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कावेरी जल विवाद: सीडब्ल्यूआरसी के 3,500 क्यूसेक निर्देश पर कर्नाटक सीएम से चर्चा के बाद लेगा फैसला

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कावेरी जल विवाद: सीडब्ल्यूआरसी के 3,500 क्यूसेक निर्देश पर कर्नाटक सीएम से चर्चा के बाद लेगा फैसला

सारांश

सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को 15 दिन तक रोज़ 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को देने का आदेश दिया है — लेकिन केआरएस बांध में मात्र 16 टीएमसी जल बचा है और बेंगलुरु की पेयजल सुरक्षा दांव पर है। राज्य सीडब्ल्यूएमए में अपील के विकल्प पर विचार कर रहा है।

मुख्य बातें

सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया।
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा — अंतिम फैसला मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार से चर्चा के बाद होगा।
केआरएस बांध में फिलहाल केवल 16 टीएमसी पानी, जिसमें से 5 टीएमसी डेड स्टोरेज है; कुल क्षमता 46 टीएमसी ।
जलाशय में सामान्य 3,000–4,000 क्यूसेक की जगह केवल 600 क्यूसेक पानी की दैनिक आवक।
कर्नाटक सरकार सीडब्ल्यूएमए में आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर विचार कर रही है।
किसानों को केआरएस पर निर्भर अधिक पानी वाली फसलें न बोने की सलाह पहले ही दी जा चुकी है।

कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने मंगलवार, 28 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि राज्य सरकार इस आदेश पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लेगी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमज़ोरी के चलते कर्नाटक गंभीर जल संकट में है।

सीडब्ल्यूआरसी का निर्देश और कर्नाटक की स्थिति

कावेरी जल प्रबंधन से जुड़ी बैठक में सीडब्ल्यूआरसी ने यह आदेश जारी किया। मंत्री रेड्डी ने स्पष्ट किया कि कर्नाटक को खुद लगभग 6 टीएमसी पानी की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'हमें खुद करीब 6 टीएमसी पानी की जरूरत है। हमारे पास कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष इस आदेश के खिलाफ अपील करने का विकल्प भी है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से चर्चा के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।'

गौरतलब है कि कावेरी बेसिन के जलाशयों में जल स्तर इस समय बेहद निचले स्तर पर है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध — जिसकी कुल क्षमता लगभग 46 टीएमसी है — में फिलहाल केवल करीब 16 टीएमसी पानी उपलब्ध है। इसमें से लगभग 5 टीएमसी 'डेड स्टोरेज' है, जिसका व्यावहारिक उपयोग संभव नहीं है।

मानसून की कमज़ोरी और पेयजल संकट

रेड्डी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमज़ोर रहने के कारण केआरएस जलाशय में पानी की आवक सामान्य से कहीं कम है। आमतौर पर मानसून के दौरान जलाशय में प्रतिदिन 3,000 से 4,000 क्यूसेक पानी आता है, लेकिन इस समय केवल करीब 600 क्यूसेक की आवक हो रही है — जो सामान्य का लगभग छठा हिस्सा है।

उन्होंने कहा, 'हमें पर्याप्त बारिश नहीं मिली है। हमारी प्राथमिकता पूरे साल लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।' आने वाले हफ्तों में भी अच्छी बारिश की संभावना कम बताई जा रही है, जिससे संकट और गहरा हो सकता है।

किसानों और शहरों पर असर

कावेरी नदी बेंगलुरु, मैसूरु और मांड्या के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। राज्य सरकार उपलब्ध जल भंडार को अगले वर्ष मार्च या अप्रैल तक बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। जल संकट को देखते हुए सरकार पहले ही किसानों को केआरएस जलाशय पर निर्भर अधिक पानी वाली फसलें न बोने की सलाह दे चुकी है।

ऐसे में यदि तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, तो आने वाले गर्मी के महीनों में बेंगलुरु की पेयजल आपूर्ति बनाए रखना कर्नाटक के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

कानूनी विकल्प और आगे की राह

सीडब्ल्यूआरसी के निर्देश के बाद कर्नाटक में चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है और सीडब्ल्यूएमए में आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर जल्द फैसला ले सकती है। यह ऐसे समय में है जब कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बँटवारे का विवाद दशकों पुराना है और हर सूखे के मौसम में तीखा हो जाता है। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री शिवकुमार के निर्णय पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका समय अत्यंत विकट है — केआरएस में उपयोगी जल केवल 11 टीएमसी बचा है और बेंगलुरु जैसे महानगर की पेयजल निर्भरता इसी पर है। कावेरी विवाद में बार-बार यही विरोधाभास उभरता है: अंतर-राज्यीय आवंटन के नियम सूखे की वास्तविकता को नहीं पकड़ पाते। कर्नाटक का सीडब्ल्यूएमए में अपील का विकल्प कानूनी रूप से उपलब्ध है, परंतु अतीत में ऐसी अपीलें अक्सर लंबी खिंचती रही हैं — तब तक पानी छोड़ने का दबाव बना रहता है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार दोनों राज्यों के बीच त्वरित मध्यस्थता करेगी या एक बार फिर यह विवाद अदालती दरवाज़ों तक जाएगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिया है?
कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने कर्नाटक को अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है। यह आदेश कावेरी जल प्रबंधन बैठक के बाद जारी किया गया।
कर्नाटक इस आदेश पर क्या कदम उठाएगा?
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के अनुसार, राज्य सरकार मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेगी। कर्नाटक कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) में इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर भी विचार कर रहा है।
केआरएस बांध में अभी कितना पानी है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कृष्णराज सागर (केआरएस) बांध में फिलहाल केवल करीब 16 टीएमसी पानी है, जबकि इसकी कुल क्षमता 46 टीएमसी है। इसमें से लगभग 5 टीएमसी डेड स्टोरेज है, जिसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
कर्नाटक में जल संकट की वजह क्या है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के कमज़ोर रहने के कारण केआरएस जलाशय में पानी की आवक सामान्य से बहुत कम है। सामान्यतः 3,000–4,000 क्यूसेक की दैनिक आवक की जगह अभी केवल करीब 600 क्यूसेक पानी पहुँच रहा है।
इस विवाद का बेंगलुरु और अन्य शहरों पर क्या असर पड़ेगा?
कावेरी नदी बेंगलुरु, मैसूरु और मांड्या के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। यदि तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है तो आने वाले गर्मी के महीनों में इन शहरों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार उपलब्ध जल भंडार को मार्च-अप्रैल 2027 तक बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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