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नदी-जोड़ो परियोजना पर कुमारस्वामी का सवाल: पानी का हिस्सा तय हुए बिना CM शिवकुमार ने सहमति कैसे दी?

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नदी-जोड़ो परियोजना पर कुमारस्वामी का सवाल: पानी का हिस्सा तय हुए बिना CM शिवकुमार ने सहमति कैसे दी?

सारांश

कर्नाटक में जल-राजनीति फिर गरमाई। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार पर निशाना साधा — 2023 की DPR में कर्नाटक को शुरुआत में शून्य आवंटन था, फिर भी राज्य ने ₹1 लाख करोड़ निवेश की बात कह दी। पानी के हिस्से की गारंटी के बिना सहमति देना राज्य के सिंचाई हितों से खिलवाड़ है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 10 जुलाई को बेंगलुरु में CM डीके शिवकुमार की नदी-जोड़ो परियोजना पर सहमति देने के लिए आलोचना की।
2023 की DPR में कुल 247 टीएमसी पानी में कर्नाटक को शुरुआत में कोई आवंटन नहीं था; बाद में 15 टीएमसी केवल पेयजल के लिए मिला।
आंध्र प्रदेश को 90 टीएमसी और तेलंगाना व तमिलनाडु को 60-60 टीएमसी आवंटित किए गए थे।
शिवकुमार ने कर्नाटक की ओर से ₹1 लाख करोड़ निवेश की तैयारी का दावा किया था।
कुमारस्वामी ने पूछा — केंद्रीय जल आयोग या राष्ट्रीय जल बोर्ड से परामर्श लिए बिना सहमति कैसे दी गई?

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 10 जुलाई को बेंगलुरु में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तीखा हमला बोला और पूछा कि कर्नाटक को कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना में पानी का हिस्सा सुनिश्चित हुए बिना राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव पर सहमति कैसे जता दी। शिवकुमार ने हाल ही में बेलगावी में दावा किया था कि कर्नाटक ने तीन नदियों को जोड़ने की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अपनी स्वीकृति दे दी है और राज्य ₹1 लाख करोड़ निवेश करने को तैयार है।

मुख्य विवाद: पानी के बंटवारे पर सवाल

कुमारस्वामी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें नदियों को जोड़ने के विचार से सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है, परंतु सहमति देने से पहले यह जानना अनिवार्य था कि कर्नाटक को इस परियोजना के तहत वास्तव में कितना पानी मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य के सिंचाई हितों से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मामले पर गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपना रहे हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि नदियों के जल-बंटवारे के मुद्दों को उस तरह नहीं सुलझाया जा सकता जैसे बेंगलुरु में रियल एस्टेट का सौदा होता है। उनके अनुसार, यदि मुख्यमंत्री तकनीकी पहलुओं से अनभिज्ञ थे, तो उन्हें सार्वजनिक बयान देने से पहले सिंचाई विशेषज्ञों, इंजीनियरों और कानूनी टीम से परामर्श लेना चाहिए था।

डीपीआर में कर्नाटक को क्या मिला था

कुमारस्वामी ने 2023 में तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) का हवाला देते हुए बताया कि कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना के तहत कुल 247 टीएमसी पानी के उपयोग की योजना बनाई गई थी। उनके अनुसार, इस DPR में आंध्र प्रदेश को 90 टीएमसी, जबकि तेलंगाना और तमिलनाडु को 60-60 टीएमसी पानी आवंटित किया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक प्रस्ताव में कर्नाटक के लिए कोई आवंटन नहीं था।

कुमारस्वामी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के लगातार प्रयासों के बाद कर्नाटक को बाद में मलाप्रभा नदी से 15 टीएमसी पानी आवंटित किया गया, वह भी केवल पेयजल उपयोग की शर्त के साथ।

तुंगभद्रा जलाशय पर भी उठाए सवाल

केंद्रीय मंत्री ने तुंगभद्रा जलाशय के क्रेस्ट गेट्स के हालिया उद्घाटन का भी जिक्र किया, जिसमें तीन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए थे। उन्होंने सवाल किया कि जब पड़ोसी राज्यों को पानी से लाभ मिलेगा तो कर्नाटक अकेले खर्च क्यों उठाए। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री की इस बात के लिए भी आलोचना की कि उन्होंने विपक्ष और जनता को बताए बिना ही तुंगभद्रा जलाशय की गाद हटाने (डिसिल्टिंग) के बारे में पड़ोसी राज्यों से चर्चा की।

संस्थागत प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न

कुमारस्वामी ने यह भी पूछा कि क्या कर्नाटक की सहमति की घोषणा से पहले केंद्रीय जल आयोग या राष्ट्रीय जल बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर विधिवत चर्चा की थी। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस कथित दावे पर भी आपत्ति जताई जिसमें शिवकुमार ने कहा था कि केंद्र सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेगी।

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में जल-राजनीति पहले से ही संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराज्यीय नदी जल विवाद दशकों से अनसुलझे हैं। आने वाले दिनों में राज्य सरकार की ओर से इस मामले पर औपचारिक स्पष्टीकरण की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ₹1 लाख करोड़ निवेश का वादा राज्य के हित में नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के हित में जाता है। गौरतलब है कि अंतरराज्यीय नदी जल विवादों में कर्नाटक पहले भी कावेरी और कृष्णा दोनों मामलों में पिछड़ता रहा है। मुख्यमंत्री को सार्वजनिक बयान से पहले संसदीय और तकनीकी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था — यह जवाबदेही का सवाल है, न केवल राजनीतिक असहमति का।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना क्या है?
यह एक प्रस्तावित राष्ट्रीय परियोजना है जिसमें कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने की योजना है। 2023 में तैयार DPR के अनुसार इस परियोजना में कुल 247 टीएमसी पानी के उपयोग की योजना है, जिसे कई राज्यों में वितरित किया जाना था।
कुमारस्वामी ने CM शिवकुमार की आलोचना क्यों की?
कुमारस्वामी का आरोप है कि शिवकुमार ने कर्नाटक को परियोजना में पानी का हिस्सा सुनिश्चित कराए बिना ही सहमति दे दी और ₹1 लाख करोड़ निवेश का वादा कर दिया। उनके अनुसार मुख्यमंत्री को पहले केंद्रीय जल आयोग और सिंचाई विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए था।
2023 की DPR में कर्नाटक को कितना पानी आवंटित किया गया था?
कुमारस्वामी के दावे के अनुसार, शुरुआत में कर्नाटक को कोई आवंटन नहीं था। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के प्रयासों के बाद कर्नाटक को मलाप्रभा नदी से 15 टीएमसी पानी मिला, लेकिन वह भी केवल पेयजल उपयोग की शर्त पर।
तुंगभद्रा जलाशय को लेकर विवाद क्या है?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष और जनता को बताए बिना ही तुंगभद्रा जलाशय की गाद हटाने (डिसिल्टिंग) के बारे में पड़ोसी राज्यों से चर्चा की। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब पानी का लाभ दूसरे राज्यों को मिलेगा तो खर्च कर्नाटक क्यों उठाए।
इस विवाद का कर्नाटक के किसानों पर क्या असर हो सकता है?
यदि कर्नाटक बिना पर्याप्त जल-आवंटन के इस परियोजना में शामिल होता है, तो राज्य के सिंचाई-निर्भर किसानों को भविष्य में पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है। कुमारस्वामी का कहना है कि सिंचाई हितों की रक्षा के लिए पहले जल-हिस्से की कानूनी गारंटी ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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