कावेरी जल विवाद: 15 जुलाई की CWMA बैठक के बाद फैसला लेगी कर्नाटक सरकार — सीएम शिवकुमार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 13 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ने पर कोई भी निर्णय 15 जुलाई को प्रस्तावित कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की बैठक के उपरांत ही लेगी। अपने सरकारी आवास के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह भी घोषणा की कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से आरंभ होगा।
CWMA बैठक से पहले कर्नाटक की रणनीति
शिवकुमार ने कहा कि राज्य CWMA के समक्ष अपना पक्ष पूरी मजबूती से रखेगा। उन्होंने तीन प्राथमिकताएँ गिनाईं — कर्नाटक के किसानों के हितों की रक्षा, पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप तमिलनाडु के जल-हिस्से का पालन करना। उन्होंने कहा, 15 जुलाई की बैठक में कर्नाटक का पक्ष रखा जाएगा, जिसके बाद ही अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
मांड्या विधायकों की माँग पर प्रतिक्रिया
मांड्या और श्रीरंगपट्टनम के विधायकों द्वारा पानी छोड़ने की माँग के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि ये विधायक जिले के प्रभारी मंत्री के साथ उनसे मिल चुके हैं और अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने दोहराया कि CWMA बैठक के बाद ही कोई ठोस निर्णय होगा। गौरतलब है कि कावेरी जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय प्राधिकरण की भूमिका निर्णायक रही है।
विधानसभा मानसून सत्र और दिल्ली दौरा
शिवकुमार ने बताया कि कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त 2026 से शुरू होने का प्रस्ताव है। नई दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे एक दिन के लिए आधिकारिक कार्य से राष्ट्रीय राजधानी जाएंगे और पार्टी नेता अगले कुछ दिनों में आगे की चर्चा के लिए तारीख तय करेंगे।
KPSC अध्यक्ष निलंबन और अन्य मुद्दे
राज्यपाल द्वारा कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के अध्यक्ष को निलंबित किए जाने पर शिवकुमार ने कहा कि राज्यपाल का आदेश जारी हो चुका है और आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य को अगले आदेश तक अध्यक्ष की जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने तिरुमाला मंदिर में पहली 'आरती' के विशेषाधिकार पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह अधिकार ऐतिहासिक रूप से मैसूर के महाराजाओं के समय से कर्नाटक के पास रहा है। अब यह अवसर किसी एक निर्धारित सरकारी अधिकारी की बजाय कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों, न्यायाधीशों, सांसदों, मेयरों, तहसीलदारों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुविधा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं होगी और शेष सभी नियम तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) प्रशासन के अधीन ही रहेंगे।
शिवकुमार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद एच. हनुमंथप्पा को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें राज्य और देश दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाला अनुभवी राजनेता बताया।
15 जुलाई की CWMA बैठक के नतीजे यह तय करेंगे कि कर्नाटक तमिलनाडु को कितना पानी देगा — और इस निर्णय का असर दोनों राज्यों के किसानों व आम नागरिकों पर सीधे पड़ेगा।