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प्रवेश वर्मा का विपक्ष पर निशाना: एसआईआर पर झूठ फैलाकर चुनाव आयोग की साख गिराने की कोशिश

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प्रवेश वर्मा का विपक्ष पर निशाना: एसआईआर पर झूठ फैलाकर चुनाव आयोग की साख गिराने की कोशिश

सारांश

दिल्ली के डिप्टी सीएम प्रवेश वर्मा ने एसआईआर को सामान्य प्रक्रिया बताते हुए AAP, कांग्रेस और उनसे जुड़े NGOs पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को आएगी, जबकि सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई होनी बाकी है।

मुख्य बातें

डिप्टी सीएम प्रवेश वर्मा ने 22 सितंबर 2026 को दिल्ली की एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सामान्य बताया।
दस्तावेज़ों में कमी या घर पर अनुपस्थित पाए जाने पर ERO द्वारा नोटिस भेजा जाता है — आम नागरिक और वीआईपी दोनों को।
नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 ; स्क्रूटनी 29 अक्टूबर तक; अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को।
वर्मा ने अरविंद केजरीवाल , सौरभ भारद्वाज , AAP , कांग्रेस और संबद्ध NGOs पर एसआईआर पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय में एसआईआर को चुनौती देती एक याचिका दायर की गई है, जिस पर सुनवाई होनी है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता प्रवेश वर्मा ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को मीडिया से बात करते हुए दिल्ली में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया का बचाव किया और विपक्ष पर इसे लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और उनसे जुड़े गैर सरकारी संगठन इस सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल खड़े कर रहे हैं, जिससे आम मतदाताओं का चुनाव आयोग पर भरोसा कम हो सकता है।

एसआईआर प्रक्रिया क्या है और कैसे काम करती है

प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि एसआईआर एक नियमित मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया है। जिन मतदाताओं के दस्तावेज़ों में कोई कमी पाई जाती है या जो अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिलते, उन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस भेजा जाता है।

उन्होंने कहा, "दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। जिन लोगों के दस्तावेजों में कोई कमी रह जाती है, तो चुनाव आयोग के ईआरओ की तरफ से उन्हें नोटिस जारी किया जाता है। नोटिस में अगर कोई दस्तावेज में कमी होती है तो उसके बारे में पूछा जाता है। यह बहुत ही साधारण प्रक्रिया है।"

नोटिस की प्रक्रिया में भेदभाव नहीं: वर्मा

वर्मा ने यह भी कहा कि यह नोटिस किसी विशेष वर्ग को नहीं, बल्कि दस्तावेज़ों में कमी पाए जाने पर आम नागरिक और वीआईपी — दोनों को समान रूप से भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से काम करता है।

उनके अनुसार, "दिल्ली में कोई आम आदमी हो या कोई वीआईपी हो, सभी को इस तरह के नोटिस जारी किए गए हैं।" किसी भी नागरिक को दस्तावेज़ पूरे करने और नोटिस का जवाब देने का पूरा अवसर दिया जाता है।

मुख्य समय सीमाएँ और अंतिम मतदाता सूची

प्रवेश वर्मा ने एसआईआर की पूरी समय सारिणी भी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं को नोटिस प्राप्त हुए हैं, वे 30 सितंबर 2026 तक अपना जवाब दे सकते हैं। इसके बाद 29 अक्टूबर 2026 तक जवाबों की स्क्रूटनी होगी और 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम सूची आने के बाद भी यदि किसी का नाम छूट जाता है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है और उसके लिए एक अलग प्रक्रिया उपलब्ध है।

विपक्ष पर सीधा हमला

वर्मा ने अरविंद केजरीवाल, सौरभ भारद्वाज, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और उनसे जुड़े स्वयंसेवी संगठनों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे लोगों को ऐसी स्थिति में न धकेलें जिससे चुनाव आयोग पर से जनता का भरोसा उठ जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हर बार बातों को तोड़ मरोड़कर पेश करता है और मतदाताओं से झूठ बोलता है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा कराए गए हर चुनाव पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, और एसआईआर भी इसी कड़ी में है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सियासी तापमान बढ़ा

गौरतलब है कि 22 सितंबर को इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई होनी है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की राजनीति में एसआईआर को लेकर पहले से ही तीखी बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले पर न्यायिक सुनवाई और अंतिम मतदाता सूची दोनों दिल्ली की चुनावी तस्वीर को स्पष्ट करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक पलटवार है — ऐसे समय में जब सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर हो चुकी है। विपक्ष की चिंता केवल 'भ्रम फैलाने' तक सीमित नहीं है; मतदाता सूची में नाम कटने के दावे ज़मीनी स्तर पर भी सामने आए हैं, जिन्हें महज़ 'दस्तावेज़ की कमी' कहकर खारिज करना विश्वसनीय नहीं लगता। असली सवाल यह है कि ERO नोटिस की दर और प्रभावित इलाकों का भौगोलिक वितरण क्या है — जिसका सार्वजनिक खुलासा अभी तक नहीं हुआ है। 4 नवंबर की अंतिम सूची और न्यायिक सुनवाई मिलकर तय करेंगी कि विपक्ष का आरोप राजनीतिक शोर है या उसमें कोई ठोस आधार।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) क्या है?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें दस्तावेज़ों में कमी या पते पर अनुपस्थिति की स्थिति में ERO नोटिस जारी करता है। दिल्ली में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में जारी है और अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
एसआईआर नोटिस का जवाब देने की अंतिम तारीख क्या है?
प्रवेश वर्मा के अनुसार नोटिस प्राप्त मतदाता 30 सितंबर 2026 तक जवाब दे सकते हैं। इसके बाद 29 अक्टूबर तक स्क्रूटनी होगी और 4 नवंबर को अंतिम सूची जारी की जाएगी।
विपक्ष एसआईआर पर सवाल क्यों उठा रहा है?
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हट सकते हैं। इसी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की गई है, जिस पर सुनवाई होनी है।
क्या अंतिम मतदाता सूची में नाम न होने पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है?
हाँ, प्रवेश वर्मा के अनुसार 4 नवंबर की अंतिम सूची के बाद भी यदि किसी का नाम नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
क्या एसआईआर नोटिस केवल विशेष वर्ग को भेजे गए हैं?
नहीं, प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज़ों में कमी पाए जाने पर आम नागरिक और वीआईपी — दोनों को समान रूप से नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव आयोग यह नहीं देखता कि नोटिस किसको भेजा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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