8 अगस्त 2026
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किम यो-जोंग का जी-7 को कड़ा जवाब: परमाणु निरस्त्रीकरण 'हमेशा के लिए बंद', हथियार छोड़ना नामुमकिन

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किम यो-जोंग का जी-7 को कड़ा जवाब: परमाणु निरस्त्रीकरण 'हमेशा के लिए बंद', हथियार छोड़ना नामुमकिन

सारांश

जी-7 शिखर सम्मेलन में परमाणु निरस्त्रीकरण की माँग दोहराई गई — और प्योंगयांग ने तत्काल जवाब दिया। किम यो-जोंग ने न केवल मांग खारिज की, बल्कि चेतावनी भी दी कि परमाणु हितों को चुनौती देने वाला खुद मुसीबत मोल लेगा। यह कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक गतिरोध के और गहराने का संकेत है।

मुख्य बातें

किम यो-जोंग ने 18 जून 2026 को जी-7 की परमाणु निरस्त्रीकरण मांग को 'पुरानी सोच' बताकर पूरी तरह खारिज किया।
उन्होंने कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा 'हमेशा के लिए समाप्त' हो चुका है और इसे कभी लागू नहीं किया जा सकता।
जी-7 नेताओं ने फ्रांस के एवियन में आयोजित शिखर सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई।
किम यो-जोंग ने चेतावनी दी कि परमाणु शक्ति संपन्न देश के मुख्य हितों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करने वाला 'बड़ी मुसीबत' को न्योता देगा।
जी-7 ने उत्तर कोरिया से 1970-80 के दशक के अपहरण पीड़ितों का मुद्दा हल करने और क्रिप्टोकरेंसी चोरी व साइबर अपराध रोकने की भी माँग की।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन की बहन और वरिष्ठ अधिकारी किम यो-जोंग ने गुरुवार, 18 जून 2026 को जी-7 देशों की परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह मुद्दा 'हमेशा के लिए समाप्त' हो चुका है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनएस के माध्यम से जारी बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियार देश के 'मुख्य हितों' का अभिन्न हिस्सा हैं और इन्हें किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ा जाएगा।

जी-7 शिखर सम्मेलन और उत्तर कोरिया पर बयान

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और इटली के नेताओं ने सोमवार से बुधवार तक फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन के समापन पर जारी संयुक्त बयान में नेताओं ने कहा, 'हमें उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर गहरी चिंता है।' बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप उत्तर कोरिया के 'पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण' के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके साथ ही जी-7 ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, मध्य पूर्व और यूक्रेन से जुड़े भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया।

किम यो-जोंग की तीखी प्रतिक्रिया

किम यो-जोंग ने जी-7 की मांग को 'पुरानी सोच' करार देते हुए कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग करना व्यर्थ है। उन्होंने कहा, 'परमाणु हथियार हमारी संप्रभुता की रक्षा का शक्तिशाली साधन हैं और शांति सुनिश्चित करने की आधारशिला हैं। यह डीपीआरके के कानून में भी तय है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर कोरिया का परमाणु हथियार कार्यक्रम केवल आत्मरक्षा के उद्देश्य से है।

किम यो-जोंग ने चेतावनी के स्वर में कहा कि जो कोई भी एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के मुख्य हितों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेगा, वह खुद अपने लिए बड़ी मुसीबत को न्योता देगा। यह टिप्पणी अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा रही है।

अपहरण और साइबर अपराध पर जी-7 की चिंता

जी-7 नेताओं ने उत्तर कोरिया से 1970 और 1980 के दशक में कथित तौर पर अपहृत लोगों के मुद्दे का तत्काल समाधान करने की भी माँग की। इसके अतिरिक्त, नेताओं ने उत्तर कोरिया की ओर से कथित रूप से की जा रही क्रिप्टोकरेंसी चोरी और साइबर अपराधों से संयुक्त रूप से निपटने की आवश्यकता पर बल दिया। ये दोनों मुद्दे पश्चिमी देशों और प्योंगयांग के बीच कूटनीतिक तनाव की लंबी सूची में नए आयाम जोड़ते हैं।

व्यापक संदर्भ और भू-राजनीतिक महत्त्व

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम दशकों से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्रबिंदु रहा है। 2018-19 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हुई शिखर वार्ताओं के बावजूद निरस्त्रीकरण पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी थी। किम यो-जोंग का यह बयान यह संकेत देता है कि प्योंगयांग ने अपनी परमाणु नीति को अपरिवर्तनीय मान लिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव पहले से ऊँचे स्तर पर है।

आगे की राह

किम यो-जोंग के इस कड़े रुख के बाद जी-7 और उत्तर कोरिया के बीच कूटनीतिक संवाद की संभावनाएँ और सीमित होती दिख रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक प्योंगयांग अपनी परमाणु स्थिति पर पुनर्विचार नहीं करता, तब तक प्रतिबंधों में कोई ढील मिलने की उम्मीद नहीं है। आने वाले हफ्तों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर नई बहस की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तर कोरिया की नीति पर उनका व्यावहारिक प्रभाव ऐतिहासिक रूप से सीमित रहा है। असली सवाल यह है कि क्या पश्चिमी देश प्रतिबंधों और निंदा से आगे जाकर कोई नई कूटनीतिक रूपरेखा बना सकते हैं — क्योंकि पुरानी रणनीति स्पष्ट रूप से काम नहीं कर रही।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किम यो-जोंग ने जी-7 की परमाणु निरस्त्रीकरण मांग पर क्या कहा?
किम यो-जोंग ने 18 जून 2026 को जारी बयान में जी-7 की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण का मुद्दा 'हमेशा के लिए समाप्त' हो चुका है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियार डीपीआरके के कानून में तय हैं और ये देश की संप्रभुता की रक्षा का साधन हैं।
जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 में उत्तर कोरिया पर क्या निर्णय हुआ?
फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में सात देशों के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही अपहरण पीड़ितों के मुद्दे और उत्तर कोरिया की ओर से कथित साइबर अपराधों पर भी चिंता जताई गई।
उत्तर कोरिया परमाणु हथियार क्यों नहीं छोड़ना चाहता?
किम यो-जोंग के बयान के अनुसार, उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों को अपनी संप्रभुता की रक्षा और शांति सुनिश्चित करने का आधार मानता है। उनका दावा है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह आत्मरक्षा के उद्देश्य से है और इसे देश के संविधान में भी स्थान दिया गया है।
जी-7 ने उत्तर कोरिया के साइबर अपराधों पर क्या कहा?
जी-7 नेताओं ने उत्तर कोरिया की ओर से कथित रूप से की जा रही क्रिप्टोकरेंसी चोरी और साइबर अपराधों से मिलकर निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह मुद्दा हाल के वर्षों में पश्चिमी देशों की उत्तर कोरिया संबंधी चिंताओं में प्रमुखता से उभरा है।
उत्तर कोरिया और जी-7 के बीच कूटनीतिक संबंध अब किस दिशा में जाएंगे?
किम यो-जोंग के कड़े रुख के बाद निकट भविष्य में सार्थक कूटनीतिक संवाद की संभावना कम दिखती है। विश्लेषकों के अनुसार, जब तक प्योंगयांग परमाणु नीति पर पुनर्विचार नहीं करता, प्रतिबंधों में ढील की उम्मीद नहीं है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर नई बहस की संभावना बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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