एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विपक्ष ने किया स्वागत, चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 27 मई को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर अपना फैसला सुनाया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने एकजुट होकर न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया — लेकिन साथ ही भारत निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और इरादे पर तीखे सवाल खड़े किए। आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — तीनों ने अलग-अलग स्वरों में आयोग पर अविश्वास जताया।
AAP का रुख: प्रक्रिया नहीं, आयोग से डर
पंजाब के मंत्री व आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अमन अरोरा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को एसआईआर जैसी किसी भी प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं और उसके आदेश को स्वीकार करते हैं। हमने शुरू से ही कहा है कि हमें किसी भी प्रकार की प्रक्रिया, चाहे वह एसआईआर हो या कुछ और, कोई डर, आशंका या कोई विरोध नहीं है।'
अरोरा ने कहा कि असली चिंता यह है कि एसआईआर को भारत निर्वाचन आयोग अंजाम दे रहा है। उन्होंने कहा, 'आयोग से इस डर के पीछे उसका इरादा, उसकी कार्यशैली है, जिस पर सिर्फ आम आदमी पार्टी ही नहीं बल्कि देश के ज़्यादातर लोगों का विश्वास नहीं है।'
मतदाता जागरूकता पर AAP की रणनीति
पंजाब के मंत्री अमन अरोरा ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी ने अपने सभी विधायकों और कार्यकर्ताओं को एसआईआर पर कड़ी नज़र रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करें ताकि ऐसा न हो कि लोग घर पर बैठे रहें और उन्हें इसके बारे में जानकारी न मिल सके।' साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि वोटर लिस्ट पर पूरी निगाह रखी जाए और सभी के मताधिकार सुनिश्चित किए जाएँ।
TMC का नज़रिया: नागरिकता तय करने का अधिकार आयोग को नहीं
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने फैसले की एक अहम बात की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, 'मैंने जो फैसला सुना है, उसमें यह माना गया है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा पर्याप्त थी। इसमें एक दिलचस्प बात यह कही गई है कि चुनाव आयोग को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।' यह टिप्पणी एसआईआर की संवैधानिक सीमाओं को रेखांकित करती है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: विसंगतियों पर उठाए सवाल
कांग्रेस के सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए एसआईआर में पहले सामने आई खामियों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'एसआईआर में कई विसंगतियाँ थीं और कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था।' उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है ये विसंगतियाँ अब ठीक हो गई हों, लेकिन उन्होंने फैसले पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विपक्षी दल अब मतदाता सूचियों की निगरानी के लिए ज़मीनी स्तर पर सक्रिय होने की तैयारी में हैं। यह देखना अहम होगा कि भारत निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को किस पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाता है और विपक्ष की आशंकाओं का समाधान होता है या नहीं।