30 जून 2026
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कावेरी डेल्टा किसानों की माँग: कुरुवई फसल नुकसान पर ₹1,125 करोड़ राहत पैकेज दे तमिलनाडु सरकार

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कावेरी डेल्टा किसानों की माँग: कुरुवई फसल नुकसान पर ₹1,125 करोड़ राहत पैकेज दे तमिलनाडु सरकार

सारांश

मेट्टूर बाँध में पानी की कमी ने इस साल कावेरी डेल्टा में कुरुवई धान की बुआई को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान प्रतिनिधियों के अनुसार नुकसान ₹1,125 करोड़ तक पहुँच सकता है। किसान संगठन राहत पैकेज और वैज्ञानिक मार्गदर्शन की माँग कर रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई।

मुख्य बातें

मेट्टूर बाँध में जलस्तर कम रहने से कावेरी डेल्टा में कुरुवई धान की बुआई का रकबा इस सीजन में उल्लेखनीय रूप से घटा।
किसान प्रतिनिधियों के अनुसार फसल नुकसान से डेल्टा जिलों में लगभग ₹1,125 करोड़ की आय का नुकसान होने की आशंका है।
कुरुवई की खेती न होने से धान के भूसे की कमी होगी, जिससे पशुपालन क्षेत्र भी प्रभावित होगा।
तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन ने कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसानों की संयुक्त बैठक की माँग की।
किसान संगठनों ने इनपुट सब्सिडी, बीज, उर्वरक और विस्तार सहायता सहित व्यापक विशेष पैकेज की माँग की।
वेंकटरामनन ने डेल्टा दौरे में वैकल्पिक फसलों की सलाह दी, लेकिन राहत पैकेज की कोई घोषणा नहीं हुई।

कावेरी डेल्टा के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से कुरुवई धान फसल के इस सीजन में भारी नुकसान की भरपाई के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज घोषित करने की माँग की है। मेट्टूर बाँध में जलस्तर सामान्य से काफी नीचे रहने के कारण इस वर्ष कुरुवई की बुआई का रकबा उल्लेखनीय रूप से घट गया है, जिससे डेल्टा जिलों में किसान प्रतिनिधियों के अनुसार लगभग ₹1,125 करोड़ की आय का नुकसान होने की आशंका है। किसान संगठनों ने यह भी माँग की है कि सरकार वैकल्पिक फसलों की वैज्ञानिक सलाह और वित्तीय सहायता एक साथ उपलब्ध कराए।

संकट की पृष्ठभूमि

कुरुवई कावेरी डेल्टा की सबसे महत्वपूर्ण अल्पकालिक धान फसलों में से एक है, जो जून-जुलाई में बोई जाती है। इस वर्ष कावेरी नदी से पानी छोड़े जाने को लेकर अनिश्चितता और मेट्टूर जलाशय में जलस्तर का कम बना रहना — दोनों कारणों ने मिलकर इस सीजन की बुआई योजनाओं को गंभीर रूप से बाधित किया है। गौरतलब है कि कावेरी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद वर्षों पुराना है, और हर सूखे सीजन में डेल्टा के किसान इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाते हैं।

नुकसान का दायरा

किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि इस संकट का असर केवल धान उत्पादकों तक सीमित नहीं रहेगा। कुरुवई की खेती न होने से धान के भूसे की भारी कमी होगी, जो मवेशियों के चारे का प्रमुख स्रोत है। इसके चलते पशुपालन क्षेत्र भी प्रभावित होगा, जिससे ग्रामीण आजीविका पर दोहरी मार पड़ने की आशंका है। किसान संगठनों का कहना है कि यह एक बहुस्तरीय कृषि संकट है जिसे केवल फसल मुआवजे से नहीं सुलझाया जा सकता।

सरकार की सलाह और किसानों की प्रतिक्रिया

खाद्य मंत्री पी. वेंकटरामनन ने डेल्टा क्षेत्र के हालिया दौरे में किसानों को पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए वैकल्पिक फसलों की ओर रुख करने की सलाह दी। किसान संगठनों ने इस सुझाव का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि बिना वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और स्पष्ट बाजार रणनीति के ऐसा बदलाव व्यावहारिक नहीं होगा। कई किसान मुनाफे और सरकारी समर्थन का आश्वासन मिले बिना खेती में बदलाव करने से हिचकिचा रहे हैं।

किसान संगठनों की माँगें

तमिलनाडु कावेरी किसान संरक्षण संघ के सचिव स्वामीमलाई सुंदर विमलनाथन ने राज्य सरकार से कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इस बैठक में ऐसी फसलों की पहचान की जाए जो मौजूदा जल उपलब्धता और स्थानीय मिट्टी की दशाओं के अनुकूल हों। किसान संगठनों ने एक व्यापक विशेष पैकेज की माँग की है जिसमें इनपुट सब्सिडी, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और विस्तार सहायता शामिल हों।

आगे की राह

किसानों का कहना है कि उचित योजना, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और पर्याप्त वित्तीय सहायता मिले तो इस सीजन में फसल विविधीकरण संभव है और कुरुवई की कटौती से होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार की ओर से अभी तक किसी राहत पैकेज की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, और किसान संगठन तत्काल हस्तक्षेप की प्रतीक्षा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फसल चौपट, किसान माँगें, सरकार आश्वासन। खाद्य मंत्री की 'वैकल्पिक फसल' की सलाह सैद्धांतिक रूप से सही है, लेकिन बिना बाजार-लिंकेज, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और तकनीकी ढाँचे के यह सलाह खोखली रह जाती है। ₹1,125 करोड़ के नुकसान का अनुमान केवल धान तक सीमित है — पशुपालन और ग्रामीण श्रम पर पड़ने वाले दूसरे और तीसरे स्तर के प्रभाव इस आँकड़े को और बड़ा बना सकते हैं। असली सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु सरकार इस बार केवल मुआवजे से आगे बढ़कर दीर्घकालिक जल-कृषि नीति की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुरुवई फसल क्या है और इस साल इसे नुकसान क्यों हुआ?
कुरुवई कावेरी डेल्टा में जून-जुलाई में बोई जाने वाली अल्पकालिक धान की फसल है। इस साल मेट्टूर बाँध में जलस्तर सामान्य से काफी कम रहा और कावेरी से पानी छोड़े जाने को लेकर अनिश्चितता बनी रही, जिससे बुआई का रकबा भारी कमी आई।
कावेरी डेल्टा के किसानों को इस सीजन में कितना नुकसान होने की आशंका है?
किसान प्रतिनिधियों के अनुसार कुरुवई की खेती न हो पाने से डेल्टा जिलों में लगभग ₹1,125 करोड़ की आय का नुकसान होने की आशंका है। इसके अलावा धान के भूसे की कमी से पशुपालन क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा।
किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
किसान संगठनों ने एक व्यापक विशेष राहत पैकेज की माँग की है जिसमें इनपुट सब्सिडी, उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और विस्तार सहायता शामिल हों। साथ ही कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाने की माँग भी की गई है।
तमिलनाडु सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
खाद्य मंत्री पी. वेंकटरामनन ने डेल्टा क्षेत्र का दौरा कर किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह दी है। हालाँकि, अब तक किसी विशेष राहत पैकेज की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
वैकल्पिक फसलों की खेती को लेकर किसानों की क्या चिंताएँ हैं?
कई किसान मुनाफे, बाजार तक पहुँच और सरकारी समर्थन का आश्वासन मिले बिना खेती में बदलाव करने से हिचकिचा रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि नई फसलें अपनाने से पहले समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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