6 अगस्त 2026
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उत्तर कोरिया नीति पर दक्षिण कोरिया एकजुट: राष्ट्रपति ली की सलाह के बाद एकीकरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया रुख

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उत्तर कोरिया नीति पर दक्षिण कोरिया एकजुट: राष्ट्रपति ली की सलाह के बाद एकीकरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया रुख

सारांश

राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की संयम की सलाह के बाद दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने साफ किया कि उत्तर कोरिया से संवाद की नीति जारी रहेगी — लेकिन सरकार के भीतर विदेश मंत्री और एकीकरण मंत्री के बीच उभरते मतभेद इस नीति की असली परीक्षा हैं।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने 7 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया के साथ संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति जारी रहेगी।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने एक दिन पहले मंत्रालय की नई पहलों पर संयम बरतने की सलाह दी थी।
मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि आधिकारिक दस्तावेजों में उत्तर कोरिया के लिए 'मुख्य दुश्मन' की जगह DPRK नाम का उपयोग किया जाए।
विदेश मंत्री चो ह्यून ने चार-पक्षीय वार्ता के प्रस्ताव को 'आदर्शवादी' बताया; कहा यह अभी सरकारी नीति का हिस्सा नहीं।
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने कहा कि राष्ट्रपति ने मंत्रालय की नीति खारिज नहीं की, बल्कि सावधानी बरतने को कहा।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने 7 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि सरकार उत्तर कोरिया के साथ संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति पर दृढ़ता से कायम है। यह सफाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग द्वारा मंत्रालय की कुछ नई पहलों पर संयम बरतने की सलाह दिए जाने के एक दिन बाद आई। मंत्रालय का कहना है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति के लिए, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, छोटे-से-छोटे अवसर की तलाश जारी रहेगी।

मंत्रालय ने क्या कहा

एकीकरण मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'यदि दोनों पक्ष पहल ही नहीं करेंगे, तो संबंधों में किसी तरह की प्रगति संभव नहीं होगी, इसलिए चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद संवाद के रास्ते खुले रखना जरूरी है।' मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह राष्ट्रपति के संदेश को ध्यान में रखते हुए उत्तर कोरिया के साथ विश्वास बहाली और रिश्तों में सुधार के प्रयास जारी रखेगा।

एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने मंत्रालय की नीति को खारिज नहीं किया है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति का मानना है कि उत्तर कोरिया की ओर से तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की संभावना भले कम हो, फिर भी शांति स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

विवाद की जड़: 'मुख्य दुश्मन' शब्द पर उठा सवाल

एक दिन पहले हुई सरकारी नीति समीक्षा बैठक में राष्ट्रपति ली ने मंत्रालय की कुछ नई पहलों पर संयम बरतने की सलाह दी थी। मंत्रालय ने सुझाव दिया था कि सरकारी दस्तावेजों और आधिकारिक बयानों में उत्तर कोरिया के लिए 'मुख्य दुश्मन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल बंद कर उसके आधिकारिक नाम डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (DPRK) का उपयोग किया जाए। इस पर राष्ट्रपति ने कहा था कि सद्भावना से उठाए गए कदमों का राजनीतिक रूप से गलत इस्तेमाल भी हो सकता है, इसलिए हर निर्णय सोच-समझकर लिया जाना चाहिए।

सरकार के भीतर अलग-अलग राय

विदेश मंत्री चो ह्यून ने मंत्रालय की कुछ योजनाओं को 'कुछ ज्यादा आदर्शवादी' बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन के बीच चार-पक्षीय वार्ता का प्रस्ताव अभी सरकार की साझा नीति का हिस्सा नहीं है और मौजूदा हालात में इसे लागू करना आसान नहीं होगा। यह टिप्पणी सरकार के भीतर नीतिगत मतभेदों की ओर संकेत करती है।

इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुंग डोंग-यंग ने कहा कि कई बार यथार्थ को बदलने के लिए आदर्शवादी सोच भी जरूरी होती है। एकीकरण मंत्रालय ने दोहराया कि उसकी नीति किसी कल्पना पर नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में शांति और संवाद की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के व्यावहारिक प्रयासों पर आधारित है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव के बीच दक्षिण कोरिया की नई सरकार अपनी उत्तर कोरिया नीति की दिशा तय करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की सरकार ने पदभार संभालते ही संवाद-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के संकेत दिए थे, लेकिन सरकार के भीतर ही इस दृष्टिकोण की गति और सीमा को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि एकीकरण मंत्रालय और विदेश मंत्रालय किस साझा रणनीति पर एकमत होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राष्ट्रपति की सार्वजनिक सतर्कता यह संकेत देती है कि घरेलू विपक्ष इसे कमज़ोरी के रूप में भुना सकता है। विदेश मंत्री और एकीकरण मंत्री के बीच खुले मतभेद यह भी बताते हैं कि सरकार अभी तक एक सुसंगत उत्तर कोरिया रणनीति पर एकमत नहीं हो पाई है — और यह असमंजस उत्तर कोरिया को वार्ता की मेज पर आने से हतोत्साहित कर सकता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने क्या सफाई दी?
एकीकरण मंत्रालय ने 7 अगस्त 2025 को स्पष्ट किया कि सरकार उत्तर कोरिया के साथ संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की नीति से पीछे नहीं हट रही है। मंत्रालय ने कहा कि चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद संवाद के रास्ते खुले रखना जरूरी है।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने किस बात पर संयम बरतने को कहा था?
राष्ट्रपति ली ने एकीकरण मंत्रालय के उस सुझाव पर सावधानी बरतने को कहा था जिसमें आधिकारिक दस्तावेजों में उत्तर कोरिया के लिए 'मुख्य दुश्मन' की जगह DPRK नाम का उपयोग करने की बात थी। उन्होंने कहा कि सद्भावना के कदमों का राजनीतिक रूप से गलत इस्तेमाल हो सकता है।
क्या दक्षिण कोरिया सरकार उत्तर कोरिया के साथ चार-पक्षीय वार्ता के पक्ष में है?
विदेश मंत्री चो ह्यून ने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन के बीच चार-पक्षीय वार्ता का प्रस्ताव अभी सरकार की साझा नीति का हिस्सा नहीं है। उन्होंने इस विचार को 'कुछ ज्यादा आदर्शवादी' बताया।
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग का क्या कहना है?
एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने कहा कि राष्ट्रपति ने मंत्रालय की नीति को खारिज नहीं किया है, बल्कि सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी कहा कि यथार्थ को बदलने के लिए कभी-कभी आदर्शवादी सोच भी जरूरी होती है।
कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति के लिए दक्षिण कोरिया की मौजूदा नीति क्या है?
दक्षिण कोरिया की मौजूदा नीति उत्तर कोरिया के साथ विश्वास बहाली, संवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर केंद्रित है। एकीकरण मंत्रालय का कहना है कि यह नीति व्यावहारिक प्रयासों पर आधारित है और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति के हर छोटे अवसर को भुनाने की कोशिश जारी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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