30 जुलाई 2026
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कावेरी जल विवाद: पीने का पानी सर्वोच्च प्राथमिकता, राजनीति बंद करें — पूर्व मंत्री चेलुवरयास्वामी

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कावेरी जल विवाद: पीने का पानी सर्वोच्च प्राथमिकता, राजनीति बंद करें — पूर्व मंत्री चेलुवरयास्वामी

सारांश

CWRC के 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के बाद कर्नाटक के पूर्व मंत्री चेलुवरयास्वामी ने साफ कहा — पीने का पानी पहले, राजनीति बाद में। तमिलनाडु के CM स्टालिन के 3 अगस्त को विधान सौधा आने की उम्मीद के साथ बातचीत का रास्ता खुला है।

मुख्य बातें

CWRC ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया।
पूर्व कृषि मंत्री एन.
चेलुवरयास्वामी ने 30 जुलाई को बेंगलुरु में आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष से राजनीति न करने की अपील की।
कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में इस माह अपेक्षित वर्षा नहीं हुई; बेंगलुरु सहित कई जिलों में पीने के पानी की गंभीर चिंता।
शिवकुमार ने कावेरी अधिकारियों को जलाशय स्तर व वर्षा के आँकड़े पहले ही सौंपे।
तमिलनाडु के CM एम.के.
स्टालिन के 3 अगस्त को विधान सौधा आने और बातचीत की उम्मीद।
सर्वदलीय बैठक प्रस्तावित; केंद्र सरकार से मध्यस्थ की भूमिका निभाने की माँग।

कर्नाटक के पूर्व कृषि मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने 30 जुलाई को बेंगलुरु में एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों से कावेरी जल विवाद का राजनीतिकरण न करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संकट की घड़ी में पीने के पानी की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक खींचतान से स्थिति और बिगड़ सकती है।

मुख्य घटनाक्रम

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) द्वारा कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के तुरंत बाद बुलाई गई। चेलुवरयास्वामी ने बताया कि कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में इस माह अपेक्षित वर्षा नहीं हुई है और आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना कम बताई जा रही है। बेंगलुरु सहित कई जिलों में पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पहले ही कावेरी अधिकारियों के समक्ष जलाशय के जल स्तर और वर्षा के आँकड़े रख चुके हैं। सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है।

सरकार का रुख

चेलुवरयास्वामी ने दो-टूक कहा, 'सरकार का रुख साफ है — वह इस समय पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि पानी पहले ही छोड़ दिया गया होता, तो अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखने और कानूनी लड़ाई लड़ने की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी फसलों की सिंचाई से अधिक ज़रूरी पीने के पानी का संरक्षण है।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि हर दो-तीन साल में सूखे जैसे हालात बनते हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों एच.डी. देवेगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, बी.एस. येदियुरप्पा और सिद्धारमैया के कार्यकाल में भी इसी तरह की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं।

विपक्ष पर निशाना

विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए चेलुवरयास्वामी ने कहा कि कुछ लोग किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस संवेदनशील समय में अनावश्यक राजनीति से बचें और समाधान खोजने में सरकार का सहयोग करें। उनके अनुसार, इस विवाद में केंद्र सरकार को पहल कर मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।

आगे क्या होगा

चेलुवरयास्वामी ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं और उनके 3 अगस्त को विधान सौधा आने की उम्मीद है। कावेरी मुद्दे पर प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं से रचनात्मक सुझाव मिलने की भी उन्होंने उम्मीद जताई। उन्होंने कन्नड़ संगठनों और आम जनता से धैर्य बनाए रखने और सरकार को इस विवाद के समाधान का अवसर देने का आग्रह किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस, सर्वदलीय बैठक और केंद्र से मध्यस्थता की माँग। चेलुवरयास्वामी का बयान सत्तारूढ़ दल की रक्षात्मक स्थिति को दर्शाता है, लेकिन असली सवाल यह है कि दशकों पुराने इस विवाद का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पाया। जब तक कावेरी बेसिन में जल-प्रबंधन का दीर्घकालिक ढाँचा नहीं बनता और वर्षा-निर्भरता कम नहीं होती, यह संकट हर सूखे मौसम में दोहराता रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CWRC ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिया है?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक कावेरी जल छोड़ने का निर्देश दिया है। कर्नाटक सरकार ने कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में कम वर्षा और पीने के पानी की कमी का हवाला देते हुए इस आदेश पर अपनी असमर्थता जताई है।
कर्नाटक सरकार पानी छोड़ने से क्यों हिचकिचा रही है?
कर्नाटक सरकार का कहना है कि कावेरी बेसिन में इस माह अपेक्षित वर्षा नहीं हुई और आगे भी भारी बारिश की संभावना कम है। बेंगलुरु सहित कई जिलों में पीने के पानी की उपलब्धता पहले से ही चिंताजनक है, इसलिए सरकार की प्राथमिकता पेयजल सुरक्षा है।
तमिलनाडु के CM स्टालिन कब कर्नाटक आएँगे?
पूर्व मंत्री चेलुवरयास्वामी के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं और उनके 3 अगस्त को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा आने की उम्मीद है।
कावेरी विवाद में केंद्र सरकार की क्या भूमिका माँगी जा रही है?
चेलुवरयास्वामी ने केंद्र सरकार से इस अंतर-राज्यीय विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को पहले ही स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।
क्या कर्नाटक में पहले भी ऐसे कावेरी संकट आए हैं?
हाँ, चेलुवरयास्वामी ने बताया कि हर दो-तीन साल में सूखे जैसे हालात बनते हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों एच.डी. देवेगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, बी.एस. येदियुरप्पा और सिद्धारमैया के कार्यकाल में भी इसी तरह की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं।
राष्ट्र प्रेस
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