कावेरी जल विवाद: पीने का पानी सर्वोच्च प्राथमिकता, राजनीति बंद करें — पूर्व मंत्री चेलुवरयास्वामी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व कृषि मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने 30 जुलाई को बेंगलुरु में एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी दलों से कावेरी जल विवाद का राजनीतिकरण न करने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संकट की घड़ी में पीने के पानी की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की राजनीतिक खींचतान से स्थिति और बिगड़ सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) द्वारा कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के तुरंत बाद बुलाई गई। चेलुवरयास्वामी ने बताया कि कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में इस माह अपेक्षित वर्षा नहीं हुई है और आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की संभावना कम बताई जा रही है। बेंगलुरु सहित कई जिलों में पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चिंताएँ हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पहले ही कावेरी अधिकारियों के समक्ष जलाशय के जल स्तर और वर्षा के आँकड़े रख चुके हैं। सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों के साथ भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है।
सरकार का रुख
चेलुवरयास्वामी ने दो-टूक कहा, 'सरकार का रुख साफ है — वह इस समय पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि पानी पहले ही छोड़ दिया गया होता, तो अधिकारियों के समक्ष पक्ष रखने और कानूनी लड़ाई लड़ने की नौबत ही नहीं आती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी फसलों की सिंचाई से अधिक ज़रूरी पीने के पानी का संरक्षण है।
उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि हर दो-तीन साल में सूखे जैसे हालात बनते हैं। पूर्व मुख्यमंत्रियों एच.डी. देवेगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, बी.एस. येदियुरप्पा और सिद्धारमैया के कार्यकाल में भी इसी तरह की परिस्थितियाँ उत्पन्न हुई थीं।
विपक्ष पर निशाना
विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए चेलुवरयास्वामी ने कहा कि कुछ लोग किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस संवेदनशील समय में अनावश्यक राजनीति से बचें और समाधान खोजने में सरकार का सहयोग करें। उनके अनुसार, इस विवाद में केंद्र सरकार को पहल कर मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए।
आगे क्या होगा
चेलुवरयास्वामी ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं और उनके 3 अगस्त को विधान सौधा आने की उम्मीद है। कावेरी मुद्दे पर प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में विपक्षी नेताओं से रचनात्मक सुझाव मिलने की भी उन्होंने उम्मीद जताई। उन्होंने कन्नड़ संगठनों और आम जनता से धैर्य बनाए रखने और सरकार को इस विवाद के समाधान का अवसर देने का आग्रह किया।