कावेरी डेल्टा किसानों की माँग: धान खरीद में तेजी लाए तमिलनाडु सरकार, खुले केंद्रों पर हजारों बोरी स्टॉक जमा
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से प्रत्यक्ष खरीद केंद्रों (डीपीसी) पर जमा हुए धान के स्टॉक को तत्काल हटाने और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की माँग की है। 13 जुलाई को सामने आई इस स्थिति में परिवहन में देरी के कारण खुले केंद्रों पर हजारों बोरी धान कई दिनों से पड़ी हुई है, जिससे ग्रीष्मकालीन फसल सीजन की खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है।
मुख्य घटनाक्रम
कावेरी डेल्टा क्षेत्र में इस वर्ष अप्रैल से शुरू हुई अल्पकालिक ग्रीष्मकालीन धान की खेती लगभग 1.60 लाख एकड़ में की गई थी। फसल की कटाई अब लगभग पूरी हो चुकी है। जून के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई खरीद प्रक्रिया अगस्त तक जारी रहने वाली है।
किसान संगठनों के अनुसार, जिन केंद्रों पर शुरुआत में प्रतिदिन लगभग 1,000 बोरी धान खरीदा जा रहा था, वहाँ अब केवल 500 से 600 बोरी प्रतिदिन की खरीद हो रही है। सरकार ने डीपीसी के अलावा प्वाइंट ऑफ प्रोक्योरमेंट (पीओपी) केंद्र भी स्थापित किए हैं, जिनकी प्रतिदिन 1,000 बोरी खरीदने की क्षमता है।
परिवहन देरी बनी मुख्य वजह
किसानों ने इस सुस्ती के लिए तमिलनाडु सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन (टीएनसीएससी) के गोदामों और वहाँ से राइस मिलों तक धान के परिवहन में हो रही देरी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर खरीद के तुरंत बाद धान का परिवहन कर दिया जाता है, लेकिन इस सीजन में ऐसा नहीं हुआ।
किसान प्रतिनिधियों का आरोप है कि जमा हुए स्टॉक को न हटाए जाने के कारण खरीद केंद्रों का स्टाफ अतिरिक्त धान स्वीकार करने से हिचकिचा रहा है, क्योंकि केंद्रों पर और अधिक भीड़भाड़ बढ़ने का डर है। इस स्थिति में कई किसानों को अपनी कटी हुई फसल अपने खर्च पर सुरक्षित रखनी पड़ रही है।
गुणवत्ता पर मंडराता खतरा
किसानों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से धान का वजन कम हो सकता है, उसका रंग बदल सकता है और गुणवत्ता से जुड़ी अन्य समस्याएँ भी पैदा हो सकती हैं। आलोचकों का कहना है कि खराब योजना के कारण हजारों बोरी धान कई दिनों से खुले मैदानों में पड़ी है, जो किसानों की मेहनत और उपज दोनों को नुकसान पहुँचा रही है।
आम जनता और किसानों पर असर
जो किसान अभी भी अपनी फसल बेचने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें खरीद में और देरी का सामना करना पड़ रहा है। खरीद प्रक्रिया के और धीमा होने की आशंका से किसानों में चिंता बढ़ रही है, जबकि वे बिना किसी देरी के अपनी उपज बेचने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
क्या होगा आगे
किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से माँग की है कि डीपीसी से टीएनसीएससी गोदामों तक परिवहन की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए और खरीद केंद्रों पर जमा स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। यदि सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती, तो ग्रीष्मकालीन धान की खरीद पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।