31 जुलाई 2026
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कावेरी जल संकट: वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक की माँग की

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कावेरी जल संकट: वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक की माँग की

सारांश

तमिलनाडु को कावेरी के निर्धारित हिस्से का सिर्फ 10% पानी मिला है और कमी 33 टीएमसी फीट तक पहुँच गई है। वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने सर्वदलीय बैठक की माँग करते हुए चेताया कि कुरुवई के बाद सांबा फसल भी खतरे में है और डेल्टा किसानों की आजीविका दाँव पर है।

मुख्य बातें

वीसीके अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन ने 30 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की।
1 जून से 27 जुलाई के बीच बिलिगुंड्लु में तमिलनाडु को केवल 3.6 टीएमसी फीट पानी मिला, जबकि निर्धारित हिस्सा 36.4 टीएमसी फीट है — कुल कमी लगभग 33 टीएमसी फीट ।
CWMA ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया, लेकिन कर्नाटक के किसान संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
कावेरी डेल्टा में कुरुवई सीजन बर्बाद हो चुका है; अब सांबा फसल पर भी संकट के बादल।
थिरुमावलवन ने कर्नाटक पर CWRC के निर्देशों की अनदेखी और 'तमिल-विरोधी रुख' का आरोप लगाया।

विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन ने 30 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार से कावेरी जल संकट पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक द्वारा राज्य का वाजिब जलहिस्सा लगातार रोके जाने के कारण अब एकजुट राजनीतिक प्रतिक्रिया अपरिहार्य हो गई है। 1 जून से 27 जुलाई के बीच तमिलनाडु को अपने निर्धारित हिस्से का मात्र 10 प्रतिशत पानी मिला है।

पानी की कमी का आँकड़ा

थिरुमावलवन ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के अध्यक्ष विनीत गुप्ता द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार तमिलनाडु का निर्धारित हिस्सा 36.4 टीएमसी फीट है, जबकि बिलिगुंड्लु में राज्य को उक्त अवधि में केवल 3.6 टीएमसी फीट पानी प्राप्त हुआ। इस प्रकार कुल कमी बढ़कर लगभग 33 टीएमसी फीट हो गई है, जिससे राज्य की सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।

कर्नाटक पर आरोप और CWMA का निर्देश

वीसीके प्रमुख ने कर्नाटक सरकार पर CWRC के निर्देशों की अनदेखी करने और अंतर-राज्यीय नदी विवाद में 'तमिल-विरोधी रुख' अपनाने का आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य के किसान संगठन इस सीमित आदेश का भी विरोध कर रहे हैं, जिससे क्रियान्वयन पर अनिश्चितता बनी हुई है।

कृषि पर असर: कुरुवई के बाद सांबा भी संकट में

थिरुमावलवन के अनुसार, पानी की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण कावेरी डेल्टा क्षेत्र के कई हिस्सों में कुरुवई खेती का सीजन पहले ही बर्बाद हो चुका है। अब सांबा फसल पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे हजारों किसानों की आजीविका और राज्य के खाद्य उत्पादन को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। यह संकट डेल्टा जिलों के उन किसानों को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है जो पूरी तरह कावेरी के पानी पर निर्भर हैं।

सर्वदलीय बैठक की माँग

वीसीके नेता ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु अब अपने कानूनी अधिकारों की पूर्ति के लिए कर्नाटक की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह सभी राजनीतिक दलों को एकजुट कर एक साझा रणनीति तैयार करे, जिससे डेल्टा जिलों के किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और कावेरी जल पर तमिलनाडु के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके। यह माँग ऐसे समय में आई है जब कावेरी विवाद एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। CWMA के निर्देश के बावजूद कर्नाटक में किसान संगठनों के विरोध को देखते हुए जल छोड़े जाने की स्थिति पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा। सांबा सीजन की बुवाई का समय निकट आने के साथ, आने वाले हफ्ते डेल्टा किसानों के लिए निर्णायक साबित होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार का संकट इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि CWMA का आदेश होने के बावजूद पड़ोसी राज्य में किसान संगठन पानी छोड़े जाने का विरोध कर रहे हैं — यानी संस्थागत तंत्र और ज़मीनी राजनीति के बीच की खाई चौड़ी हो रही है। थिरुमावलवन की सर्वदलीय बैठक की माँग प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, परंतु असली सवाल यह है कि क्या तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका जैसे कानूनी विकल्पों की ओर बढ़ेगी या राजनीतिक एकजुटता तक सीमित रहेगी। कुरुवई सीजन के नष्ट होने और सांबा पर मँडराते खतरे के बीच, डेल्टा किसानों के लिए राजनीतिक बयानबाज़ी पर्याप्त नहीं है — उन्हें ठोस मुआवज़े और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था की दरकार है, जिस पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल संकट में तमिलनाडु को कितना पानी मिला है?
CWRC के आँकड़ों के अनुसार, 1 जून से 27 जुलाई 2026 के बीच बिलिगुंड्लु में तमिलनाडु को केवल 3.6 टीएमसी फीट पानी मिला, जबकि 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के तहत राज्य का निर्धारित हिस्सा 36.4 टीएमसी फीट है। इस प्रकार राज्य को अपने हिस्से का मात्र 10 प्रतिशत पानी ही मिला है और कुल कमी लगभग 33 टीएमसी फीट हो गई है।
वीसीके ने सर्वदलीय बैठक की माँग क्यों की?
वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन का कहना है कि कर्नाटक CWRC के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है और तमिलनाडु अब अपने कानूनी अधिकारों की पूर्ति के लिए कर्नाटक की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रह सकता। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर सभी दलों की एकजुट राजनीतिक प्रतिक्रिया और साझा रणनीति ज़रूरी है।
CWMA ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिया है?
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। हालाँकि कर्नाटक के किसान संगठन इस सीमित आदेश का भी विरोध कर रहे हैं, जिससे क्रियान्वयन पर अनिश्चितता बनी हुई है।
कावेरी जल संकट से तमिलनाडु की कौन-सी फसलें प्रभावित हो रही हैं?
पानी की कमी के कारण कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कुरुवई खेती का सीजन पहले ही बर्बाद हो चुका है। अब सांबा फसल पर भी अनिश्चितता मँडरा रही है, जिससे हजारों किसानों की आजीविका और राज्य के खाद्य उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ गई है।
2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में तमिलनाडु को कावेरी जल का कितना हिस्सा तय किया गया था?
2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के लिए कावेरी जल का 36.4 टीएमसी फीट हिस्सा निर्धारित किया था। यह फैसला दशकों पुराने अंतर-राज्यीय जल विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी मील का पत्थर माना जाता है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर विवाद जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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