27 जुलाई 2026
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कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु निरस्त्रीकरण: दक्षिण कोरिया ने 'पहले शांति' नीति अपनाई, किम यो-जोंग ने ARF बयान खारिज किया

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कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु निरस्त्रीकरण: दक्षिण कोरिया ने 'पहले शांति' नीति अपनाई, किम यो-जोंग ने ARF बयान खारिज किया

सारांश

दक्षिण कोरिया ने 'पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण पहले' की नीति से व्यावहारिक दूरी बनाते हुए 'पहले शांति' का रास्ता चुना है — ठीक उसी दिन जब किम यो-जोंग ने ARF के संयुक्त बयान को खारिज कर कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता बिना रुकावट मजबूत होती रहेगी।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लक्ष्य की पुष्टि की, लेकिन प्राथमिकता 'यथार्थवादी और व्यावहारिक' समाधानों को बताया।
किम यो-जोंग ने मनीला ARF बैठक के संयुक्त बयान को खारिज करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता 'बिना रुकावट मजबूत होती रहेगी।' एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने माना कि ली जे-म्यंग सरकार ने CVID नीति से दूरी बनाकर ' पहले शांति ' की नीति अपनाई है।
विदेश मंत्री चो ह्यून ने जून में जेजू फोरम में चरणबद्ध परमाणु निरस्त्रीकरण रणनीति और अमेरिका के साथ गठबंधन मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दक्षिण कोरिया जी-7 , ग्लोबल साउथ और समान विचार वाले देशों के साथ सहयोग विस्तार की योजना बना रहा है।

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय (यूनिफिकेशन मिनिस्ट्री) ने 27 जुलाई 2026 को दोहराया कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करना उसका दीर्घकालिक लक्ष्य बना हुआ है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि अभी की प्राथमिकता उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को और आगे बढ़ने से रोकने के लिए 'यथार्थवादी और व्यावहारिक' रास्ते तलाशना है। यह बयान उस दिन आया जब किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) के संयुक्त बयान को सिरे से खारिज कर दिया।

मंत्रालय का आधिकारिक रुख

मंत्रालय के प्रवक्ता यून मिन-हो ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से मुक्त कोरियाई प्रायद्वीप के लक्ष्य को हासिल करने की हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सरकार व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान तलाशने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

किम यो-जोंग की कड़ी प्रतिक्रिया

यून की यह टिप्पणी किम यो-जोंग के उस बयान के जवाब में आई, जिसे कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने सोमवार को जारी किया। किम यो-जोंग ने मनीला में आयोजित ARF विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी उस संयुक्त बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर कोरिया के 'पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण' के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता बिना किसी रुकावट के लगातार मजबूत होती रहेगी।'

'पहले शांति' की नई नीति और नीतिगत बदलाव

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने स्वीकार किया था कि ली जे-म्यंग सरकार ने पिछली सरकार की 'पहले परमाणु निरस्त्रीकरण' अथवा 'पूर्ण, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID)' की नीति से व्यावहारिक रूप से दूरी बना ली है। उनके अनुसार, सरकार अब 'पहले शांति' के सिद्धांत को अपनाते हुए प्योंगयांग के साथ रुकी हुई वार्ता को फिर से पटरी पर लाना चाहती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया ने किसी भी बातचीत में भाग लेने से इनकार किया हुआ है।

विदेश मंत्री की चरणबद्ध रणनीति

इससे पहले जून में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने जेजू द्वीप पर आयोजित '21वें जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी' में कहा था कि उनकी सरकार परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए चरणबद्ध और व्यावहारिक रणनीति अपनाएगी। चो ने अमेरिका के साथ गठबंधन को मजबूत बनाए रखने, जी-7 और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग विस्तार, तथा जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में दक्षिण कोरिया की भूमिका की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।

आगे की राह

विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण कोरिया की नई 'पहले शांति' नीति और उत्तर कोरिया की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षाओं के बीच की यह खाई कूटनीतिक रूप से कठिन रास्ता बनाती है। कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव कम करने की दिशा में अगला ठोस कदम क्या होगा, यह अभी अनिश्चित बना हुआ है — विशेषकर तब जब प्योंगयांग ने ARF के बयान को ही अस्वीकार कर दिया हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर सियोल वार्ता की मेज़ पर वापसी के लिए शर्तें नरम कर रहा है — यह असंतुलन उत्तर कोरिया को बिना किसी रियायत के लाभ की स्थिति में रखता है। किम यो-जोंग का स्पष्ट बयान कि परमाणु क्षमता 'बिना रुकावट मजबूत होती रहेगी', यह संकेत देता है कि प्योंगयांग को 'पहले शांति' नीति में कोई दबाव नहीं दिखता। बिना किसी सत्यापन योग्य ढाँचे के शांति-पहले का रास्ता, परमाणु कार्यक्रम को वैधता की ओर ले जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया की 'पहले शांति' नीति क्या है?
यह नीति पिछली सरकार की 'पहले परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID)' की अनिवार्यता को हटाकर पहले उत्तर कोरिया के साथ शांति बहाल करने और फिर परमाणु वार्ता आगे बढ़ाने का रास्ता अपनाती है। एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने इसे ली जे-म्यंग सरकार की व्यावहारिक दिशा के रूप में स्वीकार किया है।
किम यो-जोंग ने ARF बयान को क्यों खारिज किया?
किम यो-जोंग ने मनीला में आयोजित ARF विदेश मंत्रियों की बैठक के उस संयुक्त बयान को अस्वीकार किया जिसमें उत्तर कोरिया के 'पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण' की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता बिना किसी रुकावट के मजबूत होती रहेगी।
CVID नीति क्या थी और इसे क्यों छोड़ा गया?
CVID यानी 'पूर्ण, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण' पिछली दक्षिण कोरियाई सरकारों की मुख्य माँग थी। ली जे-म्यंग सरकार ने इसे व्यावहारिक रूप से अव्यवहार्य मानते हुए पहले शांति बहाली को प्राथमिकता देने का फैसला किया, ताकि उत्तर कोरिया के साथ रुकी हुई वार्ता फिर शुरू हो सके।
दक्षिण कोरिया की परमाणु निरस्त्रीकरण रणनीति में अमेरिका की क्या भूमिका है?
विदेश मंत्री चो ह्यून ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण कोरिया अमेरिका के साथ अपने गठबंधन के आधार पर रक्षा क्षमता मजबूत करता रहेगा। साथ ही जी-7 और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए काम करेगा।
कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु तनाव कम होने की संभावना कितनी है?
फिलहाल संभावनाएँ सीमित दिखती हैं, क्योंकि उत्तर कोरिया ने ARF बयान को खारिज कर दिया है और किम यो-जोंग ने परमाणु क्षमता बढ़ाने की घोषणा की है। दक्षिण कोरिया की 'पहले शांति' नीति के बावजूद प्योंगयांग की ओर से वार्ता में वापसी के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
राष्ट्र प्रेस
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