कोरियाई प्रायद्वीप परमाणु निरस्त्रीकरण: दक्षिण कोरिया ने 'पहले शांति' नीति अपनाई, किम यो-जोंग ने ARF बयान खारिज किया
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय (यूनिफिकेशन मिनिस्ट्री) ने 27 जुलाई 2026 को दोहराया कि कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु हथियारों से मुक्त करना उसका दीर्घकालिक लक्ष्य बना हुआ है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि अभी की प्राथमिकता उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को और आगे बढ़ने से रोकने के लिए 'यथार्थवादी और व्यावहारिक' रास्ते तलाशना है। यह बयान उस दिन आया जब किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) के संयुक्त बयान को सिरे से खारिज कर दिया।
मंत्रालय का आधिकारिक रुख
मंत्रालय के प्रवक्ता यून मिन-हो ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर परमाणु हथियारों से मुक्त कोरियाई प्रायद्वीप के लक्ष्य को हासिल करने की हमारी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सरकार व्यावहारिक एवं प्रभावी समाधान तलाशने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
किम यो-जोंग की कड़ी प्रतिक्रिया
यून की यह टिप्पणी किम यो-जोंग के उस बयान के जवाब में आई, जिसे कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने सोमवार को जारी किया। किम यो-जोंग ने मनीला में आयोजित ARF विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी उस संयुक्त बयान को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर कोरिया के 'पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण' के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता बिना किसी रुकावट के लगातार मजबूत होती रहेगी।'
'पहले शांति' की नई नीति और नीतिगत बदलाव
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री चुंग डोंग-यंग ने स्वीकार किया था कि ली जे-म्यंग सरकार ने पिछली सरकार की 'पहले परमाणु निरस्त्रीकरण' अथवा 'पूर्ण, सत्यापन योग्य और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (CVID)' की नीति से व्यावहारिक रूप से दूरी बना ली है। उनके अनुसार, सरकार अब 'पहले शांति' के सिद्धांत को अपनाते हुए प्योंगयांग के साथ रुकी हुई वार्ता को फिर से पटरी पर लाना चाहती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया ने किसी भी बातचीत में भाग लेने से इनकार किया हुआ है।
विदेश मंत्री की चरणबद्ध रणनीति
इससे पहले जून में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने जेजू द्वीप पर आयोजित '21वें जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी' में कहा था कि उनकी सरकार परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए चरणबद्ध और व्यावहारिक रणनीति अपनाएगी। चो ने अमेरिका के साथ गठबंधन को मजबूत बनाए रखने, जी-7 और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग विस्तार, तथा जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में दक्षिण कोरिया की भूमिका की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण कोरिया की नई 'पहले शांति' नीति और उत्तर कोरिया की बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षाओं के बीच की यह खाई कूटनीतिक रूप से कठिन रास्ता बनाती है। कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव कम करने की दिशा में अगला ठोस कदम क्या होगा, यह अभी अनिश्चित बना हुआ है — विशेषकर तब जब प्योंगयांग ने ARF के बयान को ही अस्वीकार कर दिया हो।