13 जुलाई 2026
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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विपक्ष ने किया स्वागत, चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाए सवाल

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एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विपक्ष ने किया स्वागत, चुनाव आयोग की कार्यशैली पर उठाए सवाल

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को हरी झंडी दी, लेकिन विपक्ष का असली निशाना चुनाव आयोग है। AAP, TMC और कांग्रेस ने एकसुर में कहा — प्रक्रिया से नहीं, आयोग की नीयत और कार्यशैली से डर है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर फैसला सुनाया, जिसे विपक्ष ने स्वीकार किया।
AAP नेता व पंजाब मंत्री अमन अरोरा ने कहा कि पार्टी को एसआईआर से नहीं, भारत निर्वाचन आयोग की कार्यशैली से आपत्ति है।
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने फैसले में इस बात को रेखांकित किया कि आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है।
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने एसआईआर में पहले सामने आई विसंगतियों — जीवित लोगों को मृत घोषित किए जाने — का उल्लेख किया।
AAP ने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को मतदाता सूचियों पर कड़ी नज़र रखने और जन-जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 27 मई को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर अपना फैसला सुनाया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने एकजुट होकर न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया — लेकिन साथ ही भारत निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और इरादे पर तीखे सवाल खड़े किए। आम आदमी पार्टी (AAP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — तीनों ने अलग-अलग स्वरों में आयोग पर अविश्वास जताया।

AAP का रुख: प्रक्रिया नहीं, आयोग से डर

पंजाब के मंत्री व आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता अमन अरोरा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को एसआईआर जैसी किसी भी प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, 'हम सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं और उसके आदेश को स्वीकार करते हैं। हमने शुरू से ही कहा है कि हमें किसी भी प्रकार की प्रक्रिया, चाहे वह एसआईआर हो या कुछ और, कोई डर, आशंका या कोई विरोध नहीं है।'

अरोरा ने कहा कि असली चिंता यह है कि एसआईआर को भारत निर्वाचन आयोग अंजाम दे रहा है। उन्होंने कहा, 'आयोग से इस डर के पीछे उसका इरादा, उसकी कार्यशैली है, जिस पर सिर्फ आम आदमी पार्टी ही नहीं बल्कि देश के ज़्यादातर लोगों का विश्वास नहीं है।'

मतदाता जागरूकता पर AAP की रणनीति

पंजाब के मंत्री अमन अरोरा ने यह भी बताया कि उनकी पार्टी ने अपने सभी विधायकों और कार्यकर्ताओं को एसआईआर पर कड़ी नज़र रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, 'कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करें ताकि ऐसा न हो कि लोग घर पर बैठे रहें और उन्हें इसके बारे में जानकारी न मिल सके।' साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि वोटर लिस्ट पर पूरी निगाह रखी जाए और सभी के मताधिकार सुनिश्चित किए जाएँ।

TMC का नज़रिया: नागरिकता तय करने का अधिकार आयोग को नहीं

तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने फैसले की एक अहम बात की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, 'मैंने जो फैसला सुना है, उसमें यह माना गया है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा पर्याप्त थी। इसमें एक दिलचस्प बात यह कही गई है कि चुनाव आयोग को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।' यह टिप्पणी एसआईआर की संवैधानिक सीमाओं को रेखांकित करती है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: विसंगतियों पर उठाए सवाल

कांग्रेस के सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए एसआईआर में पहले सामने आई खामियों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, 'एसआईआर में कई विसंगतियाँ थीं और कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था।' उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है ये विसंगतियाँ अब ठीक हो गई हों, लेकिन उन्होंने फैसले पर सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद एसआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। विपक्षी दल अब मतदाता सूचियों की निगरानी के लिए ज़मीनी स्तर पर सक्रिय होने की तैयारी में हैं। यह देखना अहम होगा कि भारत निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को किस पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाता है और विपक्ष की आशंकाओं का समाधान होता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर आयोग पर भरोसा नहीं' — एक गहरे संस्थागत अविश्वास को उजागर करता है जो महज़ एक अदालती आदेश से नहीं मिटेगा। असली सवाल यह है कि जब निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर इतने बड़े दलों को संदेह है, तो एसआईआर की विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित होगी। कांग्रेस द्वारा जीवित मतदाताओं को मृत घोषित किए जाने की विसंगतियाँ उठाना और TMC का नागरिकता-निर्धारण वाला बिंदु — दोनों मिलकर बताते हैं कि विपक्ष की रणनीति अदालत से बाहर, जनमत के मैदान में लड़ी जाएगी। बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, यह विवाद अगले चुनाव तक सुलगता रहेगा।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या फैसला दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर फैसला सुनाते हुए माना कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा पर्याप्त थी। साथ ही फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि चुनाव आयोग को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।
अमन अरोरा ने एसआईआर पर क्या कहा?
पंजाब के मंत्री व AAP नेता अमन अरोरा ने कहा कि उनकी पार्टी को एसआईआर जैसी किसी भी प्रक्रिया से कोई विरोध नहीं है, लेकिन भारत निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और इरादे पर देश के अधिकतर लोगों का भरोसा नहीं है। उन्होंने अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को मतदाता सूचियों की निगरानी और जन-जागरूकता के निर्देश दिए।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत भारत निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों की व्यापक जाँच और अद्यतन करता है। इसका उद्देश्य फर्ज़ी, मृत या अपात्र नामों को हटाना और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना है।
कांग्रेस ने एसआईआर में किन विसंगतियों का ज़िक्र किया?
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि एसआईआर में कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया था, जो एक गंभीर विसंगति थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए उम्मीद जताई कि ये खामियाँ अब दूर हो गई होंगी।
TMC ने एसआईआर के फैसले में कौन-सा अहम बिंदु उठाया?
TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने फैसले में इस बात को रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारत निर्वाचन आयोग को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं। यह बिंदु एसआईआर की संवैधानिक सीमाओं को परिभाषित करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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