बिना गोला-बारूद गार्ड ड्यूटी और ड्रोन मिसकम्युनिकेशन विवाद
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार, 3 अगस्त को पश्चिमी मोर्चे की कमान संभालने वाले सेना की प्रथम कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हान की-सुंग को उनके पद से हटा दिया। यह कार्रवाई दो गंभीर विवादों की जांच के बीच की गई है — पहला, अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों को बिना लोडेड गोला-बारूद के गार्ड ड्यूटी कराने का आदेश, और दूसरा, अमेरिकी सैन्य टोही ड्रोन को लेकर दोनों देशों की सेनाओं के बीच संचार विफलता।
मुख्य घटनाक्रम
रक्षा मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रथम कोर में सैनिकों को गार्ड ड्यूटी के दौरान के6 भारी मशीनगन और के4 ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर बिना गोला-बारूद लोड किए रखने के निर्देश दिए गए थे। जिंदा कारतूस हथियारों के बगल में रखे जाते थे, लेकिन चैंबर में लोड नहीं होते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह निर्देश लेफ्टिनेंट जनरल हान की-सुंग ने अपने स्तर पर जारी किए थे, जो दक्षिण कोरियाई सेना के मानक नियमों का उल्लंघन है — नियमों के अनुसार अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के हथियार सामान्यतः लोडेड अवस्था में रहने चाहिए।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक हान की-सुंग को सोमवार से ही पद से अलग कर दिया गया है। फिलहाल सेना के ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड के कमांडर को कार्यवाहक कमांडर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अमेरिकी ड्रोन मिसकम्युनिकेशन विवाद
इसी प्रथम कोर पर पिछले सप्ताह एक अलग विवाद में भी सवाल उठे थे। उत्तरी ग्योंगगी प्रांत में अंतर-कोरियाई सीमा के निकट एक जनरल आउटपोस्ट के दक्षिण में एक मानवरहित विमान दिखाई देने पर दक्षिण कोरियाई सेना ने वायु रक्षा अलर्ट सक्रिय कर दिया था। बाद में पुष्टि हुई कि वह ड्रोन अमेरिकी सेना का था और उसे मार गिराने की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यूनाइटेड स्टेट्स फोर्सेस कोरिया (USFK) का कहना है कि उसने ड्रोन की निर्धारित उड़ान की पूर्व सूचना दक्षिण कोरियाई सेना को दे दी थी। हालांकि, यह सूचना कथित तौर पर उच्च सैन्य मुख्यालय तक समय पर नहीं पहुंच सकी, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। आलोचकों का कहना है कि यह दोनों सहयोगी सेनाओं के बीच संचार तंत्र की गंभीर खामी को उजागर करता है।
सेना का व्यापक निरीक्षण
इस खुलासे के बाद सेना के ग्राउंड ऑपरेशंस कमांड ने अपने अधीन सभी पांच कोर मुख्यालयों का व्यापक निरीक्षण शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अन्य इकाइयों में भी इसी तरह की व्यवस्था तो लागू नहीं की गई थी, और हथियारों के प्रबंधन तथा सुरक्षा मानकों की समीक्षा करना है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया के साथ तनाव की पृष्ठभूमि में दक्षिण कोरियाई सेना की युद्धक तैयारी पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित है।
आम जनता और विशेषज्ञों पर असर
गौरतलब है कि अग्रिम मोर्चे पर बिना लोडेड हथियारों के गार्ड ड्यूटी का यह मामला दक्षिण कोरियाई नागरिकों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच गहरी चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना न केवल कमांड-स्तरीय जवाबदेही पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) की निगरानी में कहीं न कहीं चूक हुई।
क्या होगा आगे
रक्षा मंत्रालय की जांच जारी है और लेफ्टिनेंट जनरल हान की-सुंग के खिलाफ आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी। पांचों कोर मुख्यालयों के निरीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद सेना के हथियार प्रबंधन और संचार प्रोटोकॉल में बदलाव की संभावना है।