कावेरी डेल्टा किसानों की माँग: कुरुवई फसल नुकसान पर ₹1,125 करोड़ राहत पैकेज दे तमिलनाडु सरकार
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से कुरुवई धान फसल के इस सीजन में भारी नुकसान की भरपाई के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज घोषित करने की माँग की है। मेट्टूर बाँध में जलस्तर सामान्य से काफी नीचे रहने के कारण इस वर्ष कुरुवई की बुआई का रकबा उल्लेखनीय रूप से घट गया है, जिससे डेल्टा जिलों में किसान प्रतिनिधियों के अनुसार लगभग ₹1,125 करोड़ की आय का नुकसान होने की आशंका है। किसान संगठनों ने यह भी माँग की है कि सरकार वैकल्पिक फसलों की वैज्ञानिक सलाह और वित्तीय सहायता एक साथ उपलब्ध कराए।
संकट की पृष्ठभूमि
कुरुवई कावेरी डेल्टा की सबसे महत्वपूर्ण अल्पकालिक धान फसलों में से एक है, जो जून-जुलाई में बोई जाती है। इस वर्ष कावेरी नदी से पानी छोड़े जाने को लेकर अनिश्चितता और मेट्टूर जलाशय में जलस्तर का कम बना रहना — दोनों कारणों ने मिलकर इस सीजन की बुआई योजनाओं को गंभीर रूप से बाधित किया है। गौरतलब है कि कावेरी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद वर्षों पुराना है, और हर सूखे सीजन में डेल्टा के किसान इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं।
नुकसान का दायरा
किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि इस संकट का असर केवल धान उत्पादकों तक सीमित नहीं रहेगा। कुरुवई की खेती न होने से धान के भूसे की भारी कमी होगी, जो मवेशियों के चारे का प्रमुख स्रोत है। इसके चलते पशुपालन क्षेत्र भी प्रभावित होगा, जिससे ग्रामीण आजीविका पर दोहरी मार पड़ने की आशंका है। किसान संगठनों का कहना है कि यह एक बहुस्तरीय कृषि संकट है जिसे केवल फसल मुआवजे से नहीं सुलझाया जा सकता।
सरकार की सलाह और किसानों की प्रतिक्रिया
खाद्य मंत्री पी. वेंकटरामनन ने डेल्टा क्षेत्र के हालिया दौरे में किसानों को पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी। किसान संगठनों ने इस सुझाव का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि बिना वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और स्पष्ट बाजार रणनीति के ऐसा बदलाव व्यावहारिक नहीं होगा। कई किसान मुनाफे और सरकारी समर्थन का आश्वासन मिले बिना खेती में बदलाव करने से हिचकिचा रहे हैं।
किसान संगठनों की माँगें
तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन ने राज्य सरकार से कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस बैठक में ऐसी फसलों की पहचान की जाए जो मौजूदा जल उपलब्धता और स्थानीय मिट्टी की दशाओं के अनुकूल हों। किसान संगठनों ने एक व्यापक विशेष पैकेज की माँग की है जिसमें इनपुट सब्सिडी, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और विस्तार सहायता शामिल हों।
आगे की राह
किसानों का कहना है कि उचित योजना, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और पर्याप्त वित्तीय सहायता मिले तो इस सीजन में फसल विविधीकरण संभव है और कुरुवई की कटौती से होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार की ओर से अभी तक किसी राहत पैकेज की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, और किसान संगठन तत्काल हस्तक्षेप की प्रतीक्षा में हैं।