कावेरी जल संकट: वीसीके प्रमुख थिरुमावलवन ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) के अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद थोल थिरुमावलवन ने 30 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार से कावेरी जल संकट पर तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की माँग की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक द्वारा राज्य का वाजिब जलहिस्सा लगातार रोके जाने के कारण अब एकजुट राजनीतिक प्रतिक्रिया अपरिहार्य हो गई है। 1 जून से 27 जुलाई के बीच तमिलनाडु को अपने निर्धारित हिस्से का मात्र 10 प्रतिशत पानी मिला है।
पानी की कमी का आँकड़ा
थिरुमावलवन ने कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के अध्यक्ष विनीत गुप्ता द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2018 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार तमिलनाडु का निर्धारित हिस्सा 36.4 टीएमसी फीट है, जबकि बिलिगुंड्लु में राज्य को उक्त अवधि में केवल 3.6 टीएमसी फीट पानी प्राप्त हुआ। इस प्रकार कुल कमी बढ़कर लगभग 33 टीएमसी फीट हो गई है, जिससे राज्य की सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है।
कर्नाटक पर आरोप और CWMA का निर्देश
वीसीके प्रमुख ने कर्नाटक सरकार पर CWRC के निर्देशों की अनदेखी करने और अंतर-राज्यीय नदी विवाद में 'तमिल-विरोधी रुख' अपनाने का आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य के किसान संगठन इस सीमित आदेश का भी विरोध कर रहे हैं, जिससे क्रियान्वयन पर अनिश्चितता बनी हुई है।
कृषि पर असर: कुरुवई के बाद सांबा भी संकट में
थिरुमावलवन के अनुसार, पानी की अपर्याप्त उपलब्धता के कारण कावेरी डेल्टा क्षेत्र के कई हिस्सों में कुरुवई खेती का सीजन पहले ही बर्बाद हो चुका है। अब सांबा फसल पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं, जिससे हजारों किसानों की आजीविका और राज्य के खाद्य उत्पादन को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। यह संकट डेल्टा जिलों के उन किसानों को सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है जो पूरी तरह कावेरी के पानी पर निर्भर हैं।
सर्वदलीय बैठक की माँग
वीसीके नेता ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु अब अपने कानूनी अधिकारों की पूर्ति के लिए कर्नाटक की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह सभी राजनीतिक दलों को एकजुट कर एक साझा रणनीति तैयार करे, जिससे डेल्टा जिलों के किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और कावेरी जल पर तमिलनाडु के संवैधानिक अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके। यह माँग ऐसे समय में आई है जब कावेरी विवाद एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार की ओर से सर्वदलीय बैठक पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। CWMA के निर्देश के बावजूद कर्नाटक में किसान संगठनों के विरोध को देखते हुए जल छोड़े जाने की स्थिति पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा। सांबा सीजन की बुवाई का समय निकट आने के साथ, आने वाले हफ्ते डेल्टा किसानों के लिए निर्णायक साबित होंगे।